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“ईरान जंग में फंसे ट्रंप? अंदरूनी हलचल तेज, काश पटेल समेत 3 बड़े चेहरों पर गिर सकती है गाज”

ईरान युद्ध की वजह से अमेरिका के अंदर भी कलह मची हुई है, भले ही इसे सार्वजनिक तौर पर स्वीकारा नहीं गया हो लेकिन इसके संकेत साफ तौर पर दिखाई दे रहे हैं. अमेरिकी पत्रिका द अटलांटिक ने रिपोर्ट दी है कि राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के प्रशासन में 3 प्रमुख लोगों के इस्तीफे या हटाए जाने की सक्रिय चर्चा चल रही है. ये तीन महत्वपूर्ण हस्तियां हैं – FBI डायरेक्टर काश पटेल, आर्मी सेक्रेटरी डेनियल ड्रिस्कोल और लेबर सेक्रेटरी लोरी शावेज डेरेमर. सूत्रों के मुताबिक ट्रंप अभी इस पर पूरा मन नहीं बना पाए हैं और इन्हें हटाने की तारीख भी नहीं तय हुई है. इन तीनों महत्वपूर्ण लोगों को हटाए जाने की चर्चा हाल ही में अटॉर्नी जनरल पाम बॉन्डी और होमलैंड सिक्योरिटी सेक्रेटरी क्रिस्टी नोएम की बर्खास्तगी के बाद आई है. इसी बीच अमेरिका के आर्मी चीफ रैंडी जॉर्ज को भी हटा दिया गया है. ऐसे में ये चर्चा में है क्योंकि कभी ट्रंप प्रशासन का अनऑफिशियल नारा था- ‘नो स्कैल्प्स’, जो अब धड़ाधड़ लोगों के हटाए जाने के बाद बदलता नजर आ रहा है.

ये तीनों हैं कौन और कितने महत्वपूर्ण?

काश पटेल (FBI डायरेक्टर)

काश पटेल FBI के 9वें डायरेक्टर) हैं. वे फरवरी, 2025 से इस पद पर हैं. उन्हें ट्रंप के सहयोगी, पूर्व नेशनल सिक्योरिटी काउंसिल के काउंटरटेररिज्म डिप्टी और इंटेलिजेंस अधिकारी के तौर पर जाना जाता है. वे डीप स्टेट के खिलाफ अपनी सख्ती के लिए मशहूर हैं. उनका हटाया जाना इसलिए भी महत्वपूर्ण हो जाता है क्योंकि FBI अमेरिका की सबसे बड़ी जांच एजेंसी है. देश की आंतरिक सुरक्षा, आतंकवाद विरोध, जासूसी रोधी अभियान और बड़े आपराधिक मामलों की जांच इसी के जिम्मे है. युद्ध के समय में विदेशी जासूसों, घरेलू खतरे और राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़ी जांचें सीधे इसी एजेंसी से जुड़ी होती हैं.
38-39 साल के ड्रिस्कोल अमेरिका के सबसे युवा आर्मी सेक्रेटरी हैं, जिन्होंने पिछले साल फरवरी में पदभार संभाला था. पूर्व आर्मी कैवलरी स्काउट रहे, इराक युद्ध में तैनात रहे और वे एक वकील और व्यवसायी के तौर पर भी पहचान रखते हैं. उन्हें आधुनिक ड्रोन तकनीक और आर्मी आधुनिकीकरण पर जोर देने की वजह से ‘ड्रोन गाइ’ भी कहा जाता है. उनके पास अमेरिकी आर्मी की पूरी जिम्मेदारी है, जिसमें ट्रेनिंग, हथियार, बजट और ऑपरेशन है. ऐसे में वर्तमान ईरान युद्ध के दौरान आर्मी की भूमिका के लिए यह पद बेहद अहम है.
ओरेगन की पूर्व कांग्रेस सदस्य और मेयर लोरी शावेज ने मार्च, 2025 से लेबर विभाग की प्रमुख के तौर पर पद संभाला. यूनियन फ्रेंडली रिपब्लिकन के रूप में जानी जाती हैं और छोटे व्यवसायों और श्रमिकों की हिमायती हैं. लेबर विभाग श्रमिक अधिकार, यूनियन, वेतन, रोजगार और कार्यस्थल सुरक्षा देखता है. युद्ध की वजह से बढ़ती महंगाई, तेल की कीमतें और डिफेंस इंडस्ट्री में मजदूरों की जरूरत को देखते हुए यह पद अर्थव्यवस्था के लिए क्रिटिकल है.

हटाए जाने के क्या हो सकते हैं संकेत?

हाल के महीनों में पटेल पर FBI संसाधनों के दुरुपयोग और जांच में देरी के आरोप लगे. ड्रिस्कोल के कार्यकाल में आर्मी चीफ ऑफ स्टाफ को हटाया गया. शावेज डेरेमर के स्टाफ पर मिसकंडक्ट की जांच चल रही थी. ऐसे में ट्रंप ज्यादा वफादार और आक्रामक लोगों को जगह देना चाहते हैं. युद्ध प्रबंधन, घरेलू सुरक्षा या अर्थव्यवस्था पर ट्रंप की उम्मीदों से मेल नहीं खा रहा है. हालांकि इन्हें हटाने की टाइमिंग सबसे ज्यादा अहम है –
  • वर्तमान में अमेरिका-इजराइल-ईरान युद्ध अपने चरम पर है. हार्मुज जलडमरूमध्य, तेल आपूर्ति और मिसाइल हमलों की खबरें रोज आ रही हैं.
  • युद्ध में आर्मी की तैयारियों और रणनीति सीधे उनके अधीन है. अगर ट्रंप युद्ध जल्दी खत्म करने या और तेज करने का फैसला कर रहे हैं तो आर्मी लीडरशिप में बदलाव उसका संकेत हो सकता है.
  • युद्ध के दौरान ईरानी जासूसी, घरेलू आतंकवाद और जांच एजेंसियों का समन्वय FBI पर निर्भर करता है. अगर कोई सॉफ्ट रवैया नजर आ रहा हो तो ट्रंप इसे बदलना चाहते हों.
  • युद्ध ने अर्थव्यवस्था पर असर डाला है. डिफेंस फैक्टरियों में मजदूरों की मांग, स्ट्राइक्स और महंगाई.लेबर नीति में बदलाव युद्ध-समर्थित अर्थव्यवस्था के लिए जरूरी हो सकता है.
कुल मिलाकर यह बदलाव युद्ध के बीच ये दिखा रहा है कि ट्रंप प्रशासन में सब कुछ ठीक नहीं है. ट्रंप कैबिनेट मीटिंग में भी ईरान युद्ध पर ही फोकस कर रहे हैं और जीत का दावा कर रहे हैं. इसी बीच इस तरह का बदलाव बताता है कि अमेरिका के अंदर भी ईरान युद्ध को लेकर एकमत नहीं है. उनके ही कई करीबी इसे लेकर बयान देते हुए कह चुके हैं कि ये इतना जरूरी नहीं था, जितना बनाया गया.

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