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जयराज हत्याकांड: खाकी की तैयारी कर रहा खास निकला कातिल

– पर क्या अकेला अंकित ही है असली चेहरा?
– पत्रकारों से बातचीत करते एसपी अनूप कुमार सिंह एवं पीछे टीम की गिरफ्त में अभियुक्त।
फतेहपुर। शहर के तांबेश्वर चौराहा क्षेत्र के चर्चित जयराज मान सिंह हत्याकांड का पुलिस ने बुधवार को पर्दाफाश करने का दावा किया है। पुलिस के मुताबिक इस सनसनीखेज वारदात का मास्टरमाइंड कोई और नहीं बल्कि मृतक का सबसे करीबी और पिछले नौ वर्षों से साए की तरह साथ रहने वाला मैनेजर अंकित मिश्रा ही है। हालांकि पुलिस की सिंगल मर्डर थ्योरी और आरोपी के मीडिया के सामने बेखौफ रवैये ने शहर में चर्चाओं का बाजार गर्म कर दिया है। पुलिस अधीक्षक अनूप कुमार सिंह ने पुलिस लाइन के सभागार में पत्रकारों से बातचीत करते हुए बताया कि सिविल लाइन निवासी 68 वर्षीय बुजुर्ग जयराज मान सिंह की हत्या एक सुनियोजित साजिश थी। आरोपी अंकित मिश्रा निवासी तांबेश्वर नगर डीएलएड कर चुका है और वर्तमान में यूपी पुलिस भर्ती की तैयारी कर रहा था। सरकारी नौकरी का सपना देखने वाला यह युवक पिछले एक महीने से अपने आका की हत्या की पटकथा लिख रहा था। 21 जनवरी की रात अंकित, जयराज मान सिंह को रोज की तरह टहलाने के बहाने महर्षि विद्या मंदिर के पास सुनसान बाग में ले गया। वहां उसने पीछे से गला दबाया और फिर चाकू से ताबड़तोड़ वार कर उनकी निर्मम हत्या कर दी। वारदात के बाद आरोपी ने खुद को बचाने के लिए शातिर दिमाग का इस्तेमाल किया और मृतक के नौकर के साथ मिलकर खोजबीन का नाटक किया। इतना ही नहीं, उसने खुद यूपी-112 पर कॉल कर पुलिस को सूचना दी ताकि किसी को उस पर शक न हो। पुलिस ने आरोपी के पास से घटना में प्रयुक्त चाकू, खून से सने कपड़े, एक बोलेरो कार, मोटरसाइकिल और मोबाइल बरामद किया है। एसपी के अनुसार सीसीटीवी फुटेज और इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्यों के जाल में अंकित ऐसा फंसा कि वह पुलिस की सख्ती के आगे टूट गया। हत्या के पीछे जमीन के सौदे में मोटा कमीशन और जल्दी अमीर बनने की लालच बताई जा रही है।

पुलिस की थ्योरी पर लगा रहे सवालिया निशान
पुलिस ने भले ही मामले का खुलासा कर अंकित को जेल भेज दिया हो, लेकिन शहर के प्रबुद्ध वर्ग और जनमानस के बीच यह थ्योरी गले नहीं उतर रही है। चर्चाओं और घटनास्थल के हालात को देखते हुए कुछ गहरे रहस्य बरकरार हैं जैसे अकेला कातिल या कोई और? जिस निर्ममता से बुजुर्ग का गला रेता गया और शरीर पर प्रहार किए गए, वह किसी एक व्यक्ति के बस की बात नहीं लगती। क्या मौके पर कोई और भी मौजूद था?

अजीबोगरीब बॉडी लैंग्वेज
प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान मीडिया के सामने अंकित का एटीट्यूड और बेखौफ अंदाज किसी पेशेवर अपराधी जैसा था। पुलिस की गिरफ्त में होने के बावजूद उसके चेहरे पर पछतावे की कोई लकीर न होना किसी बड़े बैकअप या गहरी साजिश की ओर इशारा करता है।

संपत्ति का खेल
क्या सिर्फ कमीशन के लालच में एक विश्वासपात्र नौ साल पुराने रिश्तों का कत्ल कर सकता है? या फिर इस हत्याकांड के पीछे कोई सफेदपोश बड़ा खिलाड़ी है जिसके लिए अंकित सिर्फ एक मोहरा बना? मामला पूरी तरह सुनियोजित था। आरोपी ने आर्थिक लाभ के लिए हत्या की।

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