बीते दिन ईरान ने कतर और संयुक्त अरब अमीरात के ऊर्जा ठिकानों को निशाना बनाया था। आज उसने सऊदी अरब की प्रमुख यानबू (Yanbu) रिफाइनरी पर ड्रोन हमला किया है। यह हमला ऐसे समय में हुआ है जब ईरान पहले ही ‘होर्मुज जलडमरूमध्य’ को बंद कर वैश्विक तेल सप्लाई ठप कर चुका है। बता दें कि ईरान के रिवोल्यूशनरी गार्ड्स (IRGC) ने पहले ही इस रिफाइनरी समेत कई खाड़ी देशों के तेल ठिकानों को खाली करने की चेतावनी दी थी।
रिपोर्ट्स के अनुसार आज सऊदी अरब के लाल सागर तट पर स्थित यानबू शहर में स्थित रिफाइनरी में यह हमला हुआ। यह रिफाइनरी सऊदी अरामको और अमेरिकी कंपनी एक्सॉनमोबिल (ExxonMobil) का एक संयुक्त उद्यम है। शुरुआती रिपोर्ट्स के अनुसार, ड्रोन रिफाइनरी के पास गिरा जिससे वहां आग लग गई। हालांकि, उद्योग सूत्रों का कहना है कि रिफाइनरी के संचालन पर इसका असर फिलहाल सीमित है।
जब से ईरान ने होर्मुज जलडमरूमध्य पर नियंत्रण किया है, तब से यानबू सऊदी अरब के लिए तेल निर्यात का सबसे क्रिटिकल रूट बन गया है। होर्मुज बंद होने के बाद सऊदी अरब अपना तेल इसी लाल सागर तट के जरिए दुनिया को भेज रहा है। अब इस रास्ते पर हमला होने का मतलब है कि सऊदी अरब का निर्यात भी पूरी तरह ठप हो सकता है। यूएई का फुजैराह पोर्ट भी हमलों के कारण बंद है। ऐसे में दुनिया के पास तेल मंगाने के रास्ते लगभग खत्म होते जा रहे हैं।
ईरान का ‘चौतरफा’ प्रहार: पिछले 24 घंटों में ईरान ने खाड़ी देशों की ऊर्जा कमर तोड़ने के लिए कई हमले किए हैं:
कतर: ‘कतरएनर्जी’ के अनुसार, रास लफान गैस प्लांट को मिसाइल हमलों से ‘भारी नुकसान’ पहुंचा है।
UAE: हबशान गैस सुविधा और बाब तेल क्षेत्र के ऊपर ड्रोन इंटरसेप्ट किए गए, जिसके बाद सुरक्षा कारणों से वहां काम रोकना पड़ा।
कुवैत: कुवैत की दो बड़ी रिफाइनरियों- मीना अल-अहमदी और मीना अब्दुल्ला पर भी ड्रोन हमले हुए हैं, जिससे वहां आग लग गई।
दुनिया के लिए खतरे की घंटी: इजरायल द्वारा ईरान के ‘साउथ पार्स’ गैस फील्ड पर किए गए हमले के जवाब में ईरान ने पूरे क्षेत्र को युद्ध की आग में झोंक दिया है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतें $115 प्रति बैरल के पार निकल गई हैं। दुनिया के कुल तेल उत्पादन का लगभग एक-तिहाई हिस्सा इसी खाड़ी क्षेत्र से आता है। शिपिंग कंपनियों ने बीमा और सुरक्षा कारणों से इस क्षेत्र में जहाजों को भेजना बंद कर दिया है।
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