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छात्राओं की सुरक्षा पर सख्त हुआ महिला आयोग, स्कूल-कॉलेज और कोचिंग संस्थानों के लिए जारी किए नए निर्देश

लखनऊ। उत्तर प्रदेश में छात्राओं की सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए राज्य महिला आयोग ने स्कूलों, कॉलेजों और कोचिंग संस्थानों के भीतर तथा उनके आसपास सुरक्षा व्यवस्था को और अधिक मजबूत बनाने के निर्देश जारी किए हैं। उत्तर प्रदेश राज्य महिला आयोग की अध्यक्ष बबीता सिंह चौहान ने सभी जिला प्रशासन, पुलिस अधिकारियों, शिक्षा विभाग और संबंधित संस्थानों को छात्राओं के लिए सुरक्षित एवं भयमुक्त वातावरण सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं। आयोग का कहना है कि छात्राओं की सुरक्षा से किसी भी प्रकार का समझौता स्वीकार नहीं किया जाएगा और सभी संस्थानों को निर्धारित सुरक्षा मानकों का कड़ाई से पालन करना होगा।

महिला आयोग की अध्यक्ष ने कहा कि प्रदेश में बड़ी संख्या में छात्राएं प्रतिदिन स्कूल, कॉलेज और कोचिंग संस्थानों में शिक्षा प्राप्त करने जाती हैं। ऐसे में उनकी सुरक्षा सुनिश्चित करना प्रशासन, शिक्षण संस्थानों और समाज सभी की सामूहिक जिम्मेदारी है। उन्होंने कहा कि परिसर के भीतर ही नहीं बल्कि संस्थानों के आसपास भी पर्याप्त सुरक्षा व्यवस्था होना आवश्यक है ताकि छात्राएं बिना किसी भय के शिक्षा ग्रहण कर सकें।

आयोग ने निर्देश दिए हैं कि सभी शिक्षण संस्थानों के मुख्य प्रवेश एवं निकास द्वारों पर पर्याप्त निगरानी व्यवस्था हो। जहां आवश्यकता हो वहां सीसीटीवी कैमरे लगाए जाएं और उनकी नियमित मॉनिटरिंग की जाए। परिसर में आने-जाने वाले बाहरी व्यक्तियों का रिकॉर्ड रखा जाए तथा बिना अनुमति किसी भी संदिग्ध व्यक्ति को प्रवेश न दिया जाए। सुरक्षा गार्डों की पर्याप्त तैनाती सुनिश्चित करने के साथ-साथ छात्राओं की शिकायतों पर तत्काल कार्रवाई की व्यवस्था भी विकसित की जाए।

महिला आयोग ने जिला प्रशासन और पुलिस विभाग से शिक्षण संस्थानों के आसपास नियमित गश्त बढ़ाने के निर्देश दिए हैं। विशेष रूप से स्कूल और कॉलेज खुलने तथा छुट्टी के समय पुलिस की सक्रिय मौजूदगी सुनिश्चित करने को कहा गया है। आयोग का मानना है कि नियमित पुलिस गश्त से छेड़छाड़, उत्पीड़न और अन्य आपराधिक गतिविधियों पर प्रभावी अंकुश लगाया जा सकेगा।

बबीता सिंह चौहान ने कहा कि छात्राओं के साथ किसी भी प्रकार की अभद्रता, छेड़छाड़, पीछा करने या उत्पीड़न की घटनाओं पर तत्काल और कठोर कार्रवाई की जाए। यदि किसी शिक्षण संस्थान या उसके आसपास ऐसी घटनाएं सामने आती हैं तो संबंधित पुलिस अधिकारी बिना देरी के प्राथमिकी दर्ज कर कानूनी कार्रवाई सुनिश्चित करें। उन्होंने कहा कि महिला सुरक्षा के मामलों में किसी प्रकार की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।

