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“तेजप्रताप के दही-चूड़ा भोज में पहुंचे लालू यादव: बड़े नेताओं की मौजूदगी, सियासी हलचल तेज

बिहार की राजधानी पटना में मकर संक्रांति के मौके पर आयोजित दही-चूड़ा भोज इस बार सिर्फ एक पारंपरिक आयोजन नहीं रहा, बल्कि बिहार की राजनीति और एक परिवार के रिश्तों के लिहाज से खास संकेत देने वाला मंच बन गया। जनशक्ति जनता दल के अध्यक्ष तेज प्रताप यादव ने अपने सरकारी आवास पर इस भोज का आयोजन किया। इस आयोजन में उनके पिता और राष्ट्रीय जनता दल (आरजेडी) के राष्ट्रीय अध्यक्ष लालू प्रसाद यादव शामिल हुए।

तेज प्रताप का दिखा अलग अंदाज

बिहार में मकर संक्रांति पर दही-चूड़ा भोज की राजनीतिक परंपरा की शुरुआत 1990 के दशक में खुद लालू प्रसाद यादव ने की थी। यह आयोजन हर साल सुर्खियों में रहता रहा है। हालांकि, इस बार लालू के आवास पर दही-चूड़ा भोज नहीं हुआ। इसके बजाय तेज प्रताप यादव ने इस परंपरा को अपने अंदाज में आगे बढ़ाया। कार्यक्रम के दौरान एक ऐसा दृश्य भी सामने आया जिसने सियासत से ज्यादा पारिवारिक भावनाओं को उजागर किया। जब लालू यादव पहुंचे तो तेज धूप उनकी आंखों पर पड़ रही थी। यह देखते ही तेज प्रताप ने तुरंत एक सहयोगी को गमछे जैसा कपड़ा लाने को कहा और अपने पिता के सिर पर रखवाया, ताकि उन्हें धूप से राहत मिल सके।

बड़े नेताओं की मौजूदगी, सियासी हलचल तेज

तेज प्रताप यादव ने इस दही-चूड़ा भोज में न सिर्फ अपने पिता लालू यादव, बल्कि छोटे भाई तेजस्वी यादव, मुख्यमंत्री नीतीश कुमार और एनडीए और महागठबंधन के कई बड़े नेताओं को आमंत्रित किया था। आयोजन में राज्यपाल आरिफ मोहम्मद खान, राष्ट्रीय लोक जनशक्ति पार्टी (RLJP) प्रमुख पशुपति पारस, साधु यादव, प्रभुनाथ यादव और जदयू विधायक चेतन आनंद की मौजूदगी ने इसे और खास बना दिया। खासकर साधु यादव की उपस्थिति इसलिए अहम मानी जा रही है, क्योंकि अतीत में उनके और तेज प्रताप के रिश्तों में खटास रही है। अब एक ही मंच पर दिखाई देना सियासी संकेतों के तौर पर देखा जा रहा है।

मकर संक्रांति और बिहार की राजनीति

बिहार की राजनीति में मकर संक्रांति को अक्सर बड़े राजनीतिक उलटफेरों से जोड़कर देखा जाता है। इस मौके पर कई बार नए समीकरण बने हैं और पुराने रिश्ते बदले हैं। ऐसे में तेज प्रताप यादव के इस आयोजन को संभावित शक्ति प्रदर्शन के तौर पर भी देखा जा रहा है। चर्चा है कि मकर संक्रांति के बाद तेज प्रताप कोई बड़ा सियासी फैसला ले सकते हैं। राजनीतिक गलियारों में यह भी चर्चा तेज है कि उनकी एनडीए से नजदीकियां बढ़ रही हैं, हालांकि इस पर अभी कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है।

नाराजगी नहीं, आशीर्वाद हमेशा

इस दही-चूड़ा भोज की सबसे अहम बात लालू प्रसाद यादव का बयान रहा। करीब सात महीने बाद तेज प्रताप के आवास पर पहुंचे लालू यादव ने मीडिया से बातचीत में साफ शब्दों में कहा कि वे अपने बेटे से नाराज नहीं हैं और उनका आशीर्वाद हमेशा उसके साथ रहेगा। लालू ने कहा कि परिवार में मतभेद होते रहते हैं, लेकिन इसका मतलब यह नहीं कि रिश्तों में दूरी आ जाए। उन्होंने दो टूक कहा कि तेज प्रताप अब परिवार के साथ ही रहेगा। उनके इस बयान को राजनीतिक संकेत से ज्यादा एक भावनात्मक संदेश के रूप में देखा जा रहा है, जिससे यह साफ होता है कि परिवार के स्तर पर रिश्तों में नरमी आई है।

बीजेपी में जाने की अटकलों पर लालू का जवाब

तेज प्रताप यादव के बीजेपी में जाने की अटकलों पर भी लालू यादव ने प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि बेटे को हमेशा उनका आशीर्वाद मिलेगा, वह जहां भी रहेगा, खुश और सफल रहे, यही उनकी कामना है। इस बयान ने सियासी चर्चाओं को और हवा दे दी है, लेकिन लालू के शब्दों में राजनीति से ज्यादा पिता का भाव झलकता दिखा।

निष्कासन की पृष्ठभूमि और बदले हालात

साल 2025 में लालू प्रसाद यादव ने तेज प्रताप यादव को पार्टी और परिवार से निष्कासित कर दिया था। इसके बाद लंबे समय तक यह माना जा रहा था कि तेज प्रताप राजनीतिक और पारिवारिक रूप से अलग-थलग पड़ चुके हैं। लेकिन दही-चूड़ा भोज के दौरान लालू के बयान और उनकी मौजूदगी को तेज प्रताप की राजनीतिक और पारिवारिक वापसी के संकेत के तौर पर देखा जा रहा है।

कौन नहीं आया, उस पर भी चर्चा

हालांकि इस आयोजन में जहां कई बड़े चेहरे मौजूद रहे, वहीं तेजस्वी यादव और राबड़ी देवी की अनुपस्थिति भी चर्चा का विषय बनी रही। इसे लेकर अलग-अलग कयास लगाए जा रहे हैं, लेकिन फिलहाल इस पर परिवार या पार्टी की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है।

 

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