कानपुर। कानपुर नगर निगम में सामने आए टेंडर घोटाले की जांच का दायरा लगातार बढ़ता जा रहा है। एसआईटी की प्रारंभिक जांच में नगर निगम के अधिकारियों और कर्मचारियों की भूमिका को लेकर कई अहम तथ्य सामने आए हैं। जांच में भ्रष्टाचार से जुड़े मामलों के साथ ही कुछ अधिकारियों और कर्मचारियों की आय से अधिक संपत्ति की जानकारी भी सामने आई है। इसके बाद उनकी चल-अचल संपत्तियों की विजिलेंस जांच कराने के निर्देश दिए गए हैं।
जांच के दौरान यह भी सामने आया कि नगर निगम के चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी विनोद कुमार के नाम दो सरकारी बंगलों का आवंटन है। बताया गया है कि इन बंगलों का आवंटन सामान्य तौर पर राजपत्रित अधिकारियों के लिए होता है। इनमें से एक बंगला नगर निगम के जोन-5 स्थित गोविंद नगर कार्यालय परिसर में बताया गया है, जहां विनोद कुमार अपने परिवार के साथ रह रहा है।
ठेकेदारों पर दबाव बनाने का आरोप
पुलिस कमिश्नर रघुवीर लाल के मुताबिक, एसआईटी की जांच में विनोद कुमार की भूमिका भी संदिग्ध पाई गई है। वह संयुक्त वाहन चालक कर्मचारी संघ का अध्यक्ष है और जांच में उसे कथित सिंडीकेट से जुड़ा सदस्य बताया गया है। आरोप है कि सफेदपोश लोगों की मदद से वह नगर निगम के ठेकेदारों पर दबाव बनाने और उन्हें धमकाने का काम करता था।
जांच टीम अब इस बात की भी पड़ताल कर रही है कि चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी के नाम सरकारी बंगलों का आवंटन किन परिस्थितियों में और किसके आदेश पर किया गया।
करोड़ों की मशीनें और खेल सामग्री भी जांच के घेरे में
एसआईटी की जांच में नगर निगम द्वारा करोड़ों रुपये की मशीनों की खरीद का मामला भी सामने आया है। इन मशीनों का इस्तेमाल सफाई, निर्माण और अन्य कार्यों में किया जाना था, लेकिन जांच अधिकारियों के मुताबिक कई मशीनों का अब तक उपयोग नहीं हुआ है।
इसी तरह खेल से संबंधित सामान की खरीद को लेकर भी सवाल उठे हैं। जांच टीम के सामने संबंधित अधिकारी खरीदे गए सामान को भौतिक रूप से प्रस्तुत नहीं कर सके। ऐसे में खरीद प्रक्रिया और भुगतान से जुड़े दस्तावेजों की भी जांच की जा रही है।
पार्षदों की भूमिका भी जांच के दायरे में
टेंडर घोटाले में पार्षद वेलफेयर एसोसिएशन से जुड़े कुछ पार्षदों की भूमिका की भी जांच की जा रही है। जांच में आरोप सामने आए हैं कि कुछ पार्षद कथित तौर पर अपने पसंदीदा ठेकेदारों को काम दिलाने के लिए दूसरे ठेकेदारों पर दबाव बनाते थे।
आरोप यह भी है कि कुछ ठेकेदारों को एससी-एसटी एक्ट के तहत मुकदमा दर्ज कराने की धमकी दी जाती थी। दबाव के चलते कुछ ठेकेदार काम छोड़ने या सरेंडर करने को मजबूर हुए। हालांकि, इन आरोपों की जांच अभी जारी है।
इन फर्मों के खिलाफ दर्ज हुई एफआईआर
टेंडर घोटाले से जुड़े मामले में कई फर्मों और उनके संचालकों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई है। इनमें मेसर्स तिरुपति ट्रेडर्स की प्रोपराइटर प्रार्थना शर्मा, मेसर्स पारसनाथ बिल्डर्स के प्रोपराइटर संदीप जैन, मेसर्स अजय इंटरप्राइजेज के प्रोपराइटर अजय कुमार बाजपेई, मेसर्स दिलीप वाजपेई के प्रोपराइटर दिलीप बाजपेई और मेसर्स कैला देवी कंस्ट्रक्शन के प्रोपराइटर गोविंद शर्मा शामिल हैं।
इन मामलों में नगर निगम के संबंधित अधिकारियों की ओर से शिकायतें दी गई थीं।
चार सदस्यीय एसआईटी कर रही जांच
मामले की जांच के लिए एडीसीपी सेंट्रल डॉ. अर्चना सिंह के नेतृत्व में चार सदस्यीय एसआईटी गठित की गई है। टीम में एडीसीपी के अलावा एसीपी स्वरूप नगर ज्योति श्री, फजलगंज इंस्पेक्टर धनंजय पांडेय और स्वरूप नगर इंस्पेक्टर देवेंद्र सिंह शामिल हैं।
एसआईटी अब टेंडर प्रक्रिया, सरकारी खरीद, अधिकारियों-कर्मचारियों की भूमिका, ठेकेदारों के साथ कथित गठजोड़ और संपत्तियों से जुड़े मामलों की कड़ियां जोड़ रही है। जांच आगे बढ़ने के साथ नगर निगम के कई अन्य अधिकारी और कर्मचारी भी जांच के दायरे में आ सकते हैं।
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