मध्य-पूर्व में एक बार फिर हालात विस्फोटक हो गए हैं। Benjamin Netanyahu की अगुवाई में इज़राइल द्वारा लेबनान पर किए गए ताज़ा हमलों ने मानवीय संकट को और गहरा कर दिया है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, इन हमलों में बड़ी संख्या में आम नागरिकों के हताहत होने की खबरें सामने आ रही हैं। Israel Defense Forces (IDF) ने दावा किया है कि यह कार्रवाई Hezbollah के ठिकानों को निशाना बनाकर की गई। लेकिन ज़मीनी तस्वीर इससे कहीं ज्यादा भयावह बताई जा रही है—जहां रिहायशी इलाकों में भी भारी तबाही के निशान देखे जा रहे हैं।
सूत्रों के अनुसार, महज कुछ मिनटों के भीतर दर्जनों लड़ाकू विमानों ने कई बम गिराए, जिससे Beirut समेत कई इलाकों में इमारतें मलबे में तब्दील हो गईं। स्थानीय लोगों का कहना है कि हमलों की चपेट में मासूम नागरिक आए, जिनमें महिलाएं और बच्चे भी शामिल हैं। International Committee of the Red Cross और अन्य राहत एजेंसियों के अनुसार, हालात बेहद गंभीर हैं—अस्पतालों में जगह कम पड़ रही है, एंबुलेंस को रास्ता नहीं मिल पा रहा और कई लोग अब भी मलबे के नीचे दबे होने की आशंका है।
प्रत्यक्षदर्शियों का कहना है कि यह सिर्फ सैन्य कार्रवाई नहीं, बल्कि आम लोगों की जिंदगी पर सीधा असर डालने वाला हमला है। लगातार हो रहे धमाकों से लोग दहशत में हैं और सुरक्षित स्थानों की तलाश में भटक रहे हैं। इससे पहले ईरान ने चेतावनी दी थी कि लेबनान पर हमले क्षेत्रीय संघर्ष को और भड़का सकते हैं। इसके बावजूद इज़राइल की कार्रवाई जारी रहने से पूरे इलाके में तनाव तेजी से बढ़ रहा है। इसी बीच खाड़ी देशों—Saudi Arabia, United Arab Emirates, Kuwait और Bahrain—में तेल प्रतिष्ठानों पर हमलों की खबरों ने हालात को और जटिल बना दिया है, हालांकि इन घटनाओं की पुष्टि अभी स्पष्ट नहीं है।
वहीं Donald Trump ने ईरान को समर्थन देने वाले देशों को चेतावनी दी है, जिससे अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी बयानबाजी तेज हो गई है। फिलहाल लेबनान में हालात बेहद नाजुक हैं। मलबे में दबे लोगों को निकालने की कोशिशें जारी हैं और मौतों का आंकड़ा बढ़ने की आशंका जताई जा रही है। सबसे बड़ा सवाल यही है—क्या यह संघर्ष यहीं थमेगा या एक बड़े युद्ध की आहट है?
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