फतेहपुर। मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ प्रदर्शन और कलेक्ट्रेट परिसर में पुतला दहन करना समाजवादी पार्टी के कार्यकर्ताओं को भारी पड़ गया। बीते रविवार को कलेक्ट्रेट में जुलूस निकालकर प्रदर्शन और पुतला फूंकने के मामले में पुलिस ने 11 नामजद समेत करीब 25 से 30 लोगों के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया है। पुलिस ने प्रदर्शन के दौरान नारेबाजी और कथित आपत्तिजनक शब्दों के इस्तेमाल को भी कार्रवाई का आधार बनाया है। मुकदमा दर्ज होने के बाद सपा कार्यकर्ताओं में हलचल मच गई है।
पुलिस के मुताबिक, सपा कार्यकर्ताओं ने राष्ट्रीय अध्यक्ष के आह्वान पर कलेक्ट्रेट परिसर में पहुंचकर मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ नारेबाजी की और उनका पुतला दहन किया। प्रदर्शन के दौरान काफी संख्या में पार्टी कार्यकर्ता मौजूद थे। मामले की जानकारी मिलने के बाद पुलिस ने घटना का संज्ञान लिया और उपलब्ध वीडियो फुटेज व अन्य साक्ष्यों के आधार पर प्रदर्शनकारियों की पहचान शुरू की।
मामले में जिलाध्यक्ष सुरेंद्र सिंह यादव एडवोकेट के अलावा जिला महासचिव चौधरी मंज़र यार, पूर्व जिलाध्यक्ष विपिन सिंह यादव, रामेश्वर दयाल उर्फ दयालू गुप्ता, महिला जिलाध्यक्ष संगीता राज पासी, लोहिया वाहिनी जिलाध्यक्ष आजम खान, मुलायम सिंह यूथ ब्रिगेड के जिलाध्यक्ष अमित मौर्य, सपा नगर अध्यक्ष सुहैल अहमद हेमू, नरेश कोरी, सुशील यादव और अय्यूब खान को नामजद किया गया है।
इसके अलावा करीब दो दर्जन से अधिक अज्ञात प्रदर्शनकारियों को भी मुकदमे में आरोपी बनाया गया है। मुकदमा दर्ज करने के बाद पुलिस अब प्रदर्शन के दौरान मौजूद अन्य लोगों की पहचान में जुटी है। इसके लिए मौके पर उपलब्ध वीडियो फुटेज और अन्य साक्ष्यों को खंगाला जा रहा है।
पुलिस का कहना है कि जांच के दौरान सामने आने वाले तथ्यों और साक्ष्यों के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी। कलेक्ट्रेट जैसे प्रशासनिक परिसर में प्रदर्शन और पुतला दहन के मामले में मुकदमा दर्ज होने के बाद राजनीतिक हलकों में भी चर्चा तेज हो गई है। फिलहाल पुलिस की जांच आगे बढ़ने के साथ यह स्पष्ट होगा कि नामजद लोगों के अलावा अज्ञात आरोपियों में और किन लोगों की पहचान होती है।
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पुलिस की नजरों से बचे माननीय
फतेहपुर। समाजवादी पार्टी की ओर से रविवार को वोट चोरी समेत अन्य मुद्दों को लेकर मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार का कलेक्ट्रेट परिसर में पुतला दहन किया गया था। इस विरोध प्रदर्शन में सपा पदाधिकारियों के अलावा पार्टी के माननीय भी शामिल थे, लेकिन पुलिस की एफआईआर में सिर्फ सपा पदाधिकारियों को ही नामजद किया गया है।
इस कार्रवाई में सभी माननीय पुलिस की नजरों से बच गए हैं। इसे लेकर दिनभर राजनीतिक गलियारों में चर्चा होती रही।
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