मुंबई एयरपोर्ट पर 38 करोड़ का 29.37 किलो सोना जब्त:24 केन्याई महिलाएं गिरफ्तार, कपड़ों-बैग में छिपाकर ला रही थीं

मुंबई। मुंबई के छत्रपति शिवाजी महाराज अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर राजस्व खुफिया निदेशालय (DRI) ने एक बड़े अंतरराष्ट्रीय सोना तस्करी गिरोह का पर्दाफाश किया है। इस हाई-प्रोफाइल ऑपरेशन में 29.37 किलोग्राम सोना जब्त किया गया, जिसकी कीमत करीब 37.74 करोड़ रुपए बताई जा रही है। इस मामले में 24 केन्याई महिलाओं को गिरफ्तार किया गया है, जो सोने को कपड़ों, जूतों और बैग में छिपाकर भारत लाने की कोशिश कर रही थीं।

कैसे मिला इनपुट और कैसे चला ऑपरेशन?

DRI को पहले से खुफिया जानकारी मिली थी कि, केन्या के नैरोबी से कुछ महिला यात्री सोना लेकर मुंबई पहुंचने वाली हैं। इसी इनपुट के आधार पर 8 अप्रैल 2026 को मुंबई एयरपोर्ट पर एक विशेष ऑपरेशन चलाया गया, जिसे ‘ऑपरेशन धहाबू ब्लिट्ज’ नाम दिया गया। ‘धहाबू’ स्वाहिली भाषा का शब्द है, जिसका अर्थ ‘सोना’ होता है। इस ऑपरेशन के तहत एयरपोर्ट पर संदिग्ध यात्रियों की कड़ी निगरानी की गई।

संदिग्ध हरकतों से हुआ खुलासा

जब नैरोबी से आई फ्लाइट के यात्री ग्रीन चैनल की ओर बढ़े, तो कुछ यात्रियों ने अधिकारियों को देखकर रास्ता बदलने की कोशिश की। इससे शक गहराया और उन्हें रोककर पूछताछ की गई। एक यात्री फर्जी पासपोर्ट के साथ पहले ही पकड़ा गया। जब दो महिलाओं की तलाशी ली गई, तो उनके जूतों में छिपाकर रखे गए सोने के बार बरामद हुए। इसके बाद सभी संदिग्धों की गहन जांच की गई।

कितना सोना हुआ बरामद?

जांच के दौरान कुल 29.37 किलो सोना बरामद किया गया, जिसमें शामिल हैं-

  • 25.10 किलो सोने की सिल्लियां (Gold Bars)
  • 4.27 किलो सोने के आभूषण (Jewellery)

कुल कीमत: ₹37.74 करोड़ (लगभग)

कुछ यात्रियों ने सामान बेल्ट के पास काले टेप में लिपटे पाउच फेंकने की कोशिश भी की, जिनमें पिघला हुआ सोना मिला।

कपड़ों, जूतों और बैग में छिपाया गया सोना

तस्करों ने सोने को छिपाने के लिए बेहद चालाक और सुनियोजित तरीके अपनाए थे। उन्होंने सोने की सिल्लियों को जूतों के अंदर छिपाया, कपड़ों में चतुराई से पैक किया और बैग में गुप्त रूप से रखकर ले जाने की कोशिश की। इतना ही नहीं, कुछ मामलों में पिघले हुए सोने को पाउच में भरकर भी छिपाया गया। यह साफ तौर पर दर्शाता है कि, तस्करी का यह नेटवर्क पूरी तरह संगठित और प्रोफेशनल तरीके से काम कर रहा था।

ट्रेनिंग देकर बनाया गया ‘कैरियर नेटवर्क’

DRI की जांच में सामने आया है कि, इस पूरे नेटवर्क में शामिल महिलाओं को पहले से बाकायदा ट्रेनिंग दी गई थी। उन्हें सोना छिपाने और एयरपोर्ट की जांच से बचने के तरीके सिखाए गए थे। जांच एजेंसियों के अनुसार, यह गिरोह खुद सीधे तौर पर सोना नहीं लाता, बल्कि ‘कैरियर’ के जरिए तस्करी को अंजाम देता है। यानी साफ है कि, यह पूरा रैकेट एक संगठित अंतरराष्ट्रीय नेटवर्क का हिस्सा है, जो पैसों के लालच में लोगों का इस्तेमाल कर गैरकानूनी गतिविधियों को अंजाम देता है।

