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वंदे मातरम पर भाजपा-कांग्रेस आमने-सामने, 1937 के फैसले को लेकर छिड़ा सियासी विवाद

नई दिल्ली। वंदे मातरम के गायन को लेकर भाजपा और कांग्रेस के बीच सियासी टकराव तेज हो गया है। भाजपा ने कांग्रेस कार्य समिति के उस फैसले पर सवाल उठाए हैं, जिसमें राष्ट्रगीत के केवल दो छंद गाने की बात कही गई है। भाजपा का आरोप है कि कांग्रेस का यह रुख ऐतिहासिक घटनाओं और तुष्टिकरण की राजनीति से जुड़ा हुआ है।

भाजपा की नई राष्ट्रीय टीम की पहली बैठक में वंदे मातरम के सम्मान को लेकर प्रस्ताव पारित किया गया। बैठक के बाद पार्टी प्रवक्ता संबित पात्रा ने कांग्रेस पर निशाना साधते हुए कहा कि 1937 में वंदे मातरम के सीमित गायन का फैसला लिया गया था और इसके पीछे की परिस्थितियों को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।

भाजपा ने कांग्रेस के फैसले पर उठाए सवाल

संबित पात्रा ने कहा कि वंदे मातरम देशभक्ति और राष्ट्रीय भावना का प्रतीक रहा है। उन्होंने 15 अगस्त 2026 को लाल किले पर वंदे मातरम के संपूर्ण गायन का जिक्र करते हुए कांग्रेस पर राष्ट्रगीत के सम्मान को लेकर दोहरा रवैया अपनाने का आरोप लगाया।

भाजपा नेता ने दावा किया कि कांग्रेस कार्य समिति की 19 अगस्त की बैठक में केवल दो छंद गाने का फैसला किया गया। उन्होंने इसे वंदे मातरम को विभाजित करने की कोशिश बताया।

1937 के फैसले को लेकर भाजपा का कांग्रेस पर हमला

पात्रा ने कहा कि 1937 में वंदे मातरम के सीमित गायन का फैसला तत्कालीन राजनीतिक परिस्थितियों के बीच लिया गया था। भाजपा का आरोप है कि उस समय लिए गए ऐसे फैसलों ने आगे चलकर देश के विभाजन से जुड़ी परिस्थितियों को मजबूत किया।

उन्होंने कांग्रेस के पुराने फैसलों और तत्कालीन नेतृत्व की नीतियों का हवाला देते हुए कहा कि भाजपा राष्ट्रगीत के सम्मान के मुद्दे पर किसी तरह का समझौता नहीं करेगी।

महात्मा गांधी के विचारों का भी दिया हवाला

वंदे मातरम के इतिहास और राष्ट्रीय आंदोलन में उसकी भूमिका का उल्लेख करते हुए संबित पात्रा ने महात्मा गांधी के विचारों का भी हवाला दिया। उन्होंने कहा कि गांधी ने वंदे मातरम को स्वतंत्रता आंदोलन के दौरान राष्ट्रीय भावना और ब्रिटिश शासन के विरोध से जुड़ा शक्तिशाली गीत माना था।

भाजपा का कहना है कि वंदे मातरम केवल एक गीत नहीं, बल्कि स्वतंत्रता आंदोलन और देशभक्ति की ऐतिहासिक विरासत का महत्वपूर्ण हिस्सा है। वहीं, इस मुद्दे पर कांग्रेस का रुख अलग है, जिसके चलते राजनीतिक विवाद लगातार बढ़ता जा रहा है।

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