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दीदी को मिला अखिलेश का साथ

गौरतलब है कि 2024 के लोकसभा चुनाव से पूर्व इंडिया गठबंधन के गठन में बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के साथ-साथ पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने अहम भूमिका निभाई थी। कहा जाता है कि कांग्रेस और खासतौर से राहुल गांधी की अपनी मनमानी राजनीति के कारण न सिर्फ ममता बनर्जी ने बल्कि बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने इंडिया गठबंधन को अलविदा कह दिया था। पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी भले ही कांग्रेस के नेतृत्व वाले इंडिया गठबंधन का अब हिस्सा न हों। लेकिन यहां मैं नफीस जाफरी आपको यह
बता दूं कि इसके बाद भी पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के रिश्ते इंडिया गठबंधन में शामिल समाजवादी पार्टी के मुखिया अखिलेश यादव से बहुत अच्छे और काफी पुराने हैं। और इसी क्रम में समाजवादी पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव ने बीते दिनों कोलकाता में नबन्ना स्टेट सेक्रेटेरिएट में पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी से मुलाकात की। इस दौरान अखिलेश यादव ने भाजपा पर तीखा हमला बोला। अखिलेश ने कहा कि देश में भाजपा की “राजनीतिक आक्रामकता” का मुकाबला करने की क्षमता केवल ममता बनर्जी में ही है। राज्य सचिवालय ‘नबान्न’ में हुई इस अहम मुलाकात को विपक्षी एकजुटता और आने वालेराजनीतिक घटनाक्रमों के लिहाज से काफी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। दोनों के बीच करीब 40 मिनट तक चली इस बैठक में अखिलेश यादव के साथ उनकी पत्नी और लोकसभा सांसद डिंपल यादव भी मौजूद रहीं। बैठक के बाद पत्रकारों से बातचीत में अखिलेश यादव ने कहा कि लोकतंत्र को बचाने की लड़ाई में समाजवादी पार्टी, तृणमूल कांग्रेस प्रमुख ममता बनर्जी के साथ पूरी मजबूती से खड़ी है। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा, “देश में भाजपा के हमलों का जवाब देने का साहस और क्षमता सिर्फ ‘दीदी’ में है।” इस दौरान अखिलेश यादव ने पश्चिम बंगाल में चल रही स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन यानी\ एसआईआर की प्रक्रिया पर भी गंभीर सवाल उठाए। उन्होंने आरोप लगाया कि एसआईआर की आड़ में एनआरसी लागू करने की कोशिश की जा रही है और इसके जरिए आम लोगों को परेशान या जा रहा है। उनके मुताबिक, यह प्रक्रिया लोकतांत्रिक मूल्यों के खिलाफ है और इससे जनता में डर का माहौल बनाया जा रहा है। अखिलेश की ममता से मुलाकात ऐसे समय हुई है जब मुख्यमंत्री ममता बनर्जी और उनकी पार्टी तृणमूल कांग्रेस चुनाव आयोग के खिलाफ आंदोलन को तेज करने की तैयारी में हैं। जहां तक पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी का सवाल है तो मुख्यमंत्री ममता बनर्जी पहले ही एसआईआर को “बड़ा घोटाला” करार दे चुकी हैं और चुनाव आयोग को कई पत्र लिखकर इस
प्रक्रिया को तत्काल रोकने की मांग कर चुकी हैं। उन्होंने आरोप लगाया है कि एसआईआर की वजह से बूथ लेवल एजेंटों और अन्य कर्मचारियों पर अत्यधिक दबाव पड़ा है, जिससे गंभीर परिणाम सामने आए हैं। मुख्यमंत्री ममता बनर्जी जल्द ही इस मुद्दे को राष्ट्रीय स्तर पर ले जाने की तैयारी कर रही हैं और आने वाले दिनों में दिल्ली में चुनाव आयोग के कार्यालय के सामने धरना-प्रदर्शन का नेतृत्व कर सकती हैं। अखिलेश यादव की यह खुली समर्थन-घोषणा विपक्षी राजनीति में नए समीकरणों की ओर इशारा कर रही है, खासकर तब जब आगामी चुनावों से पहले विपक्ष भाजपा के खिलाफ साझा रणनीति बनाने में जुटा है। तो वहीं इधर अखिलेश यादव के पश्चिम बंगाल जाने को लेकर उत्तर प्रदेश सरकार में मंत्री ओ.पीराजभर उन पर चुटकी ली. राजभर ने कहा कि अखिलेश यादव वहां भाजपा को जिताने के लिए जा रहे हैं। मध्य प्रदेश गए, वहां भाजपा की सरकार बनाकर आए। दिल्ली गए वहां भाजपा की सरकार बनाकर आए। मुंबई गए, वहां भाजपा की सरकार बनाकर आए। उन्होंने कहा कि अखिलेश भाजपा के लिए काम करते हैं। हाथी के दांत खाने के और, दिखाने के और…। बहरहाल योगी सरकार
के कैबिनेट मंत्री ओपी राजभर ने भले ही सपा प्रमुख अखिलेश यादव पर अपने ही अंदाज में कटाक्ष किया हो लेकिन यह बात उन्हें याद दिलाने की जरूरत है कि पश्चिम बंगाल का विधाानसभा चुनाव लड़ने की अखिलेश यादव की कोइ्र योजना नहीं है। वे इससे पहले 2021 का भी बंगाल का विधानसभा चुनाव नहीं लड़ते थे। यहां तक कि उन्होंने बिहार के विधानसभा चुनाव में भी अपनी पार्टी को चुनाव नहीं लड़वाया था। यह बात अलग है कि बिहार के विधानसभा चुनावों में सपा मुखिया अखिलेश यादव के साथ-साथ पार्टी के दूसरे अन्य नेताओं ने इंडिया गठबंधन के प्रत्याशियों के पक्ष मंे चुनाव प्रचार जरूर किया था।

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