दशहरा पर्व के अवसर पर क्षत्रिय समाज की ओर से शस्त्र-पूजन कार्यक्रम आयोजित किया गया, जिसमें 20 राजघरानों के प्रतिनिधियों ने भाग लिया। कार्यक्रम में परंपरागत रीति-रिवाजों के साथ शस्त्रों की पूजा की गई और समाज की सांस्कृतिक विरासत, परंपराओं तथा एकता का संदेश दिया गया।
शस्त्र-पूजन में जुटे 20 राजघराने
कार्यक्रम में विभिन्न राजघरानों के सदस्यों ने हिस्सा लेकर शस्त्र-पूजन की परंपरा का निर्वहन किया। इस दौरान क्षत्रिय समाज की ऐतिहासिक परंपराओं, वीरता और सामाजिक एकजुटता पर जोर दिया गया। दशहरे के अवसर पर आयोजित इस कार्यक्रम में पारंपरिक रीति-रिवाजों के प्रति लोगों का उत्साह देखने को मिला।
रावण दहन के लिए खास तैयारियां
दशहरा उत्सव को आकर्षक बनाने के लिए रावण दहन की विशेष तैयारियां की गई हैं। आयोजन की खास बात यह है कि रावण का पुतला खुद चलकर दहन स्थल तक पहुंचेगा। इस अनूठे आयोजन को देखने के लिए लोगों में उत्सुकता रहने की उम्मीद है।
मोहल्लों में भी होगा रावण दहन
मुख्य आयोजन के साथ-साथ विभिन्न मोहल्लों में भी रावण दहन की तैयारी की गई है। यहां करीब चार फीट ऊंचे रावण के पुतले जलाए जाएंगे। छोटे पुतलों के माध्यम से स्थानीय स्तर पर दशहरा मनाया जाएगा और बच्चों सहित मोहल्ले के लोग उत्सव में भाग लेंगे।
दशहरा पर्व को बुराई पर अच्छाई की जीत का प्रतीक माना जाता है। इस अवसर पर आयोजित शस्त्र-पूजन और रावण दहन जैसे कार्यक्रम धार्मिक आस्था, सांस्कृतिक परंपराओं और सामाजिक सहभागिता को दर्शाते हैं।
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