तिराना। अल्बानिया में प्रधानमंत्री एदी रामा की सरकार के खिलाफ छात्रों और युवाओं का विरोध प्रदर्शन तेज हो गया है। राजधानी तिराना में रविवार को प्रदर्शनकारियों ने प्रधानमंत्री कार्यालय के बाहर रखी उन कुर्सियों में आग लगा दी, जिन्हें सरकार ने बातचीत के प्रस्ताव के तौर पर रखा था। इन कुर्सियों पर ‘डायलॉग’ यानी संवाद का संदेश लिखा गया था। प्रदर्शनकारियों ने इस पहल को खारिज करते हुए कुर्सियों पर ‘इस्तीफा’ लिखकर अपना विरोध जताया।
छात्र पिछले 13 दिनों से सरकार के खिलाफ प्रदर्शन कर रहे हैं। उनकी प्रमुख मांगों में शिक्षा व्यवस्था में सुधार, पढ़ाई का खर्च कम करना, युवाओं के लिए रोजगार के अवसर बढ़ाना और भ्रष्टाचार के आरोपों की निष्पक्ष जांच शामिल है। प्रदर्शनकारी प्रधानमंत्री एदी रामा से इस्तीफे की भी मांग कर रहे हैं।
शिक्षा मंत्रालय के बाहर प्रदर्शन, PM ऑफिस तक पहुंची भीड़
रविवार को प्रदर्शनकारी सबसे पहले शिक्षा मंत्रालय के बाहर एकत्र हुए। यहां उन्होंने सरकार के खिलाफ नारेबाजी की और कुछ प्रदर्शनकारियों ने इमारत पर पत्थर भी फेंके। इसके बाद भीड़ प्रधानमंत्री कार्यालय की ओर बढ़ गई, जहां बातचीत के लिए रखी गई कुर्सियों को आग के हवाले कर दिया गया।
प्रधानमंत्री एदी रामा ने 20 अक्टूबर को इन कुर्सियों के जरिए छात्रों को बातचीत के लिए आमंत्रित करने का प्रयास किया था। हालांकि, प्रदर्शनकारियों ने सरकार की इस पहल पर भरोसा नहीं जताया और अपने आंदोलन को जारी रखा।
भ्रष्टाचार और बेरोजगारी भी आंदोलन की बड़ी वजह
छात्रों का आंदोलन अब केवल शिक्षा से जुड़े मुद्दों तक सीमित नहीं है। इसमें भ्रष्टाचार के आरोप, युवाओं के भविष्य और सरकार की जवाबदेही जैसे विषय भी शामिल हो गए हैं। प्रदर्शनकारी चाहते हैं कि सरकारी संस्थानों में पारदर्शिता बढ़ाई जाए और भ्रष्टाचार से जुड़े आरोपों की जांच की जाए।
युवाओं की प्रमुख मांगें हैं कि विश्वविद्यालयों में बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएं, शिक्षा का आर्थिक बोझ कम हो और पढ़ाई पूरी करने के बाद रोजगार के पर्याप्त अवसर मिलें।
लग्जरी रिसॉर्ट परियोजना को लेकर भी नाराजगी
अल्बानिया में सरकार के खिलाफ असंतोष की एक अन्य वजह अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प के दामाद जेरेड कुशनर से जुड़ी प्रस्तावित लग्जरी पर्यटन परियोजना भी है। इस परियोजना के तहत तटीय क्षेत्रों में होटल, विला, अपार्टमेंट और नौकाओं के लिए बंदरगाह जैसी सुविधाएं विकसित करने की योजना बताई गई है।
पर्यावरण संगठनों ने आशंका जताई है कि बड़े पैमाने पर निर्माण से समुद्र तटों, आर्द्रभूमि और वन्यजीवों के प्राकृतिक आवास को नुकसान पहुंच सकता है। संबंधित क्षेत्रों में प्रवासी पक्षियों, समुद्री कछुओं और अन्य वन्यजीवों की मौजूदगी को लेकर भी चिंता जताई जा रही है।
इस मुद्दे ने सरकार की विकास नीतियों और पर्यावरण संरक्षण को लेकर बहस को और तेज कर दिया है।
हिंसा और तोड़फोड़ रोकने के लिए नए कानूनी कदम
प्रधानमंत्री एदी रामा ने प्रदर्शन के दौरान हुई हिंसा और संपत्ति को नुकसान पहुंचाने की घटनाओं के बाद नए कानूनी उपायों की घोषणा की है। प्रस्तावित व्यवस्था के तहत हिंसा से प्रभावित कारोबारियों को मुआवजा देने और नुकसान के लिए जिम्मेदार लोगों से भरपाई कराने की बात कही गई है।
घोषित प्रस्तावों के अनुसार, छोटे कारोबारियों को नुकसान का पूरा मुआवजा और बड़े कारोबारियों को 70 प्रतिशत तक मुआवजा दिया जा सकता है। इसके साथ ही सार्वजनिक या निजी संपत्ति को नुकसान पहुंचाने वालों से उसकी भरपाई कराने का प्रावधान भी बताया गया है।
प्रस्ताव में यह भी कहा गया है कि हिंसा के दौरान मौके पर मौजूद रहने और संपत्ति को नुकसान पहुंचाने वाली गतिविधियों से जुड़े लोगों पर 5 लाख अल्बानियाई लेक तक का जुर्माना लगाया जा सकता है। नाबालिगों के मामले में उनके माता-पिता की जिम्मेदारी तय करने की बात भी शामिल है। हालांकि, पत्रकारों, डॉक्टरों, ड्यूटी पर तैनात सरकारी कर्मचारियों और वहां से गुजर रहे लोगों को छूट देने का उल्लेख किया गया है।
सरकार और प्रदर्शनकारियों के बीच बढ़ा टकराव
अल्बानिया में जारी आंदोलन ने सरकार के सामने शिक्षा, रोजगार, भ्रष्टाचार और पर्यावरण संरक्षण जैसे कई मुद्दों पर जवाब देने की चुनौती खड़ी कर दी है। प्रधानमंत्री की ओर से बातचीत का प्रस्ताव दिए जाने के बावजूद प्रदर्शनकारियों का आक्रोश कम होता नहीं दिख रहा है।
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