गुजरात में गैस संकट गहराया: प्रवासी मजदूरों की घर वापसी शुरू, हालात बने चिंता का कारण
NW-Editor
March 20, 2026
देश
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मिडिल ईस्ट में चल रहे युद्ध का असर अब भारत पर भी दिखाई देने लगा है। खासकर गुजरात में गैस की कमी के कारण छोटे होटल, ढाबे और स्ट्रीट फूड की दुकानें बंद होने लगी हैं। इससे दुकान के मालिक बेरोजगार हो रहे हैं। इस स्थिति ने यूपी और बिहार के मजदूरों व छात्रों को मजबूर कर दिया है कि वे घर लौटें। सूरत रेलवे स्टेशन पर इस समय लंबी कतारें देखने को मिल रही हैं। गैस के छोटे सिलेंडर की कीमत अब 5000 रुपये तक पहुंच गई है, जिससे लोग फ्लैट में चूल्हा नहीं जला पा रहे हैं।
गैस की कीमतों में उछाल
सूरत के रेलवे स्टेशन पर मौजूद लोगों से बात करने पर पता चला कि छोटे सिलेंडर के लिए गैस की कीमत आम दिनों में 100 रुपये किलो थी, जो अब 300 से 400 रुपये किलो बिक रही है। बड़े सिलेंडर की कीमत skyrocketed हो चुकी है और लोगों के लिए इसे खरीदना मुश्किल हो गया है। अधिकतर प्रवासी मजदूरों के पास गैस कनेक्शन नहीं है, और अब वे भूखों मरने की नौबत में हैं।
परिवारों की आपसी मदद, लेकिन कब तक?
बिहार से आया एक प्रवासी मजदूर प्रवीण ने बताया कि गैस की कमी से खाने में बहुत समस्या आ रही है। आसपास के लोग कभी-कभी मदद कर देते हैं, लेकिन यह लंबी अवधि तक नहीं चल सकता। इसलिए, वह गांव लौट रहा है जहां वह काम की तलाश करेगा। काम देने वाले मालिक भी गैस का इंतजाम नहीं कर पा रहे हैं।
कामकाज ठप होने लगा
बिहार लौट रहीं नूतनबेन ने अपनी चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि गैस की कमी के कारण उनके बच्चों के लिए खाना बना पाना बहुत मुश्किल हो रहा है। पिछले कुछ दिनों से लगातार परेशानी आ रही है। पड़ोसियों के घर जाकर खाना तैयार करना भी अब संभव नहीं हो पा रहा है, क्योंकि वहां भी गैस खत्म हो चुकी है।
अन्य राज्यों में भी गैस संकट
गैस संकट की समस्या सिर्फ गुजरात में ही नहीं, बल्कि अन्य राज्यों में भी देखने को मिल रही है। हिमाचल प्रदेश में LPG सिलेंडर की ऑनलाइन बुकिंग ठप हो गई है। यहां के होटल, ढाबे और रेस्टोरेंट संचालक भी गैस की भारी किल्लत से परेशान हैं। ऐसे में आम जनता को भी चूहे में बुकिंग के लिए एजेेंसी तक जाना पड़ रहा है।
भविष्य का कोई समाधान नजर नहीं
इस संकट के बीच लोगों की उम्मीद कम होती जा रही है। ऐसे में क्या सरकार इस समस्या का समाधान कर पाएगी या जनता को इसी तरह की परेशानियों का सामना करना पड़ेगा, यह देखने वाली बात होगी। वर्तमान में यह गैस की किल्लत केवल एक आर्थिक समस्या नहीं, बल्कि जीवनयापन का सवाल बन चुका है।