नई दिल्ली। देशभर में ई-20 (20 प्रतिशत एथनॉल मिश्रित पेट्रोल) की गुणवत्ता और इससे वाहनों के प्रदर्शन पर पड़ रहे प्रभाव को लेकर लगातार शिकायतें सामने आने के बावजूद केंद्र सरकार फिलहाल अपनी नीति में किसी बदलाव के पक्ष में नहीं है। सरकार ने स्वीकार किया है कि ई-20 ईंधन के उपयोग से वाहनों की माइलेज औसतन पांच प्रतिशत तक कम हो सकती है, लेकिन इसके बावजूद उसने स्पष्ट कर दिया है कि मौजूदा व्यवस्था में किसी वैकल्पिक ईंधन की बिक्री शुरू करने या ई-20 नीति पर पुनर्विचार की फिलहाल कोई योजना नहीं है।
देश के विभिन्न हिस्सों से सैकड़ों वाहन चालकों ने शिकायत की है कि ई-20 पेट्रोल का उपयोग करने के बाद उनकी कारों और दोपहिया वाहनों की माइलेज में कमी आई है। कई उपभोक्ताओं ने इंजन की परफॉर्मेंस, पिकअप और ईंधन दक्षता पर भी सवाल उठाए हैं। इन शिकायतों के बाद यह मुद्दा सरकार के सामने पहुंचा, लेकिन केंद्र का कहना है कि ई-20 को लागू करने का निर्णय व्यापक वैज्ञानिक अध्ययन, परीक्षण और ऊर्जा सुरक्षा की दीर्घकालिक रणनीति को ध्यान में रखकर लिया गया है।
सरकार का कहना है कि एथनॉल मिश्रित पेट्रोल के उपयोग का सबसे बड़ा उद्देश्य देश की आयातित कच्चे तेल पर निर्भरता कम करना, विदेशी मुद्रा की बचत करना और पर्यावरण संरक्षण को बढ़ावा देना है। भारत अपनी पेट्रोलियम जरूरतों का बड़ा हिस्सा आयात करता है, जिससे हर वर्ष लाखों करोड़ रुपये का विदेशी मुद्रा व्यय होता है। ऐसे में एथनॉल मिश्रण बढ़ाकर इस बोझ को कम करने की दिशा में लगातार प्रयास किए जा रहे हैं।
केंद्र सरकार ने यह भी स्वीकार किया है कि ई-20 पेट्रोल के उपयोग से ईंधन की दक्षता पर कुछ असर पड़ता है। विशेषज्ञों के अनुसार एथनॉल की ऊर्जा क्षमता सामान्य पेट्रोल की तुलना में कम होती है, इसलिए समान दूरी तय करने के लिए ईंधन की खपत थोड़ी अधिक हो सकती है। इसी कारण औसतन पांच प्रतिशत तक माइलेज कम होने की संभावना रहती है। हालांकि सरकार का कहना है कि यह कमी सीमित है और इससे मिलने वाले आर्थिक एवं पर्यावरणीय लाभ कहीं अधिक महत्वपूर्ण हैं।
पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्रालय के अनुसार, देश में बिकने वाले अधिकांश नए वाहन अब ई-20 अनुकूल (E20 Compatible) तकनीक के साथ तैयार किए जा रहे हैं। वाहन निर्माता कंपनियों ने भी चरणबद्ध तरीके से ऐसे इंजन विकसित किए हैं जो 20 प्रतिशत एथनॉल मिश्रित पेट्रोल पर बेहतर प्रदर्शन कर सकें। सरकार का कहना है कि आने वाले वर्षों में लगभग सभी नए वाहन इस ईंधन के अनुरूप होंगे, जिससे उपभोक्ताओं को किसी प्रकार की तकनीकी परेशानी नहीं होगी।
