आज की संसदीय राजनीति जिस दौर से गुजर रही है। उसने लोकतंत्र समर्थकों के लिए चिंता पैदा कर दी है। देखने को मिल रहा है कि सत्तापक्ष और विपक्ष के बीच बढ़ती कटुता और किसी भी मुद्दे पर एक राय न होना संसदीय राजनीति के लिए मुश्किल होता जा रहा है। मैं नफीस जाफरी आपको यह बात दूं कि वहीं इन सबके बीच कुछ ऐसे भी प्रसंग देखने को मिलते है जो कहीं न कहीं संसदीय राजनीति के लिए शुभ संकेत है। जिसकी एक बानगी पिछले दिनों जम्मू-कश्मीर विधानसभा के बजट सत्र के दौरान देखने को मिली। यहां हम जिक्र कर रहे हैं जब नगरोटा की भाजपा विधायक देवयाणी राणा की। मालूम हो कि वो पहली बार विधायक बनी हैं। लेकिन जम्मू-कश्मीर विधानसभा में उनका पहला ही भाषण
ऐसा जोरदार था कि सत्ता पक्ष के विधायक भी मेज थपथपाते नजर आए। आम तौर पर ऐसा विरले ही होता है कि जब कोई विपक्षी सदस्य सदन में सरकार को कोसे, उसकी आलोचना करें, लेकिन सत्ता पक्ष के विधायक उनका हौसला बढ़ाते नजर आए। जब भाजपा विधायक देवयाणी राणा ने बजट पर सरकार को घेरना शुरू किया तो उन्होंने आंकड़ों के साथ इस तरीके से सवाल उठाए कि सत्ता पक्ष के लोग भी उनकी प्रशंसा करते आए। जैसा कि उल्लेखनीय है कि जम्मू और कश्मीर विधानसभा में देवयाणी राणा का यह पहला भाषण था, जब देवयानी केंद्र शासित प्रदेश के बजट पर बोलने के लिए खड़ी हुईं तो सत्ताधारी नेशनल कॉन्फ्रेंस के सदस्य अपनी मेजें थपथपाते नजर आए, उनके भाषण के समापन पर भी उन्होंने ऐसा ही किया, जबकि उन्होंने मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला द्वारा प्रस्तुत बजट की आलोचना की। देवयाणी राणा के भाषण से शुरू करने से पहले विधानसभा अध्यक्ष अध्यक्ष अब्दुल रहीम राथर ने सदस्यों से उनका हौसला बढ़ाने का अनुरोध किया। मालूम हो कि देवयाणी राणा अपने पिता दविंदर सिंह राणा के निधन के बाद हाल ही में हुए विधानसभा उपचुनाव में नगरोटा विधानसभा क्षेत्र से जीत हासिल कर सदन पहुंची हैं। उनके पिता दविंदर सिंह राणा जम्मू से नेशनल कॉफ्रेंस के कद्दावर नेता थे, उनकी गिनती उमर अब्दुल्ला के करीबी नेताओं में होती थी। लेकिन कुछ साल पहले वह भाजपा में शामिल हो गए। फिर अक्टूबर 2024 में विधानसभा चुनाव के तुरंत बाद उनका निधन हो गया। जिसके बाद नगरोटा में हुए उपचुनाव में भाजपा ने देवयाणी को उतारा था, देवयाणी चुनाव जीतने के बाद अब अपने पिता की राजनैतिक विरासत को आगे बढ़ा रही हैं। मालूम हो कि बीते दिनों मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने जम्मू और कश्मीर विधानसभा में 1.13 लाख करोड़ रुपए का बजट पेश किया। इस बजट पर जब चर्चा हुई और देवयाणी के बोलने का समय आया तो पूरे सदन ने उनके 12 मिनट के भाषण को पूरी खामोशी से सुना। जबकि इस दौरान देवयानी राणा बजट की कड़ी आलोचना कर रही थी। उन्होंने आंकड़ों के साथ शिक्षा, आपदा प्रबंधन और अन्य महत्वपूर्ण क्षेत्रों
में बजट के आवंटन में कटौती के लिए सरकार पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा, यह कटौती ऐसे वर्ष में हुई है जब अभूतपूर्व और लगातार बारिश ने ग्रामीण क्षेत्रों, विशेष रूप से नगरोटा निर्वाचन क्षेत्र को तबाह कर दिया है। उल्लेखनीय हो कि पिछले साल अगस्त और सितंबर में जम्मू और कश्मीर में भूस्खलन और अचानक आई बाढ़ में दर्जनों लोगों की जान चली गई और सैकड़ों परिवार बेघर हो गए थे। किश्तवार में वैष्णो देवी तीर्थयात्रा और माछैल यात्रा भूस्खलन की चपेट में आ गई, जिसमें 100 से अधिक श्रद्धालुओं की मौत हो गई थी। राणा ने आपदा प्रबंधन और राहत कार्यों के लिए धनराशि बढ़ाने की भी मांग की। उन्होंने शिक्षा समेत अन्य महत्वपूर्ण क्षेत्रों में धनराशि कम करने के लिए सरकार की आलोचना की। उन्होंने पूछा, “शिक्षा पर अगर हम पिछले बजट से 193 करोड़ रुपये कम खर्च करते हैं, तो स्कूल बंद हो जाएंगे या उनका विलय हो जाएगा. ऐसे में गरीब बच्चे की पढ़ाई कैसे आगे बढ़ेगी?” युवा विधायक ने कल्याणकारी योजनाओं पर
सरकार की नीतियों में खामियों की भी आलोचना की। उदाहरण के लिए, उन्होंने बताया कि दिव्यांगजनों के लिए मुत बस सेवा में दिव्यांग-अनुकूल सुविधाओं वाली बसें नहीं हैं। बजट की तीखी समीक्षा और उमर अब्दुल्ला सरकार की आलोचना के बावजूद राणा ने जम्मू-कश्मीर विधानसभा में दोनों पक्षों की तालियों और प्रशंसा के साथ अपना भाषण समाप्त किया।

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