कोलकाता। पश्चिम बंगाल की नंदीग्राम विधानसभा सीट पर होने वाले उपचुनाव से पहले भारतीय जनता पार्टी की प्रत्याशी हसीरानी रथ के चुनावी हलफनामे को लेकर विवाद खड़ा हो गया है। कांग्रेस ने उनके हलफनामे में जन्म वर्ष और 10वीं की परीक्षा पास करने के वर्ष में कथित विसंगति का आरोप लगाते हुए कलकत्ता हाईकोर्ट का रुख किया है।
कांग्रेस की ओर से अधिवक्ता रित्जू घोषाल ने अदालत में कहा कि हलफनामे में हसीरानी रथ की जन्म संबंधी जानकारी और माध्यमिक परीक्षा पास करने के वर्ष के बीच बड़ा अंतर दिखाई देता है। आरोप है कि दस्तावेज में 1965 में माध्यमिक परीक्षा पास करने की जानकारी दर्ज है, जबकि उनकी उम्र इससे मेल नहीं खाती।
कांग्रेस ने मांग की है कि यदि जांच में शैक्षणिक योग्यता से जुड़ी जानकारी गलत पाई जाती है तो उनकी उम्मीदवारी पर कानूनी कार्रवाई की जाए। अदालत ने मामले को सुनवाई के लिए सूचीबद्ध किया है।
स्कूल के रिकॉर्ड को लेकर भी उठे सवाल
कांग्रेस ने उस स्कूल से जुड़े रिकॉर्ड पर भी सवाल उठाए हैं, जिसका नाम हसीरानी रथ के हलफनामे में शैक्षणिक संस्था के तौर पर दर्ज बताया गया है। पार्टी का दावा है कि स्कूल को शुरुआती दौर में सीमित कक्षाओं तक ही मान्यता प्राप्त थी और बाद में उच्च कक्षाओं के लिए अनुमति मिली।
कांग्रेस का यह भी कहना है कि चुनावी हलफनामे की जांच चुनाव प्रक्रिया के दौरान की गई थी, इसके बावजूद कथित विसंगति पर कार्रवाई नहीं हुई। अब अदालत के सामने मुख्य सवाल यह होगा कि हलफनामे में दर्ज जानकारी वास्तव में गलत है या इसमें महज लिखने की त्रुटि हुई है।
BJP ने बताया टाइपिंग की गलती
भाजपा ने कांग्रेस के आरोपों को खारिज किया है। पार्टी का कहना है कि हसीरानी रथ ने 1980 में 10वीं कक्षा की पढ़ाई पूरी की थी और हलफनामे में 1965 का उल्लेख टाइपिंग की गलती के कारण हुआ।
भाजपा की ओर से यह भी कहा गया है कि हसीरानी रथ की उम्र को लेकर कोई वास्तविक विवाद नहीं है। एक रिपोर्ट के अनुसार, पार्टी ने उनके जन्म की तारीख से संबंधित स्कूल प्रमाणपत्र भी सामने रखा है।
हाईकोर्ट में अब क्या होगा?
मामले में अदालत संबंधित दस्तावेजों और पक्षों की दलीलों पर विचार कर सकती है। जन्म प्रमाणपत्र, स्कूल रिकॉर्ड और माध्यमिक परीक्षा से संबंधित प्रमाणपत्रों की जानकारी विवाद की स्थिति स्पष्ट करने में महत्वपूर्ण हो सकती है।
सिर्फ हलफनामे में किसी जानकारी का गलत दर्ज होना और उस आधार पर उम्मीदवार की उम्मीदवारी रद्द होना अलग-अलग कानूनी प्रश्न हैं। इसका अंतिम निर्णय संबंधित कानूनी प्रावधानों और अदालत के आदेश पर निर्भर करेगा।
नंदीग्राम उपचुनाव में पहले से जारी है राजनीतिक हलचल
नंदीग्राम उपचुनाव में इससे पहले भी कई महत्वपूर्ण घटनाक्रम सामने आ चुके हैं। तृणमूल कांग्रेस की प्रत्याशी संचिता प्रधान डे ने नामांकन वापस ले लिया था। इसके बाद ममता बनर्जी ने कांग्रेस प्रत्याशी मिलन प्रधान को समर्थन देने की घोषणा की।
इसके कुछ समय बाद मिलन प्रधान को 2007 के नंदीग्राम आंदोलन से जुड़े पुराने आपराधिक मामले में गिरफ्तार किया गया। 23 सितंबर को उन्हें एक अन्य मामले में 7 अक्टूबर तक न्यायिक हिरासत में भेजे जाने की रिपोर्ट सामने आई।
नंदीग्राम में उपचुनाव 6 अक्टूबर को होना है, जबकि मतगणना 9 अक्टूबर को प्रस्तावित है। ऐसे में प्रत्याशियों से जुड़े कानूनी मामलों और दस्तावेजों की जांच ने चुनावी प्रक्रिया पर अतिरिक्त ध्यान खींचा है।
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