आयोग ने शिक्षण संस्थानों के प्रबंधन से भी सुरक्षा व्यवस्था की नियमित समीक्षा करने को कहा है। छात्राओं के लिए शिकायत पेटिका, हेल्पलाइन नंबर, महिला शिकायत प्रकोष्ठ और आवश्यक परामर्श व्यवस्था उपलब्ध कराने के निर्देश दिए गए हैं। इसके अलावा छात्राओं को महिला सुरक्षा कानूनों, हेल्पलाइन सेवाओं और आत्मरक्षा संबंधी जानकारी देने के लिए समय-समय पर जागरूकता कार्यक्रम आयोजित करने पर भी जोर दिया गया है।

राज्य महिला आयोग ने यह भी निर्देश दिए हैं कि सभी शिक्षण संस्थानों में आंतरिक शिकायत समिति (Internal Complaints Committee) सक्रिय रूप से कार्य करे और छात्राओं की शिकायतों का गोपनीयता के साथ समयबद्ध निस्तारण सुनिश्चित किया जाए। आयोग का मानना है कि यदि छात्राओं को शिकायत दर्ज कराने का सुरक्षित और विश्वसनीय मंच मिलेगा तो वे बिना डर अपनी समस्याएं सामने रख सकेंगी।

महिला आयोग की अध्यक्ष ने कहा कि राज्य सरकार महिलाओं और बालिकाओं की सुरक्षा के लिए पहले से कई महत्वपूर्ण योजनाएं संचालित कर रही है। मिशन शक्ति, महिला हेल्पलाइन 1090, आपातकालीन सेवा 112 और अन्य सुरक्षा तंत्र को और अधिक प्रभावी बनाते हुए छात्राओं को इन सेवाओं के प्रति जागरूक किया जाएगा। उन्होंने अभिभावकों से भी अपनी बेटियों को सुरक्षा संबंधी जागरूकता देने और किसी भी संदिग्ध गतिविधि की सूचना तत्काल पुलिस को देने की अपील की।

उन्होंने कहा कि शिक्षण संस्थानों के आसपास अवैध रूप से खड़े रहने वाले असामाजिक तत्वों, मनचलों और संदिग्ध व्यक्तियों पर विशेष निगरानी रखी जाए। स्थानीय पुलिस नियमित रूप से ऐसे स्थानों का निरीक्षण करे और आवश्यकता पड़ने पर सख्त कार्रवाई करे ताकि छात्राओं को सुरक्षित वातावरण मिल सके।

महिला आयोग ने जिलाधिकारियों, पुलिस अधीक्षकों और शिक्षा विभाग के अधिकारियों से समय-समय पर संयुक्त निरीक्षण करने तथा सुरक्षा व्यवस्थाओं की समीक्षा करने के भी निर्देश दिए हैं। आयोग ने स्पष्ट किया है कि यदि किसी संस्थान में सुरक्षा व्यवस्था में गंभीर लापरवाही पाई जाती है तो संबंधित अधिकारियों और प्रबंधन के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।

विशेषज्ञों का मानना है कि हाल के वर्षों में छात्राओं की सुरक्षा को लेकर बढ़ती संवेदनशीलता के बीच महिला आयोग की यह पहल महत्वपूर्ण साबित हो सकती है। शिक्षण संस्थानों में मजबूत सुरक्षा व्यवस्था, प्रभावी निगरानी, त्वरित शिकायत निस्तारण और पुलिस की सक्रिय मौजूदगी से छात्राओं का आत्मविश्वास बढ़ेगा तथा वे बिना किसी भय के अपनी शिक्षा जारी रख सकेंगी।

महिला आयोग ने सभी संबंधित विभागों से इन निर्देशों का कड़ाई से पालन सुनिश्चित करने को कहा है। आयोग का उद्देश्य प्रदेश की प्रत्येक छात्रा को सुरक्षित, सम्मानजनक और भयमुक्त शैक्षणिक वातावरण उपलब्ध कराना है, ताकि वह बिना किसी बाधा के अपने भविष्य का निर्माण कर सके।

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