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ईवी खरीदना हो सकता है और आसान, प्राथमिकता क्षेत्र में शामिल हो सकता है इलेक्ट्रिक वाहन लोन

नई दिल्ली। देश में इलेक्ट्रिक वाहनों (ईवी) की बढ़ती मांग के बीच केंद्र सरकार और नियामक संस्थाएं ईवी लोन को और अधिक सुलभ बनाने की दिशा में कदम बढ़ा रही हैं। सूत्रों के अनुसार इलेक्ट्रिक वाहनों के लिए दिए जाने वाले ऋण को प्राथमिकता क्षेत्र (प्रायोरिटी सेक्टर लेंडिंग) में शामिल करने पर गंभीरता से विचार किया जा रहा है। यदि ऐसा होता है तो ईवी खरीदने के इच्छुक लोगों को कम ब्याज दर पर आसानी से ऋण उपलब्ध हो सकेगा, जिससे देश में इलेक्ट्रिक वाहनों को अपनाने की रफ्तार और तेज होने की उम्मीद है।

गौरतलब है कि कुछ वर्ष पहले नीति आयोग ने भी इलेक्ट्रिक वाहन ऋण को प्राथमिकता क्षेत्र के कर्ज में शामिल करने की सिफारिश की थी। हालांकि अब तक इस पर कोई अंतिम निर्णय नहीं लिया गया है। इसके बावजूद ईवी उद्योग से जुड़े संगठनों और वाहन निर्माताओं की ओर से लगातार इस मांग को उठाया जाता रहा है कि इलेक्ट्रिक वाहनों के लिए वित्तीय सहायता को और आसान बनाया जाए।

सूत्रों का कहना है कि इस प्रस्ताव पर नियामक स्तर पर गंभीर मंथन चल रहा है। यदि ईवी लोन को प्राथमिकता क्षेत्र में शामिल किया जाता है तो बैंकों और वित्तीय संस्थानों को इस क्षेत्र में अधिक ऋण उपलब्ध कराने के लिए प्रोत्साहन मिलेगा। इससे ग्राहकों के लिए ऋण प्रक्रिया सरल होगी और कम ब्याज दर पर अधिक लोगों को इलेक्ट्रिक वाहन खरीदने का अवसर मिलेगा।

वर्तमान में कई बैंक और वित्तीय संस्थान इलेक्ट्रिक कारों के लिए पेट्रोल और डीजल वाहनों की तुलना में अपेक्षाकृत कम ब्याज दर पर ऋण उपलब्ध करा रहे हैं। सरकार भी स्वच्छ ऊर्जा और हरित परिवहन को बढ़ावा देने के उद्देश्य से विभिन्न स्तरों पर इलेक्ट्रिक मोबिलिटी को प्रोत्साहित कर रही है। ऐसे में ईवी लोन को प्राथमिकता क्षेत्र में शामिल करने का निर्णय इस दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

विशेषज्ञों का मानना है कि यदि यह प्रस्ताव लागू होता है तो न केवल इलेक्ट्रिक कारों बल्कि इलेक्ट्रिक दोपहिया, तिपहिया और व्यावसायिक वाहनों की बिक्री को भी गति मिलेगी। इससे प्रदूषण कम करने, जीवाश्म ईंधन पर निर्भरता घटाने और कार्बन उत्सर्जन में कमी लाने के राष्ट्रीय लक्ष्य को भी मजबूती मिलेगी।

ईवी उद्योग लंबे समय से मांग कर रहा है कि इलेक्ट्रिक वाहनों की शुरुआती लागत कम करने और ग्राहकों को आकर्षित करने के लिए वित्तीय सुविधाओं का विस्तार किया जाए। आसान ऋण, कम ब्याज दर और लंबी अवधि की पुनर्भुगतान सुविधा मिलने से अधिक लोग पारंपरिक वाहनों की जगह इलेक्ट्रिक वाहनों को अपनाने के लिए प्रेरित होंगे।

सरकार ने पिछले कुछ वर्षों में इलेक्ट्रिक मोबिलिटी को बढ़ावा देने के लिए कई योजनाएं लागू की हैं। चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर का विस्तार, बैटरी निर्माण को प्रोत्साहन और विभिन्न प्रोत्साहन योजनाओं के साथ अब यदि ईवी लोन को प्राथमिकता क्षेत्र में शामिल किया जाता है तो यह देश में इलेक्ट्रिक वाहन क्रांति को नई गति देने वाला महत्वपूर्ण निर्णय साबित हो सकता है। फिलहाल इस संबंध में अंतिम फैसला आना बाकी है, लेकिन उद्योग जगत को जल्द सकारात्मक घोषणा की उम्मीद है।

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