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भ्रष्टाचार जांच पर फिर टला भरोसा?

जिला विकास अधिकारी जांच करेंगे या तारीख़ पर तारीख़ देंगे, 12 फरवरी को होगा खुलासा!

सीतापुर। राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी के प्रदेश महासचिव प्रवीण कुमार सिंह द्वारा विकास खण्ड महमूदाबाद में पूर्व में तैनात एवं वर्तमान में विकास खण्ड सकरन में कार्यरत खण्ड विकास अधिकारी श्रीश गुप्ता पर भ्रष्टाचार के गंभीर आरोप लगाते हुए 20 नवंबर 2025 को मुख्य विकास अधिकारी सीतापुर को शिकायती पत्र दिया गया था। शिकायत के बाद मुख्य विकास अधिकारी द्वारा जिला विकास अधिकारी (DDO) को जांच अधिकारी नियुक्त किया गया, लेकिन क्या जांच को लेकर प्रशासन वास्तव में गंभीर है? जांच अधिकारी ने पहली बार 9 जनवरी 2026 को जांच के लिए पत्र जारी किया, लेकिन मौके पर जाकर जांच नहीं की गई। सवाल यह उठता है कि जांच का पत्र जारी करना ही पर्याप्त था या जांच करना भी जिम्मेदारी थी? इसके बाद लगभग एक माह बीतने के पश्चात पुनः जांच पत्र जारी कर 12 फरवरी 2026 की तिथि तय की गई।

अब बड़ा सवाल यह है—
क्या इस बार जांच वास्तव में होगी या फिर तारीख़ बढ़ाकर मामला ठंडे बस्ते में डाल दिया जाएगा? क्या जांच में देरी किसी दबाव, संरक्षण या मिलीभगत का संकेत तो नहीं? जहां एक ओर जिलाधिकारी सीतापुर एवं प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ द्वारा भ्रष्टाचार के मामलों में त्वरित और कठोर कार्रवाई की बात कही जाती है, वहीं दूसरी ओर जिला विकास अधिकारी की भूमिका को लेकर सवाल खड़े हो रहे हैं। क्या यही कारण है कि खण्ड विकास अधिकारी खुलेआम भ्रष्टाचार करने का साहस दिखा रहे हैं? अब 12 फरवरी 2026 को यह स्पष्ट होगा कि भ्रष्टाचार की निष्पक्ष जांच होगी या नहीं? कार्रवाई होगी या मामला दबा दिया जाएगा? या फिर खण्ड विकास अधिकारी को क्लीन चिट देकर भ्रष्टाचार के दाग मिटा दिए जाएंगे? जनता और शिकायतकर्ता की निगाहें प्रशासन पर टिकी हैं, अब देखना है कि सिस्टम सवालों का जवाब देता है या सवाल और गहरे होते हैं।

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