लखनऊ। उत्तर प्रदेश में मानसूनी बारिश का दौर लगातार जारी है। प्रदेश के कई हिस्सों में तेज बारिश और नदियों के बढ़ते जलस्तर से बाढ़ की स्थिति गंभीर होती जा रही है। 19 जिले बाढ़ से प्रभावित हैं, जबकि 92 गांवों में फसलें जलमग्न हो चुकी हैं। 26 गांवों का दूसरे क्षेत्रों से संपर्क टूट गया है और ग्रामीणों के आवागमन के लिए नावों व मोटरबोट का सहारा लिया जा रहा है।
शाहजहांपुर में रविवार सुबह मौसम का अलग ही मिजाज देखने को मिला। कलान और आसपास के इलाकों में अगस्त के महीने में घना कोहरा छा गया। विजिबिलिटी 50 मीटर से भी कम रह गई। बारिश के बाद हवा में बढ़ी नमी और रात के तापमान में गिरावट को कोहरे की वजह बताया जा रहा है।
बाराबंकी में सरयू नदी खतरे के निशान से करीब 10 सेंटीमीटर ऊपर बह रही है। रामसनेहीघाट क्षेत्र के गुनौली मांझा, कोयलावर, ढेमा, टिकरी और जलालपुर तराई समेत कई गांव बाढ़ से घिरे हैं। करीब 1,250 ग्रामीणों के लिए नाव ही आवागमन का मुख्य साधन बनी हुई है।
प्रयागराज में गंगा और यमुना का जलस्तर तेजी से बढ़ रहा है। दारागंज समेत कई घाटों की सीढ़ियां पानी में डूब गई हैं। घाटों पर जगह कम पड़ने के कारण कुछ स्थानों पर सड़क किनारे अंतिम संस्कार करने की स्थिति बन गई है। काशी में भी गंगा का पानी घाटों और मंदिरों तक पहुंच गया है।
वाराणसी के अस्सी घाट पर ‘सुबह-ए-बनारस’ का मंच पूरी तरह जलमग्न हो गया है। दशाश्वमेध घाट पर जल पुलिस चौकी तक पानी पहुंच चुका है। घाट किनारे स्थित कई मंदिरों के निचले हिस्से भी पानी में डूब गए हैं।
कानपुर में गंगा के साथ पांडू नदी का जलस्तर भी बढ़ा हुआ है। निचले इलाकों की बस्तियों और कॉलोनियों में पानी घुसने से करीब दो हजार लोग प्रभावित हुए हैं। वहीं मऊ के मधुबन तहसील क्षेत्र में बाढ़ के कारण 200 से अधिक पशुओं के लिए चारे का संकट पैदा हो गया है। किसान नाव से चारा पहुंचाने को मजबूर हैं।
बहराइच के मिहींपुरवा में बाढ़ के बीच मगरमच्छ सड़क पर दिखाई देने से लोगों में दहशत फैल गई। स्थानीय लोगों ने उसका वीडियो भी बनाया। क्षेत्र में नदियों और नहरों का जलस्तर बढ़ने के कारण जलीय जीवों के रिहायशी इलाकों की ओर आने का खतरा बढ़ गया है।
मौसम विभाग ने रविवार को प्रदेश के 58 जिलों में गरज-चमक के साथ बारिश की संभावना जताई है, जबकि छह जिलों में भारी बारिश का अलर्ट जारी किया गया है। पिछले 24 घंटे में प्रदेश के करीब 60 जिलों में बारिश दर्ज की गई। शामली और बरेली में जलभराव से सड़कें तालाब में तब्दील हो गईं, जबकि बहराइच और मेरठ के मेडिकल कॉलेजों तक पानी पहुंच गया।
मौसम वैज्ञानिकों के अनुसार मानसूनी सिस्टम के उत्तर की ओर सक्रिय रहने और बंगाल की खाड़ी से लगातार नमी वाली हवाएं आने के कारण अगले एक-दो दिनों तक बारिश की गतिविधियां तेज रह सकती हैं। 25 अगस्त के बाद पश्चिमी हवाओं के प्रभाव से पश्चिमी और मध्य उत्तर प्रदेश में भारी बारिश की संभावना कम होगी, जबकि पूर्वी यूपी में बारिश का दौर जारी रहने का अनुमान है।
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