काज़ी-ए-शहर का इंतकाल, उमड़ा जनसैलाब

– हसवा स्थित आबाई कब्रिस्तान में बाद नमाज जोहर हुए सुपुर्द-ए-खाक
फतेहपुर। काज़ी-ए-शहर, आलिम-ए-दीन और मुअज्ज़ज़ रूहानी शख्सियत कारी फरीद उद्दीन क़ादरी का गुरूवार की भोर अचानक इंतेक़ाल हो गया। जैसे ही यह खबर सार्वजनिक हुई तो पूरे शहर व आसपास के इलाक़ों में रंजो-ग़म की लहर दौड़ गई। बड़ी संख्या में लोग उनके आवास पहुंचे और परिवार को ढाढंस बंधाया। हसवा स्थित आबाई कब्रिस्तान में बाद नमाज जोहर सुपुर्द-ए-खाक किया गया। बताते चलें कि कारी फरीद उद्दीन क़ादरी अपनी दीनी खिदमात, इल्मी बसीरत, अख़लाक और सामाजिक रहनुमाई की वजह से अवाम में बेहद मक़बूल थे। उनका इंतेक़ाल जिले के लिए एक ना-क़ाबिले-तलाफ़ी नुक़सान है। शहर मरहूम को ख़िराज-ए-अक़ीदत पेश करता है और पसमांदगान से दिली ताज़ियत व गहरी हमदर्दी का इज़हार करता है। सुन्नी काजी-ए-शहर के ओहदे पर वर्ष 2009 में वह काबिज हुए थे। उसके बाद से वह लगातार मुस्लिम समुदाय की रहनुमाई कर रहे थे। उनके इंतकाल की खबर पर लोगों में रंजो गम देखा गया। हसवा स्थित आबाई कब्रिस्तान पर तदफीन के मौके पर बड़ी संख्या में लोग उमड़े। नमाज-ए-जनाजा पढ़ाकर सुपुर्द-ए-खाक किया गया।

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