गिरफ्तारी और कोर्ट की कार्रवाई

इस मामले में सभी 24 महिलाओं को गिरफ्तार कर लिया गया है, जबकि एक अन्य आरोपी को फर्जी पासपोर्ट के मामले में पहले ही हिरासत में लिया जा चुका था। सभी आरोपियों को कोर्ट में पेश किया गया, जहां अदालत ने उन्हें ज्यूडिशियल कस्टडी में भेज दिया। अब जांच एजेंसी इन आरोपियों से गहन पूछताछ कर रही है, ताकि इस पूरे नेटवर्क के मास्टरमाइंड तक पहुंचा जा सके और तस्करी के इस संगठित रैकेट का पूरी तरह खुलासा हो सके।

देश की अर्थव्यवस्था पर असर

DRI अधिकारियों के अनुसार, इस तरह की सोना तस्करी देश की अर्थव्यवस्था को सीधा नुकसान पहुंचाती है, साथ ही गैरकानूनी गतिविधियों को बढ़ावा देती है और टैक्स चोरी का बड़ा कारण बनती है। यही वजह है कि ऐसे मामलों में सख्त कार्रवाई बेहद जरूरी मानी जाती है, ताकि इस तरह के संगठित अपराधों पर लगाम लगाई जा सके।

इस साल का सबसे बड़ा केस

यह कार्रवाई 2026 में मुंबई एयरपोर्ट पर पकड़े गए सबसे बड़े गोल्ड स्मगलिंग मामलों में से एक मानी जा रही है। लगभग 30 किलो सोना एक साथ पकड़ा जाना एजेंसियों के लिए बड़ी सफलता है।

पिछले कुछ बड़े मामले

10 फरवरी 2026 – अहमदाबाद एयरपोर्ट

एक व्यक्ति दुबई से सोना तस्करी कर भारत लाने की कोशिश कर रहा था, जिसे बेहद चालाक तरीके से अंडरवियर में छिपाकर रखा गया था। जांच के दौरान अधिकारियों ने उसे पकड़ लिया और उसके पास से करीब 96 लाख रुपये का सोना बरामद किया गया।

8 फरवरी – लखनऊ एयरपोर्ट

सऊदी अरब से आए सामान में छिपाकर लाया गया सोना बरामद किया गया, जिसकी कीमत करीब 2 करोड़ रुपये आंकी गई। जांच के दौरान पता चला कि इस सोने को तीन अलग-अलग पैकेट में छिपाकर लाया गया था, ताकि आसानी से जांच से बचा जा सके।

ये घटनाएं दिखाती हैं कि सोना तस्करी के तरीके लगातार बदल रहे हैं।

जांच जारी और खुलासों की उम्मीद

DRI अब इस पूरे नेटवर्क की गहराई से जांच कर रही है, जिसमें सरगनाओं की पहचान, इंटरनेशनल कनेक्शन और फंडिंग के साथ-साथ तस्करी के रूट का पता लगाया जा रहा है। अधिकारियों को उम्मीद है कि इस मामले की जांच के दौरान इस बड़े रैकेट से जुड़े कई अहम खुलासे हो सकते हैं, जिससे पूरे नेटवर्क का पर्दाफाश किया जा सकेगा।

कैसे काम करता है तस्करी नेटवर्क?

इस तरह की तस्करी में आमतौर पर विदेश से सस्ता सोना खरीदा जाता है और फिर उसे कैरियर के जरिए छोटे-छोटे हिस्सों में भारत भेजा जाता है। एयरपोर्ट पर जांच से बचने के लिए अलग-अलग तरीके अपनाए जाते हैं। इसके बाद भारत में इस सोने को बेचकर तस्कर भारी मुनाफा कमाते हैं।

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