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फीस को लेकर स्कूलों की मनमानी जारी, अभिभावकों में रोष

– रोक के बाद वसूले जा रहे प्रवेश शुक्ल तो कहीं त्रैमासिक फीस का दबाव
फतेहपुर। अप्रैल माह अभिभावकों पर भारी पड़ रहा है। नई कक्षा में जाने को लेकर बच्चो में उत्साह है तो एडमिशन को लेकर अभिभावकों के माथे पर पसीना है। स्कूलों के निर्धारित दुकानों से कॉपी किताबे खरीदने की बाध्यता पहले ही अभिभावकों की जेब पर भारी है। ऐसे में कुछ विद्यालयों की ओर से त्रैमासिक फीस जमा करने का दबाव बनाया जा रहा है। जो कि अभिभावकों की जेब पर भारी संकट पैदा कर रहा है। हर अभिभावक अपने बच्चो को अच्छी से अच्छी शिक्षा दिलाना चाहता है इसके लिये अपने समर्थ के अनुसार विद्यालयों का चुनाव करता है। निजी विद्यालयों में बढ़ती प्रतिस्पर्धा कहीं न कहीं अभिभावकों की जेब बोझ बन रही है। निजी विद्यालयों के कैम्पस में ही किताब कॉपी का सेंटर बन जाने पर अभिभावकों के भारी विरोध के बीच शासन के निर्देश पर जिला प्रशासन द्वारा स्कूल परिसर में कॉपी किताबे बेंचने पर रोक लगा दी गयी। विवाद औऱ बढ़ा तो यूपी बोर्ड व सीबीएसई की किताबों की सूची व दाम निर्धारित कर दिये गये जिसके बाद विद्यालयों के द्वारा अभिभावकों पर भारी भरकम प्रवेश शुल्क का बोझ डालना शुरू कर दिया गया। साथ ही नये सत्र से अभिभावकों को तीन माह की फीस एडवांस रूप से जमा करने को बाध्य किया जा रहा है। जिसमे ट्यूशन फीस के अलावा ट्रांसपोर्ट फीस भी शामिल है जबकि अभिभावकों के अनुसार अभी तक विद्यालयो में प्रति माह फीस लेने का ही प्रावधान रहा है। विद्यालयों की ओर डिस्काउंट देकर ही तीन माह या पूरे सत्र की फीस जमा करवाया जाता था। जोकि अनिवार्य नहीं था। जबकि बाकी के लोग हर माह फीस जमा कर सकते थे परंतु इस बार कई निजी विद्यालयों की ओर से अभिभवकों पर तीन माह का शुल्क जमा करने का दबाव बनाया जा रहा है। जबकि मध्यम वर्गीय परिवार के लिए त्रैमासिक फीस देना संभव ही नहीं है। अभिभावक इस मामले में भी जिला प्रशासन से हस्तक्षेप की मांग कर रहे हैं।

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