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एथेनॉल उत्पादन के लिए आवंटित सरकारी चावल में हेराफेरी का मामला, कलेक्टर ने एफसीआई से मांगी विस्तृत जांच

बालाघाट। एथेनॉल उत्पादन के लिए आवंटित सरकारी चावल की कथित हेराफेरी का मामला सामने आने के बाद जिला प्रशासन ने सख्त रुख अपनाया है। मामले की गंभीरता को देखते हुए कलेक्टर मृणाल मीणा ने भारतीय खाद्य निगम (एफसीआई) भोपाल के क्षेत्रीय महाप्रबंधक को पत्र भेजकर पूरे प्रकरण की विस्तृत जांच कराने का अनुरोध किया है। इसके साथ ही उन्होंने एथेनॉल नीति के तहत एफसीआई के अन्य गोदामों से जारी किए जा रहे सरकारी चावल का भी भौतिक सत्यापन कराने के निर्देश दिए हैं, ताकि किसी भी प्रकार की अनियमितता या गड़बड़ी का समय रहते पता लगाया जा सके।

प्रशासनिक सूत्रों के अनुसार, एथेनॉल उत्पादन के लिए निर्धारित सरकारी चावल के आवंटन और उसके उपयोग को लेकर कुछ गंभीर अनियमितताओं की जानकारी सामने आई थी। प्रारंभिक स्तर पर मिले संकेतों के बाद जिला प्रशासन ने मामले को गंभीरता से लिया और विस्तृत जांच की प्रक्रिया शुरू कर दी। कलेक्टर ने स्पष्ट किया कि सरकारी योजनाओं और नीतियों के क्रियान्वयन में किसी भी प्रकार की लापरवाही या हेराफेरी बर्दाश्त नहीं की जाएगी।

कलेक्टर मृणाल मीणा द्वारा एफसीआई भोपाल के क्षेत्रीय महाप्रबंधक को भेजे गए पत्र में पूरे प्रकरण की निष्पक्ष और विस्तृत जांच कराने का अनुरोध किया गया है। पत्र में यह भी कहा गया है कि संबंधित गोदामों से एथेनॉल नीति के तहत जारी किए गए चावल के रिकॉर्ड, भंडारण, परिवहन तथा वितरण प्रक्रिया की गहन जांच की जाए, ताकि वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सके।

प्रशासन ने केवल संबंधित प्रकरण तक जांच सीमित नहीं रखी है, बल्कि एहतियात के तौर पर एफसीआई के अन्य गोदामों से एथेनॉल उत्पादन के लिए जारी किए जा रहे चावल का भी भौतिक सत्यापन कराने का निर्णय लिया है। इसके तहत उपलब्ध स्टॉक, वितरण अभिलेख, परिवहन दस्तावेज और वास्तविक भंडारण की स्थिति का मिलान किया जाएगा। यदि जांच के दौरान कहीं भी रिकॉर्ड और वास्तविक स्टॉक में अंतर पाया जाता है तो संबंधित अधिकारियों और कर्मचारियों की जिम्मेदारी तय की जाएगी।

एथेनॉल नीति के तहत केंद्र और राज्य सरकारें पेट्रोल में एथेनॉल मिश्रण बढ़ाने के उद्देश्य से विभिन्न स्रोतों से एथेनॉल उत्पादन को प्रोत्साहित कर रही हैं। इसी नीति के अंतर्गत कुछ परिस्थितियों में सरकारी चावल का आवंटन एथेनॉल निर्माण के लिए किया जाता है। ऐसे में इस चावल का उपयोग केवल निर्धारित उद्देश्य के लिए होना आवश्यक है। यदि इसके आवंटन, परिवहन या उपयोग में किसी प्रकार की अनियमितता होती है तो इससे न केवल सरकारी नीति प्रभावित होती है, बल्कि सार्वजनिक संसाधनों के दुरुपयोग की आशंका भी बढ़ जाती है।

खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति व्यवस्था से जुड़े अधिकारियों का कहना है कि सरकारी खाद्यान्न के आवंटन और उपयोग की पूरी प्रक्रिया निर्धारित नियमों के तहत संचालित होती है। प्रत्येक खेप का रिकॉर्ड रखा जाता है और उसके परिवहन से लेकर उपयोग तक निगरानी की व्यवस्था होती है। ऐसे में यदि कहीं हेराफेरी की शिकायत सामने आती है तो उसकी निष्पक्ष जांच कर दोषियों के विरुद्ध नियमानुसार कार्रवाई की जाती है।

जिला प्रशासन का कहना है कि जांच का उद्देश्य केवल किसी एक घटना की पड़ताल करना नहीं, बल्कि पूरी व्यवस्था की पारदर्शिता सुनिश्चित करना है। भौतिक सत्यापन के दौरान गोदामों में उपलब्ध स्टॉक का रिकॉर्ड से मिलान किया जाएगा तथा आवश्यकता पड़ने पर संबंधित अधिकारियों, कर्मचारियों और एजेंसियों से भी पूछताछ की जाएगी। जांच रिपोर्ट के आधार पर आगे की कार्रवाई तय होगी।

प्रशासनिक विशेषज्ञों का मानना है कि सार्वजनिक वितरण प्रणाली और सरकारी खाद्यान्न से जुड़ी योजनाओं में पारदर्शिता बनाए रखना अत्यंत आवश्यक है। एथेनॉल जैसी राष्ट्रीय महत्व की नीति के सफल क्रियान्वयन के लिए यह भी जरूरी है कि आवंटित संसाधनों का उपयोग केवल निर्धारित उद्देश्य के लिए ही किया जाए। ऐसे मामलों में समय पर जांच और जिम्मेदारी तय होने से भविष्य में अनियमितताओं पर प्रभावी अंकुश लगाया जा सकता है।

फिलहाल पूरे मामले की जांच प्रक्रिया शुरू कर दी गई है और जिला प्रशासन एफसीआई से विस्तृत रिपोर्ट का इंतजार कर रहा है। जांच पूरी होने के बाद यदि किसी स्तर पर गड़बड़ी या हेराफेरी की पुष्टि होती है तो संबंधित व्यक्तियों के विरुद्ध नियमानुसार विभागीय एवं कानूनी कार्रवाई की जाएगी। वहीं अन्य गोदामों के भौतिक सत्यापन से यह भी स्पष्ट हो सकेगा कि एथेनॉल नीति के अंतर्गत जारी किए जा रहे सरकारी चावल की आपूर्ति और उपयोग पूरी तरह नियमों के अनुरूप हो रहा है या नहीं।

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