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नेपाल में बाढ़-भूस्खलन के बाद दो झीलों से बढ़ा खतरा: एक से पानी का रिसाव जारी; 2500 लोग लापता; 320 थे भारतीय

काठमांडू। नेपाल में बुधवार को आई भीषण बाढ़ और भूस्खलन के बाद हालात अब भी चिंताजनक बने हुए हैं। नेपाल-चीन सीमा के पास भूस्खलन से दो नई झीलें बन गई हैं। इनमें से एक झील से लगातार पानी रिस रहा है, जबकि दूसरी झील का आकार लगातार बढ़ रहा है। अधिकारियों को आशंका है कि जलस्तर बढ़ने पर दोबारा बाढ़ या भूस्खलन की स्थिति पैदा हो सकती है।

बाढ़ और भूस्खलन से नेपाल और तिब्बत में भारी तबाही हुई है। अब तक 586 लोगों की मौत की जानकारी सामने आई है, जबकि करीब 2,500 लोग लापता बताए जा रहे हैं। लापता लोगों में लगभग 320 भारतीय नागरिक भी शामिल हैं। इसके अलावा करीब 400 भारतीय नागरिक अभी तिब्बत में फंसे होने की जानकारी है।

दो झीलों पर प्रशासन की निगरानी

भूस्खलन के कारण बने दोनों जलाशय नेपाल-चीन सीमा के पास स्थित हैं। इसी क्षेत्र में बुधवार को अचानक आई बाढ़ ने भारी नुकसान पहुंचाया था। तेज पानी अपने साथ कीचड़, रेत, बजरी और बड़ी चट्टानें बहाकर निचले इलाकों तक ले गया।

अधिकारी सैटेलाइट तस्वीरों के जरिए दोनों झीलों के जलस्तर और आकार पर नजर रख रहे हैं। नदी के निचले हिस्सों में कैमरे और सेंसर लगाने की तैयारी भी की जा रही है, ताकि पानी के स्तर में अचानक होने वाले बदलाव की तत्काल जानकारी मिल सके।

राहत और बचाव अभियान जारी

नेपाल सरकार ने राहत और बचाव अभियान में 13,295 सुरक्षाकर्मियों को तैनात किया है। इनमें नेपाल पुलिस, नेपाली सेना और आर्म्ड पुलिस फोर्स के जवान शामिल हैं। अब तक 3,253 लोगों को सुरक्षित निकाला जा चुका है।

बचाव अभियान के तहत हेलिकॉप्टरों से एयरलिफ्ट, प्रभावित गांवों को खाली कराना, मलबे में फंसे लोगों की तलाश और घायलों को अस्पताल पहुंचाने का काम किया जा रहा है।

भारत ने बढ़ाया मदद का हाथ

भारत ने नेपाल के बाढ़ प्रभावित लोगों के लिए अब तक 57.5 टन आपातकालीन राहत सामग्री भेजी है। इसके अलावा डॉक्टरों और पैरामेडिकल कर्मचारियों की टीम भी नेपाल पहुंची है। भारतीय दल राहत और बचाव अभियान में स्थानीय अधिकारियों की मदद कर रहा है।

नेपाल में फंसे भारतीय नागरिकों को सुरक्षित निकालने का अभियान भी जारी है। अब तक नेपाल से कई भारतीय नागरिकों को सुरक्षित बाहर निकाला जा चुका है।

सड़क और पुलों को भारी नुकसान

बाढ़ के कारण रसुवा, नुवाकोट और धादिंग समेत कई इलाकों में सड़कें और पुल बह गए हैं। यातायात व्यवस्था प्रभावित होने के कारण नेपाल सरकार ने भारत और चीन से 42 बेली ब्रिज बनाने में सहयोग मांगा है। इन पुलों के बनने से बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में आवागमन और राहत सामग्री पहुंचाने में मदद मिलने की उम्मीद है।

राहत कार्यों के बीच खतरा बरकरार

अधिकारियों के सामने सबसे बड़ी चुनौती भूस्खलन से बनी झीलों का बढ़ता जलस्तर है। यदि इनमें से किसी झील का बांध टूटता है या पानी का बहाव अचानक तेज होता है तो निचले इलाकों में फिर से बाढ़ का खतरा पैदा हो सकता है। इसी वजह से प्रभावित क्षेत्रों में राहत एवं बचाव दल लगातार स्थिति पर नजर बनाए हुए हैं।

