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परिवहन क्षेत्र का भविष्य हाइड्रोजन, देश के 10 मार्गों पर शुरू हुआ ट्रायल: नितिन गडकरी

गांधीनगर। भारत में हरित ऊर्जा आधारित परिवहन व्यवस्था को बढ़ावा देने की दिशा में केंद्र सरकार ने एक बड़ा कदम उठाया है। केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने कहा कि आने वाले समय में परिवहन उद्योग का भविष्य हाइड्रोजन ईंधन पर आधारित होगा। इसी लक्ष्य को ध्यान में रखते हुए सरकार ने देश के 10 प्रमुख मार्गों पर हाइड्रोजन ईंधन से चलने वाले वाहनों का पायलट ट्रायल शुरू कर दिया है। उन्होंने विश्वास जताया कि भारत न केवल स्वच्छ ईंधन के क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनेगा, बल्कि दुनिया का नेतृत्व भी करेगा।

गांधीनगर में आयोजित ‘प्रवास 5.0’ और ‘भारत प्रवास अवार्ड्स’ कार्यक्रम को संबोधित करते हुए गडकरी ने कहा कि हाइड्रोजन भविष्य का ईंधन है और सरकार इसके व्यापक उपयोग के लिए लगातार प्रयास कर रही है। उन्होंने बताया कि सड़क परिवहन मंत्रालय 10 प्रमुख मार्गों पर हाइड्रोजन आधारित परिवहन प्रणाली का परीक्षण कर रहा है, ताकि भविष्य में इसे बड़े स्तर पर लागू किया जा सके।

केंद्रीय मंत्री ने कहा कि देश में ऑटोमोबाइल उद्योग ने वैकल्पिक ईंधन और बायोफ्यूल के क्षेत्र में उल्लेखनीय प्रगति की है। भारत की तकनीकी क्षमता, कम लागत और नवाचार की ताकत उसे इस क्षेत्र में वैश्विक नेतृत्व दिला सकती है। उन्होंने वाहन निर्माताओं से विश्वस्तरीय तकनीक अपनाते हुए यात्रियों को अधिक सुरक्षित, आरामदायक और किफायती परिवहन उपलब्ध कराने का आह्वान किया।

गडकरी ने बताया कि जिन 10 मार्गों पर हाइड्रोजन ट्रायल चल रहा है, उनमें ग्रेटर नोएडा–दिल्ली–आगरा, भुवनेश्वर–कोणार्क–पुरी, अहमदाबाद–वडोदरा–सूरत, साहिबाबाद–फरीदाबाद–दिल्ली, पुणे–मुंबई, जमशेदपुर–कलिंगानगर, तिरुवनंतपुरम–कोच्चि, कोच्चि–एडापल्ली, जामनगर–अहमदाबाद और राष्ट्रीय राजमार्ग-16 पर विशाखापट्टनम–बय्यावरम मार्ग शामिल हैं। इन मार्गों का चयन विभिन्न भौगोलिक और यातायात परिस्थितियों को ध्यान में रखकर किया गया है, ताकि तकनीक की व्यवहारिकता का व्यापक परीक्षण किया जा सके।

उन्होंने कहा कि हाइड्रोजन ईंधन पूरी तरह स्वच्छ ऊर्जा का विकल्प है। इसके उपयोग से कार्बन उत्सर्जन में भारी कमी आएगी, प्रदूषण घटेगा और आयातित पेट्रोलियम उत्पादों पर देश की निर्भरता भी कम होगी। इससे ऊर्जा सुरक्षा मजबूत होगी और पर्यावरण संरक्षण को भी नई दिशा मिलेगी। सरकार का लक्ष्य है कि भविष्य में सार्वजनिक परिवहन, माल परिवहन और अन्य व्यावसायिक वाहनों में हाइड्रोजन तकनीक का अधिकाधिक उपयोग हो।

गडकरी ने सड़क सुरक्षा को भी सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता बताया। उन्होंने कहा कि भारत में हर वर्ष लगभग पांच लाख सड़क दुर्घटनाएं होती हैं, जिनमें करीब 1.8 लाख लोगों की जान चली जाती है। इनमें लगभग 66 प्रतिशत मृतक 18 से 36 वर्ष आयु वर्ग के युवा होते हैं। उन्होंने कहा कि सड़क दुर्घटनाओं के कारण देश को सकल घरेलू उत्पाद (GDP) का लगभग तीन प्रतिशत आर्थिक नुकसान भी उठाना पड़ता है। ऐसे में सुरक्षित परिवहन व्यवस्था विकसित करना समय की सबसे बड़ी आवश्यकता है।

उन्होंने कहा कि भारतीय ऑटोमोबाइल उद्योग ने सुरक्षा और तकनीक के क्षेत्र में उल्लेखनीय सुधार किए हैं। यही कारण है कि भारत में निर्मित दोपहिया वाहनों का बड़ा हिस्सा अब विदेशों में भी निर्यात हो रहा है। सरकार चाहती है कि भारतीय वाहन उद्योग गुणवत्ता, सुरक्षा और पर्यावरण संरक्षण के मानकों पर विश्व में अग्रणी बने।

अपने संबोधन में केंद्रीय मंत्री ने देश के ऑटोमोबाइल उद्योग की तेज प्रगति का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि जब उन्होंने मंत्रालय का कार्यभार संभाला था, तब भारतीय ऑटोमोबाइल उद्योग का आकार लगभग 14 लाख करोड़ रुपये था, जो अब बढ़कर लगभग 22 लाख करोड़ रुपये हो गया है। भारत अब दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा ऑटोमोबाइल बाजार बन चुका है और सरकार का लक्ष्य इसे प्रथम स्थान तक पहुंचाना है। उन्होंने कहा कि यह उद्योग केंद्र और राज्य सरकारों के लिए सबसे अधिक राजस्व देने वाले क्षेत्रों में शामिल है तथा लगभग 4.5 करोड़ लोगों को प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रोजगार उपलब्ध करा रहा है।

गडकरी ने बस निर्माण क्षमता बढ़ाने की आवश्यकता पर भी जोर दिया। उन्होंने कहा कि देश को हर वर्ष लगभग तीन लाख नई बसों की जरूरत है, जबकि वर्तमान में घरेलू निर्माता केवल 70 से 80 हजार बसों का ही उत्पादन कर पा रहे हैं। यदि उत्पादन क्षमता बढ़ाई जाए तो सार्वजनिक परिवहन व्यवस्था को और अधिक आधुनिक, सुरक्षित और पर्यावरण अनुकूल बनाया जा सकता है।

विशेषज्ञों का मानना है कि हाइड्रोजन आधारित परिवहन प्रणाली भारत के ऊर्जा क्षेत्र में एक नई क्रांति ला सकती है। यदि पायलट परियोजनाएं सफल रहती हैं तो आने वाले वर्षों में हाइड्रोजन से चलने वाली बसें, ट्रक और अन्य भारी वाहन देश की सड़कों पर सामान्य रूप से दिखाई दे सकते हैं। इससे प्रदूषण में कमी आने के साथ-साथ स्वच्छ और टिकाऊ परिवहन व्यवस्था को भी मजबूती मिलेगी।

केंद्र सरकार का यह प्रयास देश को हरित ऊर्जा, स्वच्छ परिवहन और आत्मनिर्भर भारत के लक्ष्य की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। आने वाले वर्षों में हाइड्रोजन तकनीक के विस्तार से न केवल पर्यावरण संरक्षण को बल मिलेगा, बल्कि भारत वैश्विक स्तर पर हरित परिवहन तकनीक के क्षेत्र में नई पहचान भी बना सकेगा।

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