उत्तर प्रदेश में लगातार हो रही मानसूनी बारिश से कई जिलों में हालात बिगड़ गए हैं। चंदौली में मूसाखांड और लतीफशाह बांध ओवरफ्लो होने के बाद उनके गेट खोल दिए गए हैं। लखीमपुर खीरी में शारदा नदी पर बने तमोलिन पुरवा बांध का एक हिस्सा कट गया है। महोबा के जिला अस्पताल में बारिश का पानी भरने से मरीजों और तीमारदारों को परेशानी का सामना करना पड़ा।
वाराणसी में भी भारी बारिश के बाद BHU अस्पताल परिसर में घुटनों तक पानी भर गया। जलभराव के बीच मरीजों को कंधे पर बैठाकर ले जाने की तस्वीरें सामने आई हैं।
बिहार में गंगा नदी के उफान पर होने से बेगूसराय समेत कई इलाकों में बाढ़ का संकट गहरा गया है। बेगूसराय में 50 हजार से अधिक लोग बाढ़ के पानी से घिरे बताए जा रहे हैं। भागलपुर के नवगछिया में राघोपुर-नरकटिया तटबंध टूटने से करीब 10 हजार लोग प्रभावित हुए हैं।
मध्य प्रदेश में भी मानसून सक्रिय होने जा रहा है। मौसम विभाग ने भोपाल, उज्जैन, सागर, ग्वालियर और चंबल संभाग के 21 जिलों में अगले दो दिनों के लिए भारी बारिश का ऑरेंज अलर्ट जारी किया है।
उत्तराखंड और हिमाचल प्रदेश में भी बारिश और भूस्खलन से परेशानी बढ़ी है। पिथौरागढ़ में कैलाश मानसरोवर यात्रा मार्ग पर लैंडस्लाइड से रास्ता बंद हो गया, जबकि हिमाचल के चंबा में पहाड़ का बड़ा हिस्सा सड़क पर गिरने से यातायात बाधित हुआ।
राजस्थान के कई जिलों में भी तेज बारिश का दौर जारी है। निचले इलाकों में पानी भरने से लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया जा रहा है। प्रशासन ने नदी-नालों और जलभराव वाले क्षेत्रों से दूर रहने की अपील की है। कई जगहों पर राहत और बचाव दलों को अलर्ट पर रखा गया है।
महाराष्ट्र के विदर्भ और मराठवाड़ा क्षेत्र में भारी बारिश के कारण खेतों में पानी भर गया है। कुछ ग्रामीण इलाकों में सड़क संपर्क प्रभावित हुआ है। स्थानीय प्रशासन ने प्रभावित गांवों में स्थिति की निगरानी बढ़ा दी है और जरूरत पड़ने पर राहत सामग्री पहुंचाने की तैयारी की है।
गुजरात में भी कई नदियों का जलस्तर बढ़ने से तटीय और निचले इलाकों में सतर्कता बढ़ा दी गई है। मौसम विभाग ने लोगों से मौसम संबंधी चेतावनियों का पालन करने और अनावश्यक यात्रा से बचने की सलाह दी है।
मौसम विभाग के अनुसार, अगले कुछ दिनों तक देश के कई हिस्सों में मानसून सक्रिय रह सकता है। भारी बारिश के दौरान बिजली गिरने, अचानक बाढ़ और भूस्खलन का खतरा बना रहेगा। लोगों से अपील की गई है कि वे खुले मैदानों, नदी किनारे और कमजोर ढांचों के पास जाने से बचें।
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