149 भारतीय चीन से सुरक्षित नेपाल पहुंचे

नेपाल में राहत अभियान के बीच चीन की तरफ फंसे 149 भारतीय नागरिक सुरक्षित नेपाल पहुंच गए हैं। विदेश मंत्रालय के अनुसार, करीब 400 भारतीय नागरिक अभी चीन की तरफ सुरक्षित हैं और उन्हें नेपाल लाने के लिए भारतीय दूतावास लगातार समन्वय कर रहा है। वहीं करीब 320 भारतीय नागरिकों से अभी संपर्क नहीं हो पाया है

84 भारतीयों का रेस्क्यू

भारत के विदेश मंत्रालय के मुताबिक अब तक 84 भारतीय नागरिकों को नेपाल से सुरक्षित निकाला जा चुका है। इनमें तमिलनाडु के 21 लोग और त्रिशूली-1 जलविद्युत परियोजना में काम करने वाले 63 कर्मचारी शामिल हैं। भारत ने राहत सामग्री के साथ 11 सदस्यीय मेडिकल और टनल रेस्क्यू टीम भी नेपाल भेजी है।

2500 के करीब पहुंची लापता लोगों की संख्या

नेपाल और तिब्बत में भीषण बाढ़ के बाद लापता लोगों की संख्या करीब 2,500 तक पहुंच गई है। अलग-अलग एजेंसियों के आंकड़ों में अंतर है और राहत-बचाव अभियान जारी रहने के कारण संख्या लगातार बदल रही है। नेपाल में बड़ी संख्या में लोग लापता हैं, जबकि तिब्बत के ग्यिरोंग इलाके में भी सैकड़ों लोगों का अब तक पता नहीं चल पाया है।

90 हजार से ज्यादा लोग प्रभावित

अंतरराष्ट्रीय रेड क्रॉस के अनुसार इस आपदा से 90 हजार से ज्यादा लोग प्रभावित हुए हैं। बाढ़ और भूस्खलन ने सड़क, पुल, बिजली परियोजनाओं और संचार व्यवस्था को भारी नुकसान पहुंचाया है। कई दूरदराज के इलाकों तक राहत सामग्री पहुंचाना अभी भी बड़ी चुनौती बना हुआ है।

बचाव अभियान में 15 हजार से ज्यादा सुरक्षाकर्मी

नेपाल सरकार ने बड़े पैमाने पर राहत और बचाव अभियान शुरू किया है। 15 हजार से अधिक सुरक्षाकर्मी खोज एवं बचाव कार्य में लगाए गए हैं। हेलिकॉप्टरों के जरिए दुर्गम इलाकों से लोगों को निकालने के साथ-साथ मलबे और सुरंगों में फंसे लोगों की तलाश की जा रही है।

बाढ़ से तबाह हुए पुल और सड़कें

आपदा में कई महत्वपूर्ण सड़कें और पुल बह गए हैं। इससे रसुवा, नुवाकोट और आसपास के इलाकों में राहत पहुंचाने में मुश्किल आ रही है। नेपाल ने परिवहन व्यवस्था बहाल करने के लिए भारत और चीन से तकनीकी मदद और बेली ब्रिज उपलब्ध कराने का अनुरोध किया है। नेपाल के विदेश मंत्री के अनुसार फिलहाल देश को सामान्य खोज एवं बचाव दलों से ज्यादा तकनीकी सहायता की जरूरत है।

एक बच्चे की कहानी ने जगाई उम्मीद

तबाही के बीच एक राहत भरी खबर भी सामने आई है। 8 वर्षीय जोयल घले बाढ़ से बचने के लिए जंगल की ओर भाग गया और पेड़ों पर चढ़कर अपनी जान बचाई। घायल हालत में उसे हेलिकॉप्टर से सुरक्षित निकाला गया। बाद में उसकी मां से उसका मिलन हुआ। इस घटना ने आपदा के बीच परिवारों में उम्मीद जगाई है।

खतरा अभी पूरी तरह टला नहीं

सबसे बड़ी चिंता भूस्खलन से बनी झीलों और मलबे से रुकी नदियों को लेकर है। जलस्तर बढ़ने या अस्थायी बांध टूटने की स्थिति में निचले इलाकों में दूसरी बार अचानक बाढ़ आ सकती है। इसी वजह से अधिकारियों ने नदियों के किनारे रहने वाले लोगों को सतर्क रहने और सुरक्षित स्थानों पर बने रहने की सलाह दी है।

अंतिम अपडेट: नेपाल में राहत और बचाव अभियान अभी जारी है। लगातार बदलते आंकड़ों के बीच प्रशासन का फोकस लापता लोगों की तलाश, भारतीय नागरिकों की सुरक्षित वापसी और दोबारा बाढ़ के खतरे को रोकने पर है।

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