उत्तर प्रदेश में लगातार हो रही बारिश और नदियों के बढ़ते जलस्तर से बाढ़ का संकट गहराता जा रहा है। प्रदेश के 13 जिलों में बाढ़ की स्थिति बनी हुई है। कई इलाकों में सड़कें और बाजार पानी में डूब गए हैं, जिससे लोगों को नावों के सहारे आवाजाही करनी पड़ रही है। बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में प्रशासन ने राहत और बचाव कार्य तेज कर दिए हैं।
बाढ़ की गंभीर स्थिति को देखते हुए प्रभावित इलाकों में अधिकारियों की टीमें लगातार निगरानी कर रही हैं। कई गांवों और निचले इलाकों में पानी भरने से लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। राहत शिविरों की व्यवस्था के साथ जरूरतमंद परिवारों तक खाद्य सामग्री और अन्य जरूरी सामान पहुंचाया जा रहा है।
प्रदेश में मौसम विभाग ने भी बारिश को लेकर सतर्कता बरतने की चेतावनी दी है। आने वाले दिनों में कई जिलों में बारिश का दौर जारी रहने की संभावना है, जिससे नदियों के जलस्तर में और बढ़ोतरी हो सकती है। प्रशासन ने लोगों से बाढ़ प्रभावित और जलभराव वाले क्षेत्रों में सावधानी बरतने की अपील की है।
इसी बीच गंगा, यमुना और घाघरा जैसी प्रमुख नदियों का जलस्तर लगातार खतरे के निशान के करीब पहुंच रहा है। प्रयागराज, वाराणसी, बलिया, गोरखपुर, बहराइच और लखीमपुर खीरी जैसे जिलों में हालात ज्यादा गंभीर बने हुए हैं। कई जगहों पर खेतों में खड़ी फसलें पूरी तरह जलमग्न हो गई हैं, जिससे किसानों को भारी नुकसान की आशंका है।
राहत और बचाव कार्यों में एनडीआरएफ और एसडीआरएफ की टीमें भी तैनात की गई हैं। संवेदनशील इलाकों से लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया जा रहा है। वहीं कई जिलों में स्कूलों को अस्थायी रूप से बंद कर दिया गया है और बिजली आपूर्ति भी एहतियातन बाधित की गई है।
प्रशासन का कहना है कि स्थिति पर लगातार नजर रखी जा रही है और जरूरत पड़ने पर और अधिक राहत टीमें भेजी जाएंगी। लोगों से अपील की गई है कि वे अफवाहों पर ध्यान न दें और प्रशासन के निर्देशों का पालन करें।
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