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“पहले अपने गिरेबान में झांकें”: अजित पवार के भ्रष्टाचार आरोपों पर BJP का करारा पलटवार, महाराष्ट्र की राजनीति में घमासान

महाराष्ट्र में महायुति की सहयोगी भाजपा और एनसीपी पिंपरी चिंचवड नगर निगम चुनाव में आमने-सामने हैं. एनसीपी प्रमुख अजित पवार द्वारा पिंपरी चिंचवड में भाजपा सरकार पर भ्रष्टाचार के गंभीर आरोप लगाने के बाद भाजपा प्रदेश अध्यक्ष रविंद्र चव्हाण ने उन्हें करारा जवाब दिया है. भाजपा प्रदेश अध्यक्ष रविंद्र चव्हाण ने पुणे में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस आयोजित कर कहा कि करोड़ रुपये के भ्रष्टाचार का आरोप लगा, लेकिन क्या यह साबित हुआ है?उन्होंने कहा कि अजित पवार का यह वक्तव्य चुनाव के मद्देनजर दिया गया है. ऐसे मुझे लगता है कि ने खुद के गिरेबान में झांककर देखना चाहिए.उन्होंने कहा कि उन्हें यह देखना चाहिए वो किस पार्टी के बारे में वो कह रहे हैं. पीएम नरेंद्र मोदी के नेतृत्ववाले पार्टी के बारे में कह रहे हैं. देवेंद्र फडणवीस के नेतृत्ववाली पार्टी के बारे में कह रहे हैं. सच कहूं तो आरोप-प्रत्यारोप कैसे किये जाने चाहिए. यह तय करना चाहिए. अगर हम आरोप लगाने गए तो उनको बड़ी मुश्किल होगी. इस बात की सावधानी उन्हें बरतनी चाहिए.

उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस के नेतृत्व में केंद्र में एनडीए सरकार और राज्य में महायुति की सरकार गतिशील सरकार का उदाहरण पेश कर रही है. कोरोना के कारण चुनाव स्थगित हुए थे. अब ये चुनाव हो रहे हैं. नरेंद्र मोदी सरकार और फडणवीस सरकार पिछले कई वर्षों से पुणे में इसी गतिशील ढंग से काम कर रही है. करोड़ों रुपये खर्च किए जा रहे हैं.

रविंद्र चव्हाण ने कहा कि अगर हम नगर निगम की स्थापना के समय से देखे गए सपने को साकार करना चाहते हैं, तो उस दिशा में कदम उठाए जाने चाहिए.

उन्होंने कहा कि पुणे नगर निगम में मेट्रो का प्रस्ताव पारित हो गया था, लेकिन महाविकास अघाड़ी की सरकार के रहते हुए मेट्रो शुरू नहीं हो सकी. उन्होंने आरोप लगाया कि वे मेट्रो शुरू करना ही नहीं चाहते थे, उन्होंने कुछ भी नहीं किया. मोदी सरकार के सत्ता में आने के बाद मेट्रो शुरू हुई और 33 किलोमीटर का मेट्रो नेटवर्क बन चुका है. आने वाले समय में मेट्रो का नेटवर्क पूरे पुणे शहर में फैलेगा.

संजय राउत ने भी बोला हमला

दूसरी ओर, शिवसेना सांसद शिव राउत ने भी अजित पवार के बयान पर हमला बोला. उन्होंने कहा कि यह सवाल पूरे महाराष्ट्र और देश के राजनेताओं को परेशान करता रहा है. प्रधानमंत्री मोदी ने भी यह सवाल उठाया था. बीजेपी के भोपाल सम्मेलन में भाषण देने के बाद आठ दिनों के भीतर वे सत्ता में आ गए. सिंचाई घोटाले का जवाब मुख्यमंत्री और मोदी ने दिया. आदर्श घोटाले पर श्वेत पत्र जारी किया गया. अशोक चव्हाण बीजेपी में चले गए.

उन्होंने कहा कि अजित पवार का अलग रास्ता अपनाने का इरादा साफ दिखता है. सत्ता पक्ष में लोग हंसी-मजाक कर रहे हैं. ऐसे बयानों का क्या मतलब निकाला जाए? पहले आप बीजेपी पर आरोप लगाते हैं. अजित पवार को बीजेपी का साथ छोड़कर मूल राष्ट्रवादी में वापस आना चाहिए.

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