‘जब 5 एकड़ जमीन मस्जिद के लिए दी गई थी तो उसमें म्यूजियम क्यों बनने लगा? हिंदुस्तान का मुसलमान मस्जिद के लिए पैसा दे सकता है, लेकिन वो कभी भी म्यूजियम के लिए चंदा नहीं देगा। जफर फारुकी धन्नीपुर मस्जिद में अस्पताल और म्यूजियम का बेतुका नक्शा ले लाए। उनकी सोच थी कि हम इसे लोगों को दिखाएंगे तो देश-विदेश से खूब पैसा मिलेगा और बिजनेस बढ़ेगा। ‘‘उन्हें मालूम होना चाहिए कि हिंदुस्तान का मुसलमान बेवकूफ नहीं है। 6 साल बाद अब न तो लोग बाबरी की जगह नई मस्जिद बनने की मांग कर रहे हैं, न ही उसके निर्माण में दिलचस्पी रखते हैं। अवध के मुसलमानों ने तो ये उम्मीद ही छोड़ दी है कि अब मस्जिद बनेगी।‘
ये गुस्सा बाबरी मस्जिद के गवाह और सुप्रीम कोर्ट में उसका केस लड़ने वाले इकबाल अंसारी का है। राम मंदिर के ठीक सामने वाली गली में इकबाल 3 कमरों वाले मकान में रहते हैं। वो हर दिन हजारों की संख्या में श्रद्धालुओं को रामलला के दर्शन करते देखते हैं। उन्हें खुशी है कि मंदिर की वजह से अयोध्या की चकाचौंध बढ़ गई है, लेकिन बाबरी की जगह अब तक नई मस्जिद न बनने का मलाल भी है।
9 नवंबर 2019 को सुप्रीम कोर्ट ने राम जन्मभूमि-बाबरी मस्जिद विवाद पर फैसला सुनाया। 6 साल बाद राममंदिर का निर्माण आखिरी चरण में है। जबकि मस्जिद का नक्शा तक पास नहीं हो पाया। हाल ही में एक RTI से पता चला कि निर्माण के लिए जरूरी NOC न मिलने से मस्जिद का लेआउट प्लान भी रिजेक्ट हो गया है। यानी कि अब फिर मस्जिद का नया नक्शा बनेगा और लोगों का इंतजार भी बढ़ जाएगा।
मस्जिद का काम आखिर कहां अटका है? ले-आउट प्लान ऑटो रिजेक्ट होने के बाद अब कमेटी क्या फैसला लेगी? क्या लंबे इंतजार के बाद अवध के मुसलमान बाबरी मस्जिद को लेकर नाउम्मीद हो चुके हैं?
सबसे पहले जानिए मस्जिद का काम शुरू होने से पहले क्यों बंद हुआ… ट्रस्ट IICF यानी इंडो इस्लामिक कल्चरल फाउंडेशन को धन्नीपुर कस्बे में नई मस्जिद बनाने की जिम्मेदारी मिली है। धन्नीपुर, फैजाबाद-लखनऊ नेशनल हाईवे पर रौनाही थाने से सटा मुस्लिम बहुल इलाका है। लगभग 2500 की आबादी वाले इस कस्बे में 60% लोग मुस्लिम समुदाय से ताल्लुक रखते हैं।
यहां की मशहूर शाहगदा शाह मजार के चारों तरफ खाली पड़ी 5 एकड़ जमीन पर IICF ने बाबरी की जगह 5 मीनारों वाली ‘मोहम्मद-बिन-अब्दुल्लाह’ मस्जिद बनाने का ऐलान किया था। फंड की कमी और नक्शा न पास होने के कारण इसका काम ठंडे बस्ते में पड़ा है।
16 सितंबर, 2025 को धन्नीपुर मस्जिद एक बार फिर चर्चा में आ गई। वजह थी अयोध्या के देवनगर कॉलोनी में रहने वाले जर्नलिस्ट ओम प्रकाश सिंह की RTI, जिस पर ADA ने जवाब देते हुए बताया कि मस्जिद ट्रस्ट ने अब तक प्रोजेक्ट फीस के तौर पर महज 4 लाख रुपए जमा किए हैं।
दी गई जमीन पर किसी भी तरह का निर्माण करने से पहले IICF को PWD, प्रदूषण नियंत्रण विभाग, अग्निशमन विभाग, नागरिक उड्डयन, सिंचाई और नगर निगम जैसे संस्थानों से NOC लेनी जरूरी है। ये काम मस्जिद ट्रस्ट बीते 6 सालों में नहीं कर पाया है।
मस्जिद का नक्शा खारिज होने पर ADA के सेक्रेटरी हेम सिंह कहते हैं, ‘23 जून 2021 को मस्जिद ट्रस्ट ने नक्शे की मंजूरी के लिए आवेदन किया था, लेकिन बाद में उन्होंने पहला नक्शा वापस ले लिया।’
’नवंबर 2024 तक सभी NOC क्लियर करवाने की डेडलाइन थी। मस्जिद ट्रस्ट तय समय तक ये काम नहीं करवा सका। यही वजह रही कि इमारत का ले-आउट प्लान पोर्टल से ऑटोमैटिक रिजेक्ट कर दिया गया।’
राम जन्मभूमि-बाबरी मस्जिद विवाद पर फैसला सुनाते हुए सुप्रीम कोर्ट ने सुन्नी सेंट्रल वक्फ बोर्ड को अयोध्या में नई मस्जिद बनाने का आदेश दिया था। इस पर अमल करते हुए तत्कालीन फैजाबाद DM अनुज कुमार झा ने 3 अगस्त 2020 को अयोध्या से 25KM दूर धन्नीपुर की 5 एकड़ जमीन वक्फ बोर्ड को सौंपी थी।
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