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ब्राजील में लूला दा सिल्वा की बड़ी जीत, चौथी बार राष्ट्रपति बनने की राह साफ

ब्राजील में राष्ट्रपति चुनाव को लेकर बड़ा राजनीतिक घटनाक्रम सामने आया है। लुइज इनासियो लूला दा सिल्वा ने चुनाव में जीत हासिल कर एक बार फिर सत्ता में वापसी की है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प के समर्थक फ्लावियो बोल्सोनारो के खिलाफ उनकी जीत को ब्राजील की राजनीति के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है। इससे पहले 2022 के चुनाव में भी लूला ने फ्लावियो के पिता और पूर्व राष्ट्रपति जायर बोल्सोनारो को हराया था।

पहले चरण में पिछड़े, दूसरे दौर में बदली तस्वीर

चुनाव के पहले चरण में लूला दा सिल्वा को फ्लावियो बोल्सोनारो से कम वोट मिले थे। शुरुआती आंकड़ों के अनुसार, फ्लावियो को करीब 47 प्रतिशत, जबकि लूला को 45.16 प्रतिशत वोट मिले थे। इसके बाद दूसरे चरण में दोनों उम्मीदवारों के बीच सीधा मुकाबला हुआ, जिसमें लूला ने बढ़त बनाकर जीत दर्ज की।

ब्राजील में राष्ट्रपति चुनाव दो चरणों में कराया जाता है। पहले चरण में किसी उम्मीदवार को 50 प्रतिशत से अधिक वोट नहीं मिलने पर सबसे ज्यादा वोट पाने वाले दो उम्मीदवारों के बीच दूसरे चरण में मुकाबला होता है। दूसरे चरण में अधिक वोट हासिल करने वाला उम्मीदवार विजेता बनता है।

उतार-चढ़ाव से भरा रहा लूला का राजनीतिक सफर

लूला दा सिल्वा इससे पहले 2003 से 2010 तक लगातार दो कार्यकाल में ब्राजील के राष्ट्रपति रह चुके हैं। इसके बाद वर्ष 2022 में उन्होंने एक बार फिर चुनाव जीतकर सत्ता में वापसी की थी। उनके राजनीतिक जीवन में कई चुनौतियां भी आईं। वर्ष 2018 में भ्रष्टाचार से जुड़े मामले में उन्हें जेल जाना पड़ा था, लेकिन बाद में उनकी सजा रद्द कर दी गई और वह दोबारा सक्रिय राजनीति में लौटे।

उनकी ताजा जीत को उनके राजनीतिक अनुभव और समर्थक वर्ग के बीच बनी पकड़ के लिहाज से अहम माना जा रहा है।

गरीबों और मजदूरों को राहत देने पर जोर

चुनाव प्रचार के दौरान लूला ने गरीब परिवारों की आर्थिक स्थिति सुधारने, रोजगार के अवसर बढ़ाने और मजदूरों को राहत देने जैसे मुद्दों को प्रमुखता दी। उनकी योजनाओं में सामाजिक सहायता बढ़ाने, सार्वजनिक परिवहन को अधिक सुलभ बनाने और परिवारों पर आर्थिक बोझ कम करने जैसे प्रस्ताव शामिल रहे।

हालांकि, इन वादों को लागू करने के लिए सरकार को वित्तीय संसाधनों और संसद की मंजूरी की जरूरत होगी। इसलिए नए कार्यकाल में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि सरकार अपनी सामाजिक कल्याण योजनाओं को किस तरह आगे बढ़ाती है।

संसद में विरोधियों से मिल सकती है चुनौती

राष्ट्रपति चुनाव में जीत के बावजूद लूला के सामने संसद में राजनीतिक चुनौतियां बनी रह सकती हैं। ब्राजील की संसद में दक्षिणपंथी दलों का प्रभाव सरकार के फैसलों को प्रभावित कर सकता है। बजट, सरकारी खर्च, आर्थिक सुधारों और गरीब परिवारों को दी जाने वाली सहायता जैसे मुद्दों पर सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच मतभेद उभर सकते हैं।

सरकार को अपने प्रस्तावों को पारित कराने के लिए अन्य राजनीतिक दलों का समर्थन जुटाना पड़ सकता है। ऐसे में गठबंधन और राजनीतिक सहमति की भूमिका महत्वपूर्ण होगी।

कर्ज और महंगाई पर नियंत्रण बड़ी चुनौती

ब्राजील की अर्थव्यवस्था के सामने बढ़ता सरकारी कर्ज, ऊंची ब्याज दरें और आम लोगों पर आर्थिक दबाव जैसी चुनौतियां हैं। लूला सरकार के लिए सामाजिक योजनाओं पर खर्च बढ़ाने के साथ-साथ सरकारी वित्तीय स्थिति को संतुलित रखना भी जरूरी होगा।

यदि सरकार रोजगार बढ़ाने, महंगाई पर नियंत्रण रखने और गरीब परिवारों की आय में सुधार करने में सफल रहती है, तो इसका असर आम नागरिकों के जीवन पर पड़ सकता है। दूसरी ओर, आर्थिक दबाव बढ़ने और संसद में विरोध के कारण चुनावी वादों को पूरा करना कठिन भी हो सकता है।

भारत के लिए क्यों अहम है ब्राजील की राजनीति?

ब्राजील और भारत के बीच व्यापार, कृषि, ऊर्जा, जलवायु परिवर्तन तथा बहुपक्षीय सहयोग जैसे क्षेत्रों में साझेदारी महत्वपूर्ण है। ब्राजील की नई सरकार की नीतियों का असर दोनों देशों के आर्थिक और कूटनीतिक संबंधों पर पड़ सकता है।

भारत और ब्राजील ब्रिक्स जैसे अंतरराष्ट्रीय मंचों पर भी सहयोग करते हैं। ऐसे में लूला सरकार की व्यापार नीति, वैश्विक मुद्दों पर रुख और विकासशील देशों के बीच सहयोग को लेकर अपनाई जाने वाली रणनीति भारत के लिए महत्वपूर्ण बनी रहेगी।

कुल मिलाकर, लूला दा सिल्वा की जीत उनके राजनीतिक भविष्य के साथ-साथ ब्राजील की आर्थिक दिशा और अंतरराष्ट्रीय संबंधों के लिहाज से भी महत्वपूर्ण है। अब सबकी नजर इस बात पर रहेगी कि नई सरकार जनता से किए गए वादों को कितनी प्रभावी ढंग से पूरा कर पाती है।

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