कांग्रेस की नई सोशल इंजीनियरिंग: ‘जितनी आबादी, उतनी हिस्सेदारी’—50% टिकटों पर पिछड़ों का दावा

कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे और राहुल गांधी ने आगामी चुनावों को लेकर पार्टी की सामाजिक रणनीति पर बड़ा फैसला किया है. सूत्रों के मुताबिक, कांग्रेस ने ‘जिसकी जितनी संख्या भारी, उसकी उतनी हिस्सेदारी’ के तर्क को चुनावी मैदान में उतारने का मन बनाया है.पार्टी नेतृत्व के स्तर पर इस बात पर सहमति बनी है कि फिलहाल टिकट बंटवारे में कम से कम 50 प्रतिशत हिस्सेदारी SC, ST, OBC और अल्पसंख्यक वर्गों को दी जाएगी. इसका मकसद सिर्फ उम्मीदवार चयन तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि संगठन और राजनीतिक प्रतिनिधित्व में भी सामाजिक संतुलन साधने की कोशिश होगी.इतना ही नहीं, कांग्रेस अब मीडिया और सार्वजनिक मंचों पर पार्टी का पक्ष रखने वाले चेहरों को लेकर भी बड़ा बदलाव करने जा रही है. सूत्र बताते हैं कि पार्टी के प्रवक्ताओं का चयन सभी छोटे और वंचित वर्गों से किया जाएगा, ताकि मीडिया में सिर्फ अगड़ी जातियों के चेहरे ही पार्टी की आवाज न बनें. अभी पार्टी में कुछ प्रवक्ता ही पिछड़े वर्ग और अल्पसंख्यक वर्ग से आते हैं, अब उनको प्राथमिकता दिए जाने के निर्देश हैं. जैसे प्रोफेसर रतनलाल, रविकांत, साधना भारती, गुरदीप सप्पल हैं.

कांग्रेस नेतृत्व का मानना है कि सामाजिक न्याय और प्रतिनिधित्व का संदेश जमीन तक तभी पहुंचेगा, जब पार्टी का चेहरा और आवाज दोनों समाज के हर वर्ग से जुड़े हों. राहुल गांधी पहले ही कई मंचों से सामाजिक प्रतिनिधित्व और जातिगत असंतुलन का मुद्दा उठा चुके हैं, अब उसे संगठनात्मक फैसलों में उतारने की तैयारी है.

पिछड़े, दलित और आदिवासी को साधने की कोशिश

राजनीतिक जानकारों की मानें तो यह फैसला कांग्रेस की उस रणनीति का हिस्सा है, जिसके जरिये पार्टी पिछड़े, दलित और आदिवासी मतदाताओं को एक बार फिर अपने पाले में लाने की कोशिश कर रही है. आने वाले दिनों में टिकट वितरण और प्रवक्ता सूची में इस फैसले की झलक साफ दिख सकती है.

About NW-Editor

Check Also

योगी सरकार का रिकॉर्ड बजट पेश, विकास योजनाओं पर बड़ा फोकस

उत्तर प्रदेश के वित्त मंत्री सुरेश खन्ना ने राज्य विधानसभा में वित्त वर्ष 2026-27 के …

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *