कोलकाता। पश्चिम बंगाल के पूर्व मेदिनीपुर जिले से एक चिंताजनक खबर सामने आई है। शंकरपुर मछली बंदरगाह से गहरे समुद्र में मछली पकड़ने के लिए निकला ‘मां काली’ नामक ट्रॉलर 15 मछुआरों समेत लापता हो गया है। ट्रॉलर से कई घंटों से कोई संपर्क नहीं हो सका है, जिससे मछुआरों के परिजनों में भारी चिंता और दहशत का माहौल है। प्रशासन और तटरक्षक एजेंसियों ने ट्रॉलर की तलाश के लिए व्यापक खोज अभियान शुरू कर दिया है।
जानकारी के अनुसार, ‘मां काली’ ट्रॉलर नियमित रूप से मछली पकड़ने के लिए समुद्र में गया था। ट्रॉलर पर कुल 15 मछुआरे सवार थे। निर्धारित समय पर ट्रॉलर का संपर्क टूट जाने और उसके वापस नहीं लौटने पर साथी मछुआरों और परिजनों ने इसकी सूचना स्थानीय प्रशासन को दी। इसके बाद संबंधित विभागों को अलर्ट जारी कर खोज अभियान शुरू किया गया।
प्रारंभिक जानकारी के मुताबिक, ट्रॉलर से आखिरी बार संपर्क गहरे समुद्री क्षेत्र में हुआ था। उसके बाद वायरलेस और अन्य संचार माध्यमों से संपर्क स्थापित नहीं हो सका। इससे आशंका जताई जा रही है कि ट्रॉलर किसी तकनीकी खराबी, खराब मौसम या समुद्री दुर्घटना का शिकार हो सकता है। हालांकि, अधिकारियों ने अभी तक किसी भी संभावना की आधिकारिक पुष्टि नहीं की है।
घटना की सूचना मिलते ही स्थानीय मत्स्य विभाग, समुद्री पुलिस और भारतीय तटरक्षक बल सक्रिय हो गए। समुद्र में संभावित क्षेत्रों में खोज अभियान चलाया जा रहा है। आसपास मौजूद अन्य मछली पकड़ने वाले ट्रॉलरों को भी लापता ट्रॉलर की तलाश में सहयोग करने के निर्देश दिए गए हैं।
शंकरपुर मछली बंदरगाह पर लापता मछुआरों के परिजनों की भीड़ जुटी हुई है। परिवार के लोग अपने प्रियजनों के सुरक्षित लौटने की दुआ कर रहे हैं। कई परिजनों का कहना है कि संपर्क टूटने के बाद से उन्हें कोई सूचना नहीं मिली है, जिससे उनकी चिंता लगातार बढ़ती जा रही है।
स्थानीय प्रशासन ने लोगों से अफवाहों पर ध्यान न देने की अपील की है। अधिकारियों का कहना है कि खोज अभियान लगातार जारी है और जैसे ही कोई ठोस जानकारी मिलेगी, उसे सार्वजनिक किया जाएगा। प्रशासन ने भरोसा दिलाया है कि सभी संबंधित एजेंसियां समन्वय के साथ काम कर रही हैं ताकि ट्रॉलर और उस पर सवार मछुआरों का जल्द से जल्द पता लगाया जा सके।
गौरतलब है कि बंगाल की खाड़ी में मछली पकड़ने वाले ट्रॉलर अक्सर लंबी दूरी तक समुद्र में जाते हैं। मौसम में अचानक बदलाव, ऊंची लहरें, तकनीकी खराबी या संचार व्यवस्था बाधित होने जैसी परिस्थितियों के कारण कई बार ऐसे हादसे सामने आते रहे हैं। यही वजह है कि इस घटना को लेकर प्रशासन पूरी गंभीरता से कार्रवाई कर रहा है।
फिलहाल ‘मां काली’ ट्रॉलर और उस पर सवार सभी 15 मछुआरों का कोई पता नहीं चल सका है। खोज एवं बचाव अभियान युद्धस्तर पर जारी है। पूरे क्षेत्र की निगाहें अब राहत एवं बचाव दलों की कार्रवाई पर टिकी हैं और सभी सुरक्षित वापसी की उम्मीद कर रहे हैं।
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