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मोहन भागवत का बड़ा बयान: भारत को बांटने की कोशिशों पर जताई चिंता, एकता और सामाजिक समरसता पर दिया जोर

नागपुर, 20 अक्टूबर 2026। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के सरसंघचालक मोहन भागवत ने विजयादशमी उत्सव के अवसर पर देश की एकता, सामाजिक समरसता, सांस्कृतिक मूल्यों और विकास से जुड़े कई महत्वपूर्ण मुद्दों पर अपनी बात रखी। नागपुर स्थित संघ मुख्यालय में आयोजित कार्यक्रम में उन्होंने कहा कि भारत को कमजोर करने और समाज में विभाजन पैदा करने की कोशिशों के प्रति सतर्क रहने की जरूरत है। उनके मुताबिक, कुछ वैश्विक शक्तियां सत्ता परिवर्तन के जरिए अपने अनुकूल परिस्थितियां बनाने का प्रयास करती हैं।

कार्यक्रम की शुरुआत शस्त्र पूजन से हुई। इस दौरान संघ प्रमुख ने राष्ट्रीय एकता, आंदोलन की भूमिका, पर्यावरण संरक्षण, तकनीक के जिम्मेदार इस्तेमाल और नई पीढ़ी की जिम्मेदारियों पर भी विचार रखे।

भारत की एकता और सामाजिक समरसता जरूरी

मोहन भागवत ने कहा कि देश को मजबूत बनाए रखने के लिए समाज के सभी वर्गों को एकजुट रहना होगा। उन्होंने बांग्लादेश, फ्रांस, नेपाल और अल्बानिया जैसे देशों का उल्लेख करते हुए कहा कि दुनिया में ऐसी ताकतें सक्रिय हैं, जो सांस्कृतिक और मानवीय मूल्यों को प्रभावित करने की कोशिश कर रही हैं।

उन्होंने कहा कि भारत में भी समाज को बांटने वाली प्रवृत्तियों से सावधान रहने की आवश्यकता है। देश की एकता बनाए रखने के लिए आपसी विश्वास, संवाद और सामाजिक सद्भाव को मजबूत करना जरूरी है।

भागवत ने इतिहास का जिक्र करते हुए बंगाल विभाजन और वर्ष 1947 में हुए देश के विभाजन की घटनाओं से सबक लेने की बात कही। उन्होंने कहा कि समाज में अलगाव की भावना बढ़ने से गंभीर परिणाम सामने आ सकते हैं।

आंदोलन का उद्देश्य समस्याओं का समाधान होना चाहिए

संघ प्रमुख ने कहा कि किसी भी समस्या को लेकर आंदोलन करना लोकतांत्रिक प्रक्रिया का हिस्सा हो सकता है, लेकिन उसका मकसद समाधान निकालना होना चाहिए। आंदोलन के माध्यम से समाज में द्वेष, वैमनस्य और विभाजन पैदा करना उचित नहीं है।

उन्होंने कहा कि कई बार जन आंदोलनों का इस्तेमाल राजनीतिक उद्देश्यों के लिए किया जाता है। ऐसे में जरूरी है कि आंदोलन करने वाले समूह अपने उद्देश्य स्पष्ट रखें और समाज की एकता को नुकसान न पहुंचाएं।

भागवत के अनुसार, देश और समाज की समस्याओं का समाधान केवल राजनीतिक नेतृत्व के भरोसे नहीं छोड़ा जा सकता। समाज की सक्रिय भागीदारी भी उतनी ही महत्वपूर्ण है।

सभी की पहचान का सम्मान करने पर जोर

मोहन भागवत ने कहा कि भारत की संस्कृति विविधताओं को स्वीकार करने और सभी को साथ लेकर चलने की परंपरा पर आधारित है। उन्होंने कहा कि लोगों की अलग-अलग पहचान का सम्मान करते हुए सामाजिक एकता को मजबूत करना चाहिए।

उन्होंने यह भी कहा कि देश के लोगों के पूर्वज और सांस्कृतिक मूल एक रहे हैं। इसलिए आपसी मतभेदों को बढ़ाने के बजाय ऐसे प्रयास होने चाहिए, जो लोगों को एक-दूसरे के करीब लाएं।

भागवत ने भारतीय विचारधारा को दुनिया की समस्याओं के समाधान में उपयोगी बताते हुए कहा कि भारत को अपनी सांस्कृतिक परंपराओं और मूल्यों के आधार पर विश्व के सामने उदाहरण प्रस्तुत करना चाहिए।

