दिल्ली के तीस हजारी कोर्ट परिसर में एक वकील पर कथित तौर पर गुंडों द्वारा हमला किए जाने का गंभीर मामला सामने आया है. बताया जा रहा है कि यह घटना जज के सामने हुई, जिससे अदालत परिसर की सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल खड़े हो गए हैं. पीड़ित वकील ने आरोप लगाया कि कुछ असामाजिक तत्वों ने अदालत के भीतर ही उनके साथ मारपीट की. लिहाजा इस मामले को लेकर कानूनी समुदाय में भारी नाराजगी देखी जा रही है. सोमवार 9 फरवरी 2026 को सुप्रीम कोर्ट के सामने पीड़ित वकील के द्वारा इसे मेंशन किया गया, जिसके बाद कोर्ट द्वारा इस मामले में पूछा गया कि क्या आपने इस मामले की जानकारी दिल्ली हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस को दिया.
सुप्रीम कोर्ट ने पीड़ित पक्ष से कहा कि आप इस मामले की औपचारिक तौर पर लिखित तौर पर जानकारी दिल्ली हाईकोर्ट को दे दीजिए और उसके साथ ही मुझे भी उस शिकायत की कॉपी संलग्न कर दें. भारत के प्रधान न्यायाधीश (CJI) जस्टिस सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ के सामने यह केस पेश किया गया. CJI सूर्यकांत ने इस पर गंभीर चिंता जताई. CJI जस्टिस सूर्यकांत ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि अदालतों में गुंडा राज किसी भी कीमत पर स्वीकार नहीं किया जाएगा और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी. उन्होंने आश्वासन दिया कि कोर्ट परिसर की गरिमा और सुरक्षा से कोई समझौता नहीं होगा. साथ ही संबंधित अधिकारियों को आवश्यक कदम उठाने के निर्देश देने की बात कही गई है. इस घटना के बाद वकीलों ने अदालत परिसरों में सुरक्षा बढ़ाने और दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग की है. मामला फिलहाल जांच के दायरे में है. पीड़ित वकील ने CJI जस्टिस सूर्यकांत के समक्ष इसका उल्लेख करते हुए आरोप लगाया कि पिछले शनिवार को दिल्ली के तीस हजारी कोर्ट की एक अदालत कक्ष में उनके साथ मारपीट की गई.
क्या है आरोप?
वकील ने बताया कि वह अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश हरजीत सिंह पाल की अदालत में एक आरोपी की ओर से पेश हो रहे थे. इसी दौरान शिकायतकर्ता पक्ष के अधिवक्ता कथित तौर पर कई लोगों के साथ अदालत कक्ष में घुस आए और जज के सामने ही उनके तथा अन्य आरोपी के साथ मारपीट की. वकील का आरोप है कि हमलावरों ने अंदर से कोर्ट रूम का दरवाजा बंद कर दिया और जज की मौजूदगी में हिंसा की घटना को अंजाम दिया. मामले को लेकर अदालत से हस्तक्षेप और सुरक्षा सुनिश्चित करने की मांग की गई है. सीजेआई जस्टिस सूर्यकांत ने जन सुराज पार्टी के प्रमुख प्रशांत किशोर को कुछ दिनों पहले फटकार लगाई थी. किशोर ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल कर बिहार विधानसभा चुनाव 2025 को अवैध घोषित करने की मांग की थी.
याचिका में आरोप लगाया गया था कि चुनाव के दौरान आचार संहिता लागू रहते हुए राज्य सरकार ने कथित तौर पर महिला मतदाताओं के खातों में 10,000 रुपये ट्रांसफर किए, जो फ्रीबीज के दायरे में आता है और चुनावी प्रक्रिया को प्रभावित करता है. इस याचिका पर CJI सूर्यकांत और जस्टिस जॉयमाल्या बागची की पीठ सुनवाई कर रही थी. सुनवाई के दौरान सीजेआई जस्टिस सूर्यकांत ने साफ किया कि फ्रीबीज का मुद्दा अदालत के लिए नया नहीं है और इस पर विचार किया जा सकता है, लेकिन इसके साथ-साथ याचिकाकर्ता की मंशा भी देखनी होगी. CJI सूर्यकांत ने बेहद सख्त लहजे में कहा कि हम फ्रीबीज के मुद्दे पर विचार करेंगे लेकिन हमें मैरिट को भी देखना होगा. हम किसी ऐसी पार्टी के कहने पर ऐसा नहीं देख सकते जो अभी-अभी चुनाव हारी है.
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