बेलग्रेड। सर्बिया की राजनीति में छात्र संगठनों की सक्रियता ने बड़ा बदलाव ला दिया है। चुनाव में छात्र गठबंधन ‘स्टूडेंट लिस्ट’ ने शानदार प्रदर्शन करते हुए सत्ताधारी दल को पीछे छोड़ दिया। रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के करीबी माने जाने वाले अलेक्जेंडर वुचिच की पार्टी को चुनाव में झटका लगा है। शुरुआती आंकड़ों के अनुसार, छात्र गठबंधन को संसद में बहुमत मिलने की संभावना जताई गई है। हालांकि, अंतिम आधिकारिक नतीजों की पुष्टि के बाद ही चुनाव की स्थिति पूरी तरह स्पष्ट होगी।
दो साल के आंदोलन के बाद छात्रों को मिली सफलता
सर्बिया में छात्र संगठनों का आंदोलन पिछले करीब दो वर्षों से सरकार के खिलाफ चल रहा था। प्रदर्शनकारियों ने भ्रष्टाचार, सरकारी कामकाज में कथित अनियमितताओं और सत्ता के दुरुपयोग को लेकर सवाल उठाए थे। नवंबर 2024 में नोवी साद शहर के रेलवे स्टेशन पर छतरी गिरने से 16 लोगों की मौत के बाद यह आंदोलन तेज हो गया था।
हादसे के बाद छात्रों ने निर्माण कार्यों की गुणवत्ता, जिम्मेदार अधिकारियों की जवाबदेही और भ्रष्टाचार के आरोपों की निष्पक्ष जांच की मांग उठाई। धीरे-धीरे आंदोलन को व्यापक जनसमर्थन मिला और यह सरकार के खिलाफ एक बड़े राजनीतिक अभियान में बदल गया।
वुचिच की पार्टी को नुकसान, छात्र गठबंधन आगे
चुनाव के शुरुआती आंकड़ों के मुताबिक, 250 सदस्यीय संसद में छात्र गठबंधन को करीब 135 सीटें मिलने का अनुमान जताया गया, जबकि अलेक्जेंडर वुचिच की पार्टी को लगभग 105 सीटें मिलने की बात सामने आई। छात्र गठबंधन को करीब 22 लाख वोट मिलने का अनुमान है, जबकि वुचिच की पार्टी को लगभग 17.2 लाख वोट मिले।
चुनाव में लगभग 70 प्रतिशत मतदान होने की जानकारी दी गई। शुरुआती परिणामों के बाद राजधानी बेलग्रेड समेत कई शहरों में लोगों ने जश्न मनाया। सड़कों पर उतरे समर्थकों ने सर्बिया के झंडे लहराए और पटाखे फोड़कर जीत का उत्सव मनाया। जश्न में युवाओं की बड़ी भागीदारी देखने को मिली।
राष्ट्रपति पद छोड़कर प्रधानमंत्री बनना चाहते थे वुचिच
अलेक्जेंडर वुचिच वर्ष 2014 से 2017 तक सर्बिया के प्रधानमंत्री रहे थे। इसके बाद उन्होंने राष्ट्रपति पद संभाला और 2022 में दूसरी बार राष्ट्रपति चुने गए। संवैधानिक कार्यकाल की सीमा के कारण वह तीसरी बार राष्ट्रपति नहीं बन सकते थे।
इसी राजनीतिक परिस्थिति में वुचिच ने सितंबर 2026 में राष्ट्रपति पद छोड़ने के बाद संसदीय चुनाव के जरिए दोबारा सरकार की कमान संभालने की कोशिश की। उनकी पार्टी सर्बियन प्रोग्रेसिव पार्टी (SNS) ने उन्हें प्रधानमंत्री पद का उम्मीदवार बनाया था। लेकिन चुनाव में पार्टी को नुकसान होने से उनकी राजनीतिक रणनीति को बड़ा झटका लगा है।
भ्रष्टाचार और जवाबदेही बने चुनाव के अहम मुद्दे
छात्र आंदोलन की प्रमुख मांगों में भ्रष्टाचार के आरोपों की जांच, सरकारी संस्थाओं की जवाबदेही और कानून के अनुसार शासन व्यवस्था चलाना शामिल रहा। प्रदर्शनकारियों का आरोप था कि सरकार के कामकाज में पारदर्शिता की कमी है और सत्ता का जरूरत से ज्यादा केंद्रीकरण हो रहा है।
वुचिच के विरोधियों ने उनके शासन के तरीके पर भी सवाल उठाए। हालांकि, इन राजनीतिक आरोपों और चुनावी नतीजों के बीच अंतिम निष्कर्ष आधिकारिक तथ्यों तथा आगे की जांच के आधार पर ही निकाला जाना चाहिए।
अब सरकार गठन की चुनौती
चुनाव में बढ़त के बाद छात्र गठबंधन के सामने सरकार बनाने और अपने वादों को पूरा करने की चुनौती होगी। भ्रष्टाचार पर कार्रवाई, प्रशासनिक सुधार और लोकतांत्रिक संस्थाओं को मजबूत करना उसके लिए प्रमुख प्राथमिकताएं हो सकती हैं।
यदि गठबंधन को अंतिम नतीजों में स्पष्ट बहुमत मिलता है, तो वह अपने दम पर सरकार बनाने की स्थिति में आ सकता है। हालांकि, सरकार गठन की प्रक्रिया आधिकारिक परिणामों और संवैधानिक प्रक्रियाओं के पूरा होने के बाद ही स्पष्ट होगी।
रूस, यूरोपीय संघ और कोसोवो पर रहेगी नजर
सर्बिया की विदेश नीति भी नई सरकार के लिए अहम विषय रहेगी। रूस के साथ उसके पारंपरिक संबंध, यूरोपीय संघ में शामिल होने की प्रक्रिया और कोसोवो के साथ लंबे समय से चला आ रहा विवाद भविष्य की नीतियों को प्रभावित कर सकते हैं।
कोसोवो ने 2008 में सर्बिया से स्वतंत्रता की घोषणा की थी, लेकिन सर्बिया उसे स्वतंत्र देश के रूप में मान्यता नहीं देता। ऐसे में नई सरकार के सामने घरेलू राजनीतिक बदलावों के साथ विदेश नीति में संतुलन बनाए रखने की चुनौती भी होगी।
निष्कर्ष: सर्बिया का यह चुनाव छात्र आंदोलन की राजनीतिक ताकत और भ्रष्टाचार के खिलाफ उठी आवाजों का अहम उदाहरण बनकर सामने आया है। अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि चुनावी सफलता को छात्र गठबंधन किस तरह ठोस प्रशासनिक सुधारों में बदलता है और देश की राजनीति को किस दिशा में ले जाता है।
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