उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2027 से पहले भाजपा ने मुरादाबाद मंडल की उन सात विधानसभा सीटों पर अपनी रणनीति तेज कर दी है, जहां पार्टी लंबे समय से जीत का इंतजार कर रही है। इन सीटों पर समाजवादी पार्टी के प्रभाव को चुनौती देने के लिए भाजपा सर्वे करा रही है और संभावित जिताऊ चेहरों की तलाश में जुटी है।
मुरादाबाद मंडल को लंबे समय से समाजवादी पार्टी का मजबूत क्षेत्र माना जाता है। 2022 के विधानसभा चुनाव में मंडल की कई सीटों पर सपा ने बेहतर प्रदर्शन किया था। वहीं भाजपा के सामने उन सीटों पर वापसी की चुनौती है, जहां उसे वर्षों से जीत नहीं मिली है।
पार्टी सूत्रों के मुताबिक, भाजपा इन विधानसभा क्षेत्रों में स्थानीय राजनीतिक समीकरण, मतदाताओं की पसंद और संभावित प्रत्याशियों की स्थिति का आकलन कर रही है। मुस्लिम बहुल सीटों पर गठबंधन के सहयोगी दलों की भूमिका बढ़ाने को लेकर भी मंथन किया जा रहा है।
मुरादाबाद देहात, अमरोहा, संभल, नगीना और नजीबाबाद जैसी सीटों पर भाजपा लंबे समय से जीत से दूर है। वहीं कुंदरकी और रामपुर में उपचुनाव के दौरान पार्टी ने जीत दर्ज कर अपना खाता मजबूत किया था।
भाजपा नेतृत्व का फोकस अब ऐसे उम्मीदवारों पर है, जो स्थानीय स्तर पर मजबूत पकड़ रखते हों और पार्टी के पक्ष में व्यापक समर्थन जुटा सकें। संगठन स्तर पर भी इन सीटों की जमीनी स्थिति की समीक्षा की जा रही है।
पार्टी की रणनीति में मुस्लिम बहुल क्षेत्रों में सामाजिक समीकरण साधने और सहयोगी दलों के साथ बेहतर तालमेल बनाने पर भी जोर दिया जा रहा है। माना जा रहा है कि विधानसभा चुनाव नजदीक आने के साथ इन सीटों पर भाजपा की सक्रियता और बढ़ सकती है।
भाजपा ने इन सीटों पर बूथ स्तर के संगठन को मजबूत करने की तैयारी भी शुरू कर दी है। पार्टी कार्यकर्ताओं को मतदाता संपर्क अभियान तेज करने और केंद्र व प्रदेश सरकार की योजनाओं का लाभ लोगों तक पहुंचाने के निर्देश दिए जा सकते हैं। संगठन की ओर से ऐसे बूथों की पहचान की जा रही है, जहां पिछले चुनावों में पार्टी का प्रदर्शन कमजोर रहा था।
स्थानीय नेताओं और जनप्रतिनिधियों से भी क्षेत्रवार रिपोर्ट मांगी जा रही है। इसमें बेरोजगारी, सड़क, बिजली, स्वास्थ्य, शिक्षा और कानून-व्यवस्था जैसे स्थानीय मुद्दों को शामिल किया जा रहा है। पार्टी यह समझने की कोशिश कर रही है कि मतदाताओं के बीच सबसे बड़ा मुद्दा क्या है और उसके आधार पर चुनावी अभियान की दिशा तय की जाए।
संभावित प्रत्याशियों के चयन में जातीय और सामाजिक समीकरणों के साथ-साथ उनकी छवि को भी अहम माना जा रहा है। भाजपा ऐसे चेहरों को प्राथमिकता दे सकती है, जिनकी क्षेत्र में स्वीकार्यता हो और जो संगठन के साथ लंबे समय से जुड़े रहे हों। बाहरी उम्मीदवारों को लेकर पार्टी कार्यकर्ताओं की प्रतिक्रिया का भी आकलन किया जा रहा है।
दूसरी ओर, समाजवादी पार्टी भी इन सीटों पर अपनी पकड़ बनाए रखने के लिए संगठन को सक्रिय कर रही है। सपा के स्थानीय नेताओं का जोर पारंपरिक वोट बैंक को मजबूत करने के साथ-साथ पिछड़े, दलित और अल्पसंख्यक मतदाताओं के बीच संपर्क बढ़ाने पर है। ऐसे में मुरादाबाद मंडल की इन सीटों पर आने वाले समय में भाजपा और सपा के बीच राजनीतिक मुकाबला और तेज होने की संभावना है।
राजनीतिक जानकारों का मानना है कि इन सीटों पर जीत के लिए केवल उम्मीदवार चयन ही पर्याप्त नहीं होगा। भाजपा को स्थानीय असंतोष, गुटबाजी और क्षेत्रीय मुद्दों पर भी प्रभावी रणनीति बनानी होगी। वहीं सपा के सामने अपने मजबूत जनाधार को बरकरार रखने और भाजपा की बढ़ती सक्रियता का मुकाबला करने की चुनौती होगी।
चुनाव में अभी समय है, लेकिन दोनों दलों की शुरुआती तैयारियों से साफ है कि मुरादाबाद मंडल की ये सीटें 2027 के विधानसभा चुनाव में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती हैं। उम्मीदवारों के नाम और गठबंधन की तस्वीर स्पष्ट होने के बाद इन सीटों पर मुकाबले की दिशा और अधिक साफ होने की उम्मीद है।
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