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पत्नी के बाद इकलौते बेटे की भी मौत, पिता पर टूटा दुखों का पहाड़; एक ही थाली में खाते थे दोनों

बामपुर गंगा घाट पर चार बच्चों की डूबकर हुई मौत के बाद दूसरे दिन भी गांव में मातम पसरा रहा। इकलौते बेटे दीपक को खोने के दुख में पिता राजाराम राव शनिवार दोपहर अचानक बेसुध होकर गिर पड़े। मौके पर मौजूद उनकी बहन अनिता व ग्रामीणों ने उन्हें संभाला। वह चारपाई पर करीब एक घंटे तक बेसुध पड़े रहे। परिजनों के मुताबिक, राजाराम की पत्नी का पहले ही निधन हो चुका है। इकलौता बेटा दीपक ही उनके जीवन का सहारा था। वह मजदूरी के लिए बाहर जाते थे तो दीपक घर का सारा काम संभालता था। पिता के लौटने तक वह खुद भी भोजन नहीं करता था। पिता-पुत्र अक्सर एक ही थाली में भोजन करते थे। हाल ही में दीपक ने इंटरमीडिएट की परीक्षा दी थी।

पिता को उम्मीद थी कि बेटा पढ़-लिखकर परिवार की हालत सुधारेगा, लेकिन हादसे ने उनकी सारी उम्मीदें तोड़ दीं। वहीं, दो बेटों निहाल और कुनाल को खोने वाली मां किरण और ऋषभ की मां यशोदा देवी का रो-रोकर बुरा हाल है। दोनों बार-बार बदहवास हो जा रही हैं। चारों बच्चों की दादी महराजी देवी, बाबा देवनारायण और पिता अनिल राव खामोश बैठे आने-जाने वालों को निहारते रहे। घटना के समय बच्चों के बाबा देवनारायण घाट से कुछ ही दूरी पर भैंस चरा रहे थे। उन्हें हादसे की जानकारी तब हुई, जब घाट पर शोरगुल और भीड़ जुटने लगी। वह मौके पर पहुंचे और बिलखते रहे, लेकिन गंगा की धारा के आगे बेबस नजर आए। हादसे के बाद गांव में सन्नाटा पसरा है।

यह था मामला: बामपुर गंगा घाट हादसे में एक ही परिवार के चार बच्चों की मौत से हर किसी की आंख नम हो गई। अनिल और कमलेश सगे भाई हैं। इस दर्दनाक घटना में अनिल के दोनों बेटों की डूबने से मौत हो गई, जिससे उनका पूरा परिवार उजड़ गया। अनिल के बड़े बेटे हिमांशु राव उर्फ कुनाल नहवाई गांव स्थित निजी स्कूल में कक्षा छह का छात्र था, जबकि छोटा बेटा रेयांश राव उर्फ निहाल उसी स्कूल में कक्षा दो में पढ़ता था। दोनों बेटों की मौत की खबर मिलते ही मां किरन रोते-बिलखते गंगा घाट पहुंचीं और शवों को देखते ही बेसुध हो गईं। पिता अनिल गहरे सदमे में खामोश खड़े रहे। अनिल के भाई कमलेश के परिवार पर भी दुखों का पहाड़ टूट पड़ा। उनके तीन बच्चों में सबसे बड़े बेटे दिव्यांशु को मछुआरों ने बचा लिया, लेकिन छोटे बेटे ऋषभ राव की डूबने से मौत हो गई। राजाराम के बेटे दीपक (17) की भी जान चली गई।

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