(ताहिर हुसैन हाशमी)
लखनऊ.आठवीं रबी उल अव्वल को निकलने वाला तारीखी चुप ताज़िये का जुलूस,हर साल की तरह इस साल भी विक्टोरिया स्थित नाजिम साहब के इमामबाड़े से फज्र की नमाज़ के बाद बरामद होकर शांतिपूर्ण ढंग से ,रौज़ा ए काज़मैन जाकर समाप्त हुआ.इस जुलूस के संस्थापक नवाब आग़ा अहमद अली खान मरहूम थे.जुलूस निकलने से पहले इमामबाड़े में चुप ताज़िये की एक अलविदाई मजलिस हुई.जिसको मौलाना मिर्ज़ा यासूब अब्बास ने ख़िताब किया.डॉक्टर आग़ा हसन बाक़र की जानिब से होने वाली मजलिस में मौलाना ने मसायब ए रुखसते अज़ा बयान किये.उसके बाद जुलूस शिया पी जी कालेज,मेफेयर तिराहा,चिड़या बाज़ार, नख़ास चौराहे से होता हुआ,टूरियागंज तिराहे से दाहिने तरफ मुड़कर अशरफ़ाबाद,बालदा गिरधारी सिंह स्कूल,मंसूर नगर तिराहे से बाएं तरफ़ मुड़कर,शिया यतीम खाना होते हुए रौज़ए काज़मैन पहुंचकर समाप्त हुआ.जुलूस में नक़ीब मरसिया पढ़ते हुए चल रहे थे.जुलूस में अलम,ज़ुलजना (दुलदुल)ऊँटों पर अमारियां और दो बड़ी ज़रियां शामिल थीं.जिसकी अकीदत मंदो ने ज़ियारत कर इमाम हुसैन(अ.स) और उनके साथियों को पुरसा पेश किया.
जुलूस को शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न कराने के लिए पुलिस प्रशासन की तरफ से कड़ी सुरक्षा व्यवस्था की गई थी.जुलूस की निगरानी ड्रोन कैमरों से की जा रही थी. जुलूस गुजरने वाले अति संवेदनशील क्षेत्रों में पुलिस ने बल्लियां लगाकर बैरिकेटिग कर रखी थी.ताकि किसी तरह की कोई अप्रिय घटना ना हो.
चुप ताजिए का जुलूस गुजरने के बाद 2 महीने 8 दिन तक मजलिस,मातम और शबेदारियों का चलने वाला सिलसिला पूरी तरह से थम गया.
ड्रोन कैमरों से हुई निगरानी
जुलूस को शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न कराने के लिए पुलिस प्रशासन ने सुरक्षा के व्यापक इंतजाम किए थे। पूरे जुलूस मार्ग पर पुलिस बल तैनात रहा और ड्रोन कैमरों से निगरानी की गई। अति संवेदनशील क्षेत्रों में पुलिस ने बल्लियां लगाकर बैरिकेडिंग की थी, ताकि किसी भी तरह की अप्रिय घटना को रोका जा सके।
चुप ताजिये के जुलूस के संपन्न होने के साथ ही करीब दो महीने आठ दिन से चल रही मजलिस, मातम और शबेदारियों की धार्मिक गतिविधियों का सिलसिला भी पूरी तरह थम गया।
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