“कनाडा में कार्नी सरकार पर ट्रंप का ‘खतरनाक गेमप्लान’, व्हाइट हाउस में अलगाववादी नेताओं संग हाई-लेवल मीटिंग”

मार्क कार्नी और डोनाल्ड ट्रंप में तनाव के बीच अमेरिका ने कनाडा पर अपनी नजर टेढ़ी कर ली है. गुरुवार को व्हाइट हाउस के अधिकारियों ने अल्बर्टा के बागी नेताओं से मीटिंग की. बता दें कि, कनाडा में लंबे समय से अल्बर्टा को अलग किए जाने की मांग की जा रही है. ऐसे में इस मीटिंग को काफी अहम माना जा रहा है. फाइनेंशियल टाइम्स के मुताबिक अल्बर्टा के बागी नेताओं से डोनाल्ड ट्रंप के अधिकारियों ने यह मुलाकात आजादी को लेकर की है. कनाडा ने इस पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं दी है. कहा जा रहा है कि ट्रंप प्रशासन अल्बर्टा के जरिए कनाडा को अस्थिर करने में जुटा है. ट्रंप प्रशासन की कोशिश किसी भी तरह से कनाडा की कार्नी सरकार को बैकफुट पर धकेलने की है. ट्रंप खुलेआम कनाडा की सरकार को सबक सिखाने की बात कह चुके हैं.

कनाडा में अल्बर्टा को अलग करने की मांग

बता दें कि अल्बर्टा कनाडा के पश्चिमी प्रांत में स्थिर है. कनाडा का सबसे ज्यादा तेल इसी अल्बर्टा में है. ऑयल डेशबोर्ड के मुताबिक अल्बर्टा में लगभग 165168 बिलियन बैरल तेल भंडार है. 2018 में पहली बार अल्बर्टा को कनाडा से अलग करने की मांग उठी थी. उस वक्त अल्बर्टा में जमकर प्रदर्शन हुए थे. अल्बर्टा यूनिवर्सिटी प्रोफेसर बोइली ने अपने एक लेख में लिखा है- शुरुआत में यह मुख्य रूप से एक आर्थिक विचार था, जिसमें कनाडा के बाकी हिस्सों के लिए भुगतान न करने की बात थी, लेकिन अब यहां पर स्वाधीनता की बात हो रही है. लोग कनाडा से खुद को अलग किए जाने की मांग कर रहे हैं. हाल के दिनों में अल्बर्टा को लेकर कनाडा में आंदोलन तेज हुए हैं. इसी महीने इप्सोस के एक सर्वेक्षण में 28 प्रतिशत लोगों ने खुलकर अल्बर्टा को कनाडा से अलग करने की मांग की. दिलचस्प बात है कि कनाडा के प्रधानमंत्री मार्क कार्नी भी इसी अल्बर्टा इलाके के रहने वाले हैं.

क्यों अल्बर्टा में उठ रही चिंगारी को हवा देने में जुटा है अमेरिका ?

  1. कनाडा का अल्बर्टा अलास्का के समीप है. जमीनी तौर पर यह अमेरिका के काफी करीब है. वहीं अमेरिका के मोंटाना से अल्बर्टा की सीमा लगती है. दोनों के बीच 294 किमी की सीमा है. भू-राजनीतिक तौर पर अमेरिका के लिए यह काफी अहम है.
  2. अकेले अल्बर्टा कनाडा का 99 प्रतिशत ऊर्जा आपूर्ति करता है. अगर यह कनाडा से अलग होता है तो वहां कोहराम मच जाएगा. अमेरिका के लिए यह फायदेमंद है. डोनाल्ड ट्रंप की कोशिश है कि वह कनाडा को घुटनों पर ला दें.
  3. अमेरिका के पड़ोस में जितने भी देश हैं, उससे उसके रिश्ते ठीक नहीं चल रहे. खासकर मेक्सिको, कनाडा और क्यूबा. अल्बर्टा को अलग कर अमेरिका अपना सबसे भरोसेमंद पड़ोसी देश बनाना चाहता है.

    कनाडा और अमेरिका में किस बात का चल रहा है झगड़ा?

    बता दें कि, राष्ट्रपति बनने के बाद डोनाल्ड ट्रंप ने 2 अहम फैसले लिए. पहला फैसला टैरिफ का था और दूसरा गोल्डन डोम का. कनाडा ने दोनों ही फैसले का विरोध किया है. कनाडा का कहना था कि गोल्डन डोम के जरिए हमारे संप्रभुता के साथ खिलवाड़ किया जा रहा है. कनाडा ने ग्रीनलैंड के मुद्दे पर भी ट्रंप का जमकर विरोध किया. कनाडा ने टैरिफ का भी विरोध किया. इसी महीने की शुरुआत में कनाडा के प्रधानमंत्री कार्नी चीन पहुंच गए. यहां पर कार्नी ने नए वर्ल्ड ऑर्डर की बात कही. कार्नी यहीं नहीं रुके, उन्होंने दावोस में अमेरिकी राष्ट्रपति पर जमकर भड़ास निकाली. वहीं ट्रंप का कहना था कि कनाडा हमसे फायदा तो ले लेता है, लेकिन उसके बारे में किसी को बताता नहीं है.

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