नई दिल्ली। राजधानी दिल्ली में प्रत्येक भूखंड और भवन को एक विशिष्ट पहचान देने की दिशा में सरकार ने बड़ा कदम उठाया है। इसके तहत हर संपत्ति के लिए एक यूनिक प्रॉपर्टी कार्ड जारी किया जाएगा, जिसमें संबंधित संपत्ति की सभी महत्वपूर्ण जानकारियां डिजिटल रूप से दर्ज होंगी। इस पहल का उद्देश्य भूमि से जुड़े विवादों को कम करना, फर्जीवाड़े पर रोक लगाना और संपत्तियों का पारदर्शी रिकॉर्ड तैयार करना है।
सरकार ने इस योजना की घोषणा अप्रैल 2026 में की थी और अब इसे धरातल पर उतारने की प्रक्रिया तेज कर दी गई है। संबंधित विभाग कानूनी और तकनीकी तैयारियों को अंतिम रूप देने में जुटे हैं। अधिकारियों का कहना है कि आवश्यक कानूनी औपचारिकताएं पूरी होते ही योजना को चरणबद्ध तरीके से लागू किया जाएगा।
प्रस्तावित प्रॉपर्टी कार्ड में संपत्ति के मालिक का विवरण, खसरा और प्लॉट संख्या, क्षेत्रफल, भू-उपयोग, स्वामित्व का इतिहास, कर संबंधी जानकारी तथा अन्य आवश्यक अभिलेख एकीकृत रूप से उपलब्ध रहेंगे। इससे किसी भी संपत्ति की वास्तविक स्थिति और स्वामित्व की जानकारी एक ही प्लेटफॉर्म पर आसानी से प्राप्त की जा सकेगी।
सरकारी अधिकारियों का मानना है कि इस व्यवस्था के लागू होने से जमीन और मकान की खरीद-बिक्री अधिक सुरक्षित और पारदर्शी बनेगी। फर्जी दस्तावेजों के आधार पर संपत्ति बेचने या एक ही संपत्ति को कई लोगों के नाम पर बेचने जैसी धोखाधड़ी की घटनाओं पर प्रभावी अंकुश लगाया जा सकेगा। साथ ही अदालतों और राजस्व विभाग में लंबित भूमि विवादों के निस्तारण में भी सुविधा मिलेगी।
योजना के तहत विभिन्न विभागों के रिकॉर्ड को एकीकृत कर डिजिटल डेटाबेस तैयार किया जाएगा। इससे संपत्ति का पूरा विवरण ऑनलाइन उपलब्ध रहेगा और नागरिकों को बार-बार अलग-अलग कार्यालयों के चक्कर नहीं लगाने पड़ेंगे। प्रशासनिक कार्यों में भी तेजी आएगी तथा रिकॉर्ड अपडेट रखने में आसानी होगी।
विशेषज्ञों का मानना है कि यूनिक प्रॉपर्टी कार्ड प्रणाली लागू होने के बाद संपत्ति लेनदेन की प्रक्रिया अधिक विश्वसनीय बनेगी। बैंक ऋण, संपत्ति पंजीकरण, कर निर्धारण और उत्तराधिकार से जुड़े मामलों में भी इस डिजिटल व्यवस्था का लाभ मिलेगा। सरकार का उद्देश्य आधुनिक तकनीक के माध्यम से संपत्ति प्रबंधन को अधिक पारदर्शी, सुरक्षित और नागरिकों के लिए सुविधाजनक बनाना है।
फिलहाल संबंधित विभाग कानूनी प्रावधानों को अंतिम रूप देने और तकनीकी ढांचा तैयार करने में जुटे हैं। उम्मीद जताई जा रही है कि आवश्यक प्रक्रिया पूरी होने के बाद दिल्ली के सभी भूखंडों और भवनों को चरणबद्ध तरीके से यूनिक प्रॉपर्टी कार्ड जारी किए जाएंगे, जिससे राजधानी में भूमि प्रबंधन व्यवस्था को नई दिशा मिलेगी।
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