बंगाल। मेडिकल कॉलेज में MBBS दाखिले के नाम पर लाखों रुपये की कथित डील का मामला उत्तर प्रदेश के लखनऊ से सामने आया है। एजेंटों ने अभ्यर्थियों को भरोसा दिलाया कि NEET में रैंक चाहे जैसी हो, 18 लाख रुपये में सरकारी मेडिकल कॉलेज में MBBS सीट दिलाई जा सकती है। इस कथित रैकेट में दूसरे राज्यों के मेडिकल कॉलेजों में दाखिले का झांसा दिए जाने की बात सामने आई है।
एजेंटों की ओर से अभ्यर्थियों और उनके परिजनों से संपर्क कर सीट पक्की कराने के नाम पर बड़ी रकम मांगे जाने का आरोप है। बातचीत में यह दावा भी किया गया कि NEET रैंक कम होने के बावजूद पैसे के दम पर मेडिकल कॉलेज में प्रवेश कराया जा सकता है।
बताया जा रहा है कि एजेंट पहले अभ्यर्थियों और उनके परिजनों को फोन या मैसेज के जरिए संपर्क करते थे। इसके बाद उन्हें कॉलेज, सीट और काउंसलिंग प्रक्रिया से जुड़ी जानकारी देकर भरोसे में लेने की कोशिश की जाती थी। कुछ मामलों में एडवांस रकम जमा कराने और बाकी राशि दाखिले के समय देने की बात कही गई।
मामले में यह भी आशंका जताई जा रही है कि एजेंट फर्जी दस्तावेज, नकली काउंसलिंग लेटर या कॉलेज प्रबंधन से जुड़े होने का दावा कर अभ्यर्थियों को गुमराह कर सकते हैं। विशेषज्ञों के अनुसार, मेडिकल कॉलेजों में दाखिला केवल निर्धारित काउंसलिंग प्रक्रिया और मेरिट के आधार पर होता है। किसी भी व्यक्ति को पैसे लेकर सरकारी सीट दिलाने का अधिकार नहीं है।
ऐसे मामलों ने मेडिकल प्रवेश प्रक्रिया की पारदर्शिता और छात्रों से होने वाली ठगी को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। यदि सरकारी मेडिकल कॉलेज में सीट दिलाने के नाम पर रकम वसूली की पुष्टि होती है, तो यह प्रवेश प्रक्रिया के नियमों का गंभीर उल्लंघन माना जाएगा। पुलिस और संबंधित जांच एजेंसियां शिकायत मिलने पर कॉल रिकॉर्ड, बैंक लेनदेन, चैट और दस्तावेजों की जांच कर सकती हैं।
अभ्यर्थियों को सलाह दी जाती है कि किसी भी एजेंट के दावे पर भरोसा करने के बजाय प्रवेश संबंधी जानकारी केवल आधिकारिक काउंसलिंग प्रक्रिया और अधिकृत स्रोतों से ही सत्यापित करें। किसी भी व्यक्ति को नकद या निजी खाते में रकम भेजने से पहले उसकी पूरी जानकारी जांच लें। ठगी की आशंका होने पर तुरंत पुलिस, साइबर क्राइम पोर्टल या संबंधित मेडिकल काउंसलिंग प्राधिकरण को शिकायत करें।
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