हालांकि ऑटोमोबाइल विशेषज्ञों का कहना है कि पुराने मॉडल के कुछ वाहनों में ई-20 के उपयोग से माइलेज और प्रदर्शन पर अपेक्षाकृत अधिक असर देखने को मिल सकता है। उनका सुझाव है कि वाहन मालिक अपनी कंपनी द्वारा जारी दिशा-निर्देशों का पालन करें और यह सुनिश्चित करें कि उनका वाहन ई-20 ईंधन के उपयोग के लिए उपयुक्त है। कई वाहन निर्माता पहले ही अपने ग्राहकों को इस संबंध में विस्तृत जानकारी उपलब्ध करा चुके हैं।
ई-20 नीति का एक महत्वपूर्ण उद्देश्य किसानों की आय बढ़ाना भी है। सरकार का मानना है कि एथनॉल उत्पादन में वृद्धि से गन्ना, मक्का और अन्य कृषि उत्पादों की मांग बढ़ेगी, जिससे किसानों को बेहतर बाजार मिलेगा। इसके साथ ही चीनी मिलों और डिस्टिलरी उद्योग को भी नए अवसर प्राप्त होंगे। पिछले कुछ वर्षों में देश में एथनॉल उत्पादन क्षमता में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है और तेल विपणन कंपनियां बड़ी मात्रा में एथनॉल की खरीद कर रही हैं।
विशेषज्ञों का यह भी कहना है कि एथनॉल मिश्रित ईंधन के उपयोग से कार्बन उत्सर्जन में कमी आती है। इससे वायु प्रदूषण घटाने और जलवायु परिवर्तन की चुनौतियों से निपटने में मदद मिल सकती है। यही कारण है कि दुनिया के कई देशों में भी एथनॉल मिश्रित ईंधन के उपयोग को बढ़ावा दिया जा रहा है। भारत ने भी स्वच्छ ऊर्जा और हरित परिवहन के अपने दीर्घकालिक लक्ष्यों के तहत इस नीति को अपनाया है।
वाहन मालिकों की शिकायतों के बीच यह मांग भी उठ रही है कि पेट्रोल पंपों पर ई-20 के साथ-साथ सामान्य पेट्रोल का विकल्प भी उपलब्ध कराया जाए, ताकि उपभोक्ता अपनी आवश्यकता और वाहन की क्षमता के अनुसार ईंधन का चयन कर सकें। हालांकि केंद्र सरकार ने फिलहाल ऐसी किसी व्यवस्था की संभावना से इनकार किया है। सरकार का कहना है कि ई-20 को चरणबद्ध तरीके से देशभर में लागू किया जा रहा है और भविष्य की रणनीति इसी दिशा में आगे बढ़ेगी।
ऊर्जा विशेषज्ञों का मानना है कि प्रारंभिक दौर में किसी भी नई ईंधन तकनीक को लेकर कुछ व्यावहारिक चुनौतियां सामने आती हैं, लेकिन समय के साथ वाहन तकनीक और ईंधन गुणवत्ता में सुधार होने पर इन समस्याओं में कमी आती है। उनका कहना है कि वाहन निर्माता कंपनियों, तेल विपणन कंपनियों और सरकार के बीच बेहतर समन्वय से उपभोक्ताओं की चिंताओं का समाधान किया जा सकता है।
फिलहाल केंद्र सरकार का स्पष्ट संदेश है कि ई-20 कार्यक्रम देश की ऊर्जा सुरक्षा, पर्यावरण संरक्षण और कृषि अर्थव्यवस्था को मजबूत करने की एक महत्वपूर्ण पहल है। माइलेज में सीमित कमी को स्वीकार करने के बावजूद सरकार इसे नीति में बदलाव का आधार नहीं मान रही है। ऐसे में निकट भविष्य में देश में ई-20 पेट्रोल ही प्रमुख ईंधन के रूप में उपलब्ध रहेगा और सरकार इसी दिशा में अपने एथनॉल मिश्रण कार्यक्रम को आगे बढ़ाने के लिए प्रतिबद्ध है।
News Wani
