नेपाल में अचानक आई विनाशकारी बाढ़ ने भारी तबाही मचा दी है। शुरुआत में आशंका जताई गई थी कि 4.4 तीव्रता के भूकंप के झटकों के कारण ग्लेशियर टूटा और उसके बाद अचानक बाढ़ आई। हालांकि, अमेरिकी भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण (USGS) के विश्लेषण में घटना की वजह भूकंप नहीं, बल्कि ग्लेशियर के ढहने और मलबे के तेज बहाव को बताया गया है।
USGS के मुताबिक, आसपास के सिस्मिक स्टेशनों से मिले आंकड़ों, लंबी अवधि वाली भूकंपीय तरंगों और सैटेलाइट तस्वीरों के विश्लेषण के बाद यह निष्कर्ष सामने आया। एजेंसी ने इस घटना की तीव्रता को पहले बताए गए 4.4 से बढ़ाकर 5.2 किया, लेकिन इसे सामान्य भूकंप के बजाय ग्लेशियर ढहने से जुड़ी सिस्मिक घटना बताया।
ग्लेशियर टूटने से कैसे आई बाढ़?
कनाडा की कैलगरी यूनिवर्सिटी के जियोमॉर्फोलॉजी विशेषज्ञ डैनियल शुगर के अनुसार, करीब 5,200 मीटर की ऊंचाई से ग्लेशियर का बड़ा हिस्सा नीचे गिरा, जिससे भारी मात्रा में पानी और मलबा तेजी से नीचे की ओर बहा। इस अचानक बहाव ने नदी के निचले इलाकों में भीषण तबाही मचा दी।
शुगर ने आपदा से पहले और बाद की सैटेलाइट तस्वीरों की तुलना करते हुए कहा कि आसपास के ग्लेशियरों ने थोड़े समय में काफी बर्फ खोई थी। उनका अनुमान है कि बर्फ पिघलने से ग्लेशियर के भीतर पानी की मात्रा बढ़ी और पानी नीचे तक पहुंचकर सतह को कमजोर व चिकना कर गया। इसके बाद ग्लेशियर के ढहने की स्थिति बनी और अचानक भारी मात्रा में पानी व मलबा नीचे की ओर बह निकला।
नेपाल ने क्या आशंका जताई थी?
नेपाल के विदेश मंत्री शिशिर खनाल ने संसद को बताया कि बुधवार सुबह करीब 8:37 बजे तिब्बत क्षेत्र में भूकंप की सूचना मिली थी। इसके लगभग तीन मिनट बाद बाढ़ की खबर सामने आई। इसी वजह से शुरुआती तौर पर आशंका जताई गई कि भूकंप के झटकों से ग्लेशियल लेक आउटबर्स्ट फ्लड यानी हिमनद झील फटने की घटना हुई होगी।
हालांकि, बाद में सामने आए वैज्ञानिक विश्लेषण ने इस घटना की वजह को लेकर तस्वीर बदल दी है। अब ग्लेशियर के ढहने और उसके कारण हुए मलबे के बहाव को अचानक आई बाढ़ की प्रमुख वजह माना जा रहा है।
भारी तबाही, बड़ी संख्या में लोग लापता
तिब्बत से शुरू हुई अचानक आई बाढ़ ने नेपाल के रसुवा और धाडिंग जिलों में भारी तबाही मचाई। बड़ी संख्या में लोगों की मौत हुई, जबकि सैकड़ों लोग अब भी लापता बताए जा रहे हैं। इनमें भारतीय नागरिक भी शामिल हैं।
नेपाल के विदेश मंत्री ने बताया कि लापता लोगों में करीब 300 भारतीय नागरिक शामिल हो सकते हैं। आपदा के बाद कई परिवारों के घर तबाह हो गए हैं और राहत एवं बचाव दल प्रभावित क्षेत्रों में लापता लोगों की तलाश में जुटे हैं।
भारतीय दूतावास ने जारी किए हेल्पलाइन नंबर
बाढ़ से प्रभावित भारतीय नागरिकों की सहायता के लिए काठमांडू स्थित भारतीय दूतावास ने आपातकालीन हेल्पलाइन नंबर जारी किए हैं। प्रभावित लोग सहायता और जानकारी के लिए +977 985 131 6807 और +977 970 910 7500 पर संपर्क कर सकते हैं।
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