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अनिल अंबानी ग्रुप पर बड़ी कार्रवाई: ₹1120 करोड़ की संपत्ति अटैच, कुल जब्ती अब पहुँची ₹10,117 करोड़

प्रवर्तन निदेशालन (ED) ने शुक्रवार को मनी लॉन्ड्रिंग जांच के तहत रिलायंस ग्रुप के चेयरमैन अनिल अंबानी से जुड़ी कंपनियों की 1,120 करोड़ रुपए की नई संपत्तियां अटैच की हैं। इसके साथ ही समूह के खिलाफ अब तक 10,117 करोड़ रुपए की संपत्ति जब्त की जा चुकी है। ED के अनुसार, ताजा कार्रवाई में मुंबई के बॉलार्ड एस्टेट स्थित रिलायंस सेंटर, फिक्स डिपॉजिट (FD), बैंक बैलेंस और अनलिस्टेड निवेश सहित 18 संपत्तियां अस्थायी रूप से अटैच की गई हैं। इसके साथ ही रिलायंस इन्फ्रास्ट्रक्चर की 7, रिलायंस पावर की 2 और रिलायंस वैल्यू सर्विसेज की 9 संपत्तियां भी फ्रीज की गई हैं।

ED ने समूह की अन्य कंपनियों के FD और निवेश भी अटैच किए हैं, जिनमें रिलायंस वेंचर एसेट मैनेजमेंट प्राइवेट लिमिटेड और फाई मैनेजमेंट सॉल्यूशंस प्राइवेट लिमिटेड शामिल हैं। इससे पहले बैंक लोन फ्रॉड से जुड़े मामलों में ईडी रिलायंस कम्युनिकेशंस, रिलायंस कमर्शियल फाइनेंस और रिलायंस होम फाइनेंस की 8,997 करोड़ रुपए से ज्यादा की संपत्तियां अटैच कर चुका है।

इससे पहले भी हो चुकी है कुर्की की कार्रवाई

इससे पहले ED ने 20 नवंबर को अनिल अंबानी से जुड़ी करीब 1,400 करोड़ रुपए की प्रॉपर्टीज अटैच की थीं। ये प्रॉपर्टीज नवी मुंबई, चेन्नई, पुणे और भुवनेश्वर में स्थित हैं। वहीं 3 नवंबर को फंड डायवर्जन मामले में अनिल अंबानी के रिलायंस ग्रुप से जुड़ी 132 एकड़ जमीन को अटैच किया था। यह जमीन धीरूभाई अंबानी नॉलेज सिटी (DAKC) नवी मुंबई में है, जिसकी वैल्यू 4,462.81 करोड़ रुपए है। इसके अलावा ग्रुप से जुड़ी 40 से ज्यादा प्रॉपर्टीज को भी अटैच किया था। इन प्रॉपर्टीज में अनिल अंबानी का पाली हिल वाला घर भी है। अटैच की गई प्रॉपर्टीज की कुल वैल्यू 3,084 करोड़ रुपए बताई गई थी।

जांच में फंड फंड्स के गलत इस्तेमाल का खुलासा

ED ने जांच में पाया था कि रिलायंस होम फाइनेंस (RHFL) और रिलायंस कॉमर्शियल फाइनेंस (RCFL) में बड़े पैमाने पर फंड्स का गलत इस्तेमाल हुआ है। 2017 से 2019 के बीच यस बैंक ने RHFL में 2,965 करोड़ और RCFL में 2,045 करोड़ का इन्वेस्टमेंट किया था, लेकिन दिसंबर 2019 तक ये अमाउंट नॉन-परफॉर्मिंग एसेट्स (NPA) बन गए।

RHFL का 1,353 करोड़ और RCFL का 1,984 करोड़ अभी तक बकाया है। कुल मिलाकर यस बैंक को 2,700 करोड़ से ज्यादा का नुकसान हुआ। ED के मुताबिक, ये फंड्स रिलायंस ग्रुप की दूसरी कंपनियों में डायवर्ट किए गए। लोन अप्रूवल प्रोसेस में भी कई गड़बड़ियां मिलीं, जैसे- कुछ लोन उसी दिन अप्लाई, अप्रूव और डिस्बर्स हो गए। फील्ड चेक और मीटिंग्स स्किप हो गईं। डॉक्यूमेंट्स ब्लैंक या डेटलेस मिले।

ED ने इसे ‘इंटेंशनल कंट्रोल फेल्योर’ बताया है। जांच PMLA की धारा 5(1) के तहत चल रही है और 31 अक्टूबर 2025 को अटैचमेंट ऑर्डर जारी हुए।

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