विकास के साथ पर्यावरण संरक्षण भी जरूरी

संघ प्रमुख ने नेपाल में आई बाढ़ का उदाहरण देते हुए विकास योजनाओं में पर्यावरण संतुलन बनाए रखने की आवश्यकता बताई। उन्होंने कहा कि तकनीक और आर्थिक प्रगति जरूरी हैं, लेकिन इनके कारण प्रकृति को नुकसान नहीं पहुंचना चाहिए।

उन्होंने विकास के साथ अर्थव्यवस्था, पर्यावरण और नैतिकता के बीच संतुलन बनाए रखने पर जोर दिया। उनके मुताबिक, ऐसा विकास नहीं होना चाहिए, जिससे मानव जीवन और प्राकृतिक संसाधनों पर गंभीर संकट खड़ा हो जाए।

भागवत ने कहा कि तकनीक अपने आप में केवल एक साधन है। उसका इस्तेमाल किस उद्देश्य से और किस तरीके से किया जाता है, यह अधिक महत्वपूर्ण है।

OTT और AI के जिम्मेदार इस्तेमाल की जरूरत

मोहन भागवत ने डिजिटल माध्यमों और आधुनिक तकनीक के प्रभाव पर भी बात की। उन्होंने कहा कि आज लोगों को इंटरनेट और विभिन्न डिजिटल प्लेटफॉर्म के माध्यम से बड़ी मात्रा में जानकारी मिल रही है, लेकिन सही और गलत के बीच अंतर समझना जरूरी है।

उन्होंने OTT प्लेटफॉर्म पर उचित नियमों और निगरानी की आवश्यकता बताई। साथ ही आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) जैसी उभरती तकनीकों का जिम्मेदारी से इस्तेमाल करने पर जोर दिया।

उन्होंने कहा कि नई तकनीक का लाभ उठाने के लिए उसके सही उपयोग की समझ भी विकसित करनी होगी। खासकर युवा पीढ़ी को तकनीक के सकारात्मक और नकारात्मक प्रभावों के बारे में जागरूक करना जरूरी है।

नई पीढ़ी को तैयार करने की जरूरत

संघ प्रमुख ने कहा कि भारत को वैश्विक स्तर पर मजबूत भूमिका निभाने के लिए नई पीढ़ी को जिम्मेदारियों के प्रति तैयार करना होगा। उन्होंने युवाओं से छोटे-छोटे अहंकार और आपसी मतभेदों से ऊपर उठकर देश के लिए काम करने का आह्वान किया।

उन्होंने कहा कि सामाजिक जीवन में अच्छे संस्कार, विवेक और नैतिक मूल्यों की महत्वपूर्ण भूमिका है। किसी भी जानकारी या व्यवहार को अपनाने से पहले उसके सही-गलत पक्ष को समझना आवश्यक है।

विजयादशमी उत्सव में कई प्रमुख हस्तियां रहीं मौजूद

नागपुर में आयोजित विजयादशमी कार्यक्रम में पूर्व उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ और उनकी पत्नी डॉ. सुदेश धनखड़, महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस, केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी और इजराइल के काउंसल जनरल यानिव रेवाच सहित कई प्रमुख लोग उपस्थित रहे।

कार्यक्रम के दौरान स्वयंसेवकों ने परेड और पथ संचलन किया। मोहन भागवत ने शस्त्र पूजन के साथ संघ के संस्थापक डॉ. केशवराव बलिराम हेडगेवार को श्रद्धांजलि भी दी।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने संबोधन की सराहना की

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मोहन भागवत के विजयादशमी संबोधन की सराहना करते हुए राष्ट्रीय एकता, आत्मनिर्भरता, सामाजिक समरसता और राष्ट्र निर्माण के विषयों पर दिए गए संदेश को महत्वपूर्ण बताया। उन्होंने स्वयंसेवकों की सेवा भावना और समाज में सकारात्मक बदलाव लाने के प्रयासों का भी उल्लेख किया।

निष्कर्ष: मोहन भागवत के विजयादशमी संबोधन में राष्ट्रीय एकता, सामाजिक सद्भाव, पर्यावरण संरक्षण और तकनीक के जिम्मेदार इस्तेमाल जैसे मुद्दे प्रमुख रहे। उन्होंने देश को मजबूत बनाने के लिए समाज की सक्रिय भागीदारी, सांस्कृतिक मूल्यों और आपसी सहयोग को आवश्यक बताया।

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