सीतापुर। जनपद में मतदाता पुनरीक्षण अभियान के तहत जारी हुई ड्राफ्ट सूची ने प्रशासन और जनता दोनों की नींद उड़ा दी है। जिले में कुल 1,84,488 मतदाता ‘नो मैपिंग’ की श्रेणी में पाए गए हैं। अब इन मतदाताओं को नोटिस थमाने निकली प्रशासन की टीम को जमीनी स्तर पर भारी चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है।
क्यों ‘लापता’ हुए पौने दो लाख वोटर? चुनाव विभाग के आंकड़ों के अनुसार, नो मैपिंग श्रेणी में आए अधिकांश मतदाता वे हैं जिनके नाम:
* वर्ष 2003 की पुरानी वोटर लिस्ट से मिलान नहीं खा रहे हैं।
* पते में बदलाव या स्थानांतरण के कारण रिकॉर्ड से बाहर हो गए हैं।
* मृत्यु या दोहरे नाम (Duplicate entry) की वजह से मैप नहीं हो पाए हैं।
BLO के लिए चुनौती: घर पर नहीं मिल रहे लोगप्रशासन के लिए सबसे बड़ी सिरदर्दी यह है कि जब बीएलओ (BLO) घर-घर जाकर नोटिस देने पहुंच रहे हैं, तो बड़ी संख्या में मतदाता अपने दिए गए पते पर मिल ही नहीं रहे हैं। इससे सत्यापन और सुधार का कार्य बुरी तरह प्रभावित हो रहा है। तहसील सदर में भारी भीड़, मतदाता परेशान नोटिस मिलने के बाद अपना नाम दोबारा जुड़वाने के लिए मतदाताओं में अफरा-तफरी का माहौल है। तहसील सदर में रोजाना सैकड़ों की संख्या में लोग पहुंच रहे हैं।
* लंबी कतारें: संशोधन और दस्तावेज जमा करने के लिए लोग घंटों लाइन में लग रहे हैं।
* दस्तावेजों की दौड़: नाम जुड़वाने के लिए जरूरी कागजात जुटाने को लेकर मतदाता काउंटरों पर चक्कर काट रहे हैं। प्रशासन का पक्ष: “घबराएं नहीं, हर पात्र का जुड़ेगा नाम” मामले की गंभीरता को देखते हुए एडीएम नीतीश कुमार सिंह ने स्थिति स्पष्ट की है। उन्होंने कहा:
> “27 अक्टूबर 2025 की सूची के आधार पर ही सिर (SIR) फॉर्म भेजे गए थे। जिनके नाम छूट गए हैं, वे निर्धारित प्रक्रिया के तहत आवेदन कर सकते हैं। प्रशासन प्राथमिकता के आधार पर नो-मैपिंग की समस्या सुलझा रहा है। कोई भी पात्र मतदाता वोट डालने के अधिकार से वंचित नहीं रहेगा।”
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मतदाता क्या करें? यदि आपका नाम भी लिस्ट में नहीं है या आपको नोटिस मिला है, तो आप तुरंत ये कदम उठाएं:
* अपने क्षेत्र के BLO से संपर्क करें।
* जरूरी पहचान पत्र और निवास प्रमाण पत्र के साथ तहसील या निर्वाचन कार्यालय में आवेदन करें।
* ऑनलाइन पोर्टल के माध्यम से भी सुधार की स्थिति जांचें।
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