नई दिल्ली। केंद्र सरकार ने देश की अंतरराष्ट्रीय सीमाओं की सुरक्षा को और अधिक मजबूत बनाने की दिशा में बड़ा कदम उठाया है। केंद्रीय गृह मंत्रालय ने गुरुवार को बताया कि सीमा क्षेत्रों की निगरानी और सुरक्षा व्यवस्था को अत्याधुनिक बनाने के लिए एक मजबूत चार-स्तरीय सुरक्षा ग्रिड तैयार किया जा रहा है। इस व्यवस्था में सीमा सुरक्षा बलों के साथ राज्य और जिला प्रशासन, अन्य केंद्रीय एजेंसियों तथा स्थानीय नागरिकों की सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित की जाएगी।
गृह मंत्रालय के अनुसार नई सुरक्षा प्रणाली का उद्देश्य सीमाओं पर निगरानी को अधिक प्रभावी बनाना, घुसपैठ, तस्करी और अन्य सीमा पार अपराधों पर अंकुश लगाना तथा विभिन्न एजेंसियों के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करना है। इसके तहत आधुनिक तकनीक, रियल टाइम सूचना साझा करने की व्यवस्था और स्थानीय स्तर पर त्वरित प्रतिक्रिया तंत्र को भी मजबूत किया जाएगा।
मंत्रालय ने कहा कि केंद्र सरकार का ‘स्मार्ट बॉर्डर विजन’ आने वाले वर्षों में भारत की सीमा सुरक्षा प्रणाली को दुनिया की सबसे आधुनिक और तकनीक आधारित सुरक्षा व्यवस्थाओं में शामिल करेगा। इस योजना के तहत आधुनिक निगरानी उपकरण, स्मार्ट सेंसर, उन्नत संचार प्रणाली, ड्रोन तकनीक और डिजिटल मॉनिटरिंग जैसे संसाधनों का व्यापक उपयोग किया जाएगा, जिससे सीमाओं की चौबीसों घंटे प्रभावी निगरानी संभव हो सकेगी।
गृह मंत्रालय ने स्पष्ट किया कि इस चार-स्तरीय सुरक्षा ग्रिड में सीमा की रक्षा करने वाले बल, राज्य सरकारों का प्रशासनिक तंत्र, जिला स्तर की एजेंसियां तथा सीमा क्षेत्र में रहने वाले स्थानीय नागरिकों की भूमिका महत्वपूर्ण होगी। स्थानीय लोगों से प्राप्त सूचनाओं और सुरक्षा एजेंसियों के बीच बेहतर तालमेल के जरिए किसी भी संदिग्ध गतिविधि पर तत्काल कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी।
मंत्रालय के अनुसार यह पहल केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के नेतृत्व में लागू की जा रही व्यापक राष्ट्रीय सुरक्षा रणनीति का हिस्सा है। सरकार का लक्ष्य सीमाओं को पूरी तरह सुरक्षित बनाते हुए देश की आंतरिक सुरक्षा को और अधिक सुदृढ़ करना है। इसके साथ ही जम्मू-कश्मीर सहित देशभर में आतंकवाद के खिलाफ ‘जीरो टॉलरेंस’ यानी शून्य सहनशीलता की नीति को प्रभावी ढंग से लागू किया जा रहा है।
गृह मंत्रालय ने यह भी कहा कि केंद्र सरकार नक्सलवाद के उन्मूलन के लिए भी लगातार बहुआयामी रणनीति पर काम कर रही है। सुरक्षा अभियानों के साथ-साथ विकास कार्यों और स्थानीय लोगों की भागीदारी को बढ़ावा देकर प्रभावित क्षेत्रों में स्थायी शांति स्थापित करने का प्रयास किया जा रहा है।
विशेषज्ञों का मानना है कि बदलती सुरक्षा चुनौतियों और आधुनिक तकनीकों के दौर में सीमा प्रबंधन को और अधिक स्मार्ट तथा तकनीक आधारित बनाना समय की आवश्यकता है। नई चार-स्तरीय सुरक्षा व्यवस्था लागू होने से सीमावर्ती क्षेत्रों में निगरानी क्षमता बढ़ेगी, सुरक्षा एजेंसियों के बीच बेहतर समन्वय स्थापित होगा और देश की सीमाओं को अधिक सुरक्षित बनाने में मदद मिलेगी। सरकार का विश्वास है कि स्मार्ट बॉर्डर विजन के सफल क्रियान्वयन से भारत की सीमा सुरक्षा व्यवस्था वैश्विक स्तर पर नई पहचान स्थापित करेगी।
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