कोलकाता. पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने शुक्रवार को दावा किया कि राज्य में जारी विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) अभ्यास को लेकर फैली चिंता के कारण हर दिन तीन से चार लोग कथित रूप से आत्महत्या कर रहे हैं. सुभाष चंद्र बोस की जयंती के उपलक्ष्य में यहां रेड रोड पर एक कार्यक्रम को संबोधित करते हुए बनर्जी ने कहा कि निर्वाचन आयोग और केंद्र सरकार को इन मौतों की जिम्मेदारी लेनी चाहिए. उन्होंने कहा, “अब तक 110 से अधिक लोगों की मौत हो चुकी है। प्रतिदिन तीन से चार लोग एसआईआर की वजह से अत्यधिक चिंता के कारण आत्महत्या कर रहे हैं.” आगामी विधानसभा चुनाव से पहले राज्य में मतदाता सूचियों का एसआईआर अभ्यास जारी है. बनर्जी ने भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) पर पश्चिम बंगाल के खिलाफ साजिश रचने का भी आरोप लगाया और दावा किया कि महात्मा गांधी, रवींद्रनाथ टैगोर, नेताजी सुभाषचंद्र बोस और बी आर आंबेडकर जैसे देश के महान व्यक्तित्वों का अपमान किया जा रहा है.
एसआईआर को लेकर मानसिक तनाव ने 110 लोगों की जान ली: दो दिन पहले ही 22 जनवरी को ने दावा किया थाकि राज्य में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) को लेकर मानसिक तनाव और दहशत के कारण अब तक कम से कम 110 लोगों की मौत हो चुकी है. उन्होंने कोलकाता के 49वें अंतरराष्ट्रीय कोलकाता पुस्तक मेले का उद्घाटन करते हुए कहा कि बुजुर्ग सहित सैकड़ों लोगों को सुनवाई के लिए एसआईआर शिविरों में कतार में खड़ा होना पड़ रहा है और प्रतिदिन पांच-छह घंटे खुले में इंतजार करना पड़ता है.
मुख्यमंत्री ने कहा था, “तार्किक विसंगतियों के नाम पर वे (निर्वाचन आयोग) बंगालियों के उपनाम को लेकर सवाल पूछ रहे हैं, जो (उपनाम) वर्षों से ज्ञात और स्वीकृत हैं.” उन्होंने कहा, “मुझे ममता बनर्जी और ममता बंद्योपाध्याय, दोनों नाम से जाना जाता है. उसी तरह चटर्जी और चट्टोपाध्याय एक ही उपनाम हैं. ब्रिटिश शासन के दौरान ठाकुर को टैगोर नाम से भी जाना जाने लगा.” बनर्जी ने कहा कि अगर रवींद्रनाथ टैगोर जीवित होते, तो शायद उन्हें भी आज इस स्थिति का सामना करना पड़ता. उन्होंने दावा किया कि दो या दो से अधिक बच्चों वाले माता-पिता से उनकी उम्र में अंतराल के बारे में स्पष्टीकरण मांगा जा रहा है और बुजुर्ग लोगों से जन्म प्रमाण पत्र मांगे जा रहे हैं.
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