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आल्हा-ऊदल की वीरगाथा और कजली की गूंज से गूंजा महोबा कजली मेला महोत्सव-2026 का भव्य आगाज, हवेली दरवाजा से निकली ऐतिहासिक शोभायात्रा

 

महोबा। ऐतिहासिक नगरी महोबा शनिवार को वीरता, लोक संस्कृति और परंपराओं के रंग में रंगी नजर आई। ऐतिहासिक एवं परंपरागत कजली मेला महोत्सव-2026 का भव्य शुभारंभ हुआ। हवेली दरवाजा पर राज्य मंत्री, श्रम एवं सेवायोजन विभाग एवं जनपद के प्रभारी मंत्री मनोहर लाल (मन्नू कोरी) ने जनप्रतिनिधियों और अधिकारियों की मौजूदगी में फीता काटकर महोत्सव का विधिवत उद्घाटन किया। उद्घाटन के बाद निकली भव्य शोभायात्रा ने शहर में उत्सव का माहौल बना दिया।

आल्हा-ऊदल की झांकियां बनीं आकर्षण का केंद्र

शोभायात्रा में महोबा की गौरवशाली ऐतिहासिक विरासत की झलक देखने को मिली। पारंपरिक कजली और ढोला गायन के साथ वीर योद्धाओं आल्हा-ऊदल की झांकियां लोगों के आकर्षण का केंद्र रहीं। राजा परमाल, रानी लक्ष्मीबाई और आल्हा-ऊदल की सजीव एवं आकर्षक झांकियों ने बुंदेलखंड के शौर्य और इतिहास को जीवंत कर दिया। हाथी और घोड़ों ने शोभायात्रा की भव्यता में चार चांद लगा दिए।

वहीं राधा-कृष्ण की मनोहारी झांकी सहित विभिन्न संदेशपरक झांकियों ने लोगों को अपनी ओर आकर्षित किया। शोभायात्रा के मार्ग में जगह-जगह स्थानीय नागरिकों ने पुष्पवर्षा कर स्वागत किया। बच्चे, महिलाएं और बुजुर्ग बड़ी संख्या में शोभायात्रा को देखने के लिए सड़कों के किनारे मौजूद रहे।

हवेली दरवाजा से कीरत सागर तक उमड़ा जनसैलाब

कजली मेला की शोभायात्रा हवेली दरवाजा से शुरू होकर नगरपालिका चौक, आल्हा चौक, ऊदल चौक और राठ चुंगी होते हुए कीरत सागर पहुंची, जहां इसका समापन हुआ। पूरे मार्ग में उत्सव जैसा माहौल बना रहा।

उद्घाटन कार्यक्रम में सदस्य विधान परिषद जितेंद्र सिंह सेंगर, सदर विधायक राकेश गोस्वामी, जिला पंचायत अध्यक्ष जे.पी. अनुरागी, भाजपा जिलाध्यक्ष मोहनलाल कुशवाहा, नगर पालिका अध्यक्ष डॉ. संतोष चौरसिया, जिलाधिकारी गजल भारद्वाज, पुलिस अधीक्षक शशांक सिंह, अपर जिलाधिकारी इंद्र नंदन सिंह, अपर पुलिस अधीक्षक वंदना सिंह, मुख्य विकास अधिकारी बलराम कुमार सहित अन्य जनप्रतिनिधि, अधिकारी और गणमान्य नागरिक मौजूद रहे।

लोक संस्कृति और परंपरा का दिखा संगम

कजली मेला महोत्सव के शुभारंभ के साथ ही पूरे जनपद में उत्साह और उल्लास का माहौल देखने को मिला। बुंदेलखंड की लोक परंपराओं, वीरगाथाओं और सांस्कृतिक विरासत को समेटे इस आयोजन ने महोबा के इतिहास को नई पीढ़ी के सामने जीवंत रूप में प्रस्तुत किया। कजली की पारंपरिक धुनों और आल्हा-ऊदल की वीरगाथाओं ने माहौल को पूरी तरह बुंदेली रंग में रंग दिया।

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