कर्नाटक के मंत्री प्रियांक खरगे पिछले कुछ समय से राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) पर हमलावर बने हुए हैं. उन्होंने कर्नाटक के सरकारी स्कूलों, कॉलेजों और सार्वजनिक संस्थानों में संघ की गतिविधियों पर रोक लगाने की वकालत की है. अब उनका दावा है कि इसी के बाद से उन्हें लगातार धमकियां मिल रही हैं. उन्होंने X पर एक वीडियो भी शेयर किया है. इसमें एक शख्स उन्हें आरएसएस को निशाना बनाने के लिए गाली दे रहा है.
उस कॉलर के वीडियो को शेयर करते हुए खरगे ने लिखा कि मैंने कहा कि आरएसएस युवाओं और बच्चों के दिमाग में गंदगी भरने का काम कर रहा है. ये उसका एक छोटा सा उदाहरण है. जो गंदगी भरी गई है वो कैसी दिखती है, ये इससे पता चलता है. मुझे जो धमकियों और गालियों वाली कॉल्स आ रही हैं, ये उसका एक नमूना है. क्या शाखाओं में माताओं-बहनों को गालियां देना और उन्हें सबसे घृणित तरीके से अपमानित करना हमारी संस्कृति है? क्या बीवाई विजयेंद्र, आर अशोक, सीटी रवि, सुनील कुमार, प्रताप सिम्हा, नारायणस्वामी जैसे भाजपा नेता मोदी और मोहन भागवत की माताओं को इस तरह से गालियां दिए जाने का समर्थन करते?
वो आगे कहते हैं कि जहां भाजपा नेताओं के बच्चे अपना उज्ज्वल भविष्य बना रहे हैं, वहीं गरीबों के बच्चों को इस तरह से गाली-गलौज और डराने-धमकाने के लिए इस्तेमाल किया जा रहा है. अगर मैं शिकायत दर्ज कराऊं तो इस व्यक्ति को नुकसान होगा, लेकिन उन लोगों को कोई नुकसान नहीं होगा जिन्होंने इसे ऐसी मानसिक स्थिति में धकेला है. हमारी लड़ाई व्यक्तियों के खिलाफ नहीं, बल्कि आरएसएस द्वारा फैलाई गई इस गंदी मानसिकता के खिलाफ है, उन दुष्ट ताकतों के खिलाफ है जो मासूमों का ब्रेनवॉश कर रही हैं और उनके विचारों को प्रदूषित कर रही हैं.
मैं मासूम बच्चों और युवाओं को ऐसी प्रदूषित व्यवस्था का शिकार होने से बचाने के लिए लड़ूंगा और कड़े कदम उठाऊंगा. अगर उन्हें लगता है कि मैं इन धमकियों से परेशान हो जाऊंगा, तो यह उनका भ्रम है. मेरी राजनीति केवल सत्ता-केंद्रित नहीं है, बल्कि वैचारिक और जन-केंद्रित है जो मासूम युवाओं को इस दुष्चक्र से बाहर निकालेगी.
सिद्धारमैया सरकार में इलेक्ट्रॉनिक्स, आईटी/बायोटेक्नोलॉजी और ग्रामीण विकास एवं पंचायत राज मंत्री खरगे राज्य भर के सरकारी संस्थानों और सार्वजनिक स्थानों में आरएसएस की सभी गतिविधियों पर प्रतिबंध लगाने को कहा है. इस संबंध में उन्होंने मुख्यमंत्री को पत्र लिखा है. उनका कहना है कि ऐसी गतिविधियां भारत की एकता और संविधान की भावना के विपरीत हैं.
इस पर मुख्यमंत्री सिद्धारमैया ने कहा कि तमिलनाडु में इस तरह की गतिविधियों पर रोक है. हम भी इसकी समीक्षा करेंगे. उन्होंने राज्य के मुख्य सचिव को तमिलनाडु सरकार के फैसले की समीक्षा करने को कहा है.
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