पटना। बिहार की हाई-प्रोफाइल बांकीपुर विधानसभा उपचुनाव में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के घोषित उम्मीदवार द्वारा नामांकन वापस लेने के बाद राज्य की राजनीति गरमा गई है। इस घटनाक्रम को लेकर जन सुराज के सूत्रधार और बांकीपुर से चुनाव मैदान में उतरे प्रशांत किशोर ने भाजपा पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि अब तक देश में लोग भाजपा के डर से चुनावी मैदान छोड़ते रहे हैं, लेकिन पहली बार भाजपा खुद हार के डर से पीछे हटती दिखाई दे रही है। हालांकि भाजपा ने उम्मीदवार के नामांकन वापस लेने के तुरंत बाद नया प्रत्याशी घोषित कर दिया है।
प्रशांत किशोर ने मीडिया से बातचीत में कहा कि भाजपा वर्षों से अपने राजनीतिक प्रभाव का इस्तेमाल कर विपक्षी दलों और उम्मीदवारों पर दबाव बनाने का आरोप झेलती रही है, लेकिन बांकीपुर में परिस्थितियां बदलती नजर आ रही हैं। उन्होंने दावा किया कि भाजपा को अपनी संभावित हार का आभास हो गया है, इसलिए उसे अंतिम समय में उम्मीदवार बदलने का फैसला करना पड़ा। उन्होंने कहा कि यह लोकतंत्र में बदलाव का संकेत है और जनता अब विकल्प तलाश रही है।
दरअसल, भाजपा ने पहले अभिषेक कुमार सिन्हा को अपना उम्मीदवार बनाया था। उन्होंने नामांकन भी दाखिल कर दिया था, लेकिन बाद में पारिवारिक कारणों का हवाला देते हुए अपना नामांकन वापस ले लिया। इसके बाद भाजपा ने तत्काल नीरज कुमार सिन्हा को नया उम्मीदवार घोषित कर चुनावी मुकाबले में उतार दिया। पार्टी का कहना है कि उम्मीदवार परिवर्तन पूरी तरह व्यक्तिगत कारणों से हुआ है और इसका चुनावी रणनीति या किसी राजनीतिक दबाव से कोई संबंध नहीं है।
भाजपा नेताओं ने विपक्ष के आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि पार्टी पूरी मजबूती के साथ चुनाव लड़ रही है और बांकीपुर सीट पर जीत दर्ज करेगी। उनका कहना है कि उम्मीदवार बदलने का निर्णय संगठनात्मक और व्यक्तिगत परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए लिया गया है। भाजपा ने यह भी स्पष्ट किया कि चुनाव प्रचार पूरी ताकत से जारी रहेगा और कार्यकर्ताओं में किसी प्रकार का भ्रम नहीं है।
बांकीपुर विधानसभा उपचुनाव इस बार इसलिए भी चर्चा में है क्योंकि पहली बार चुनावी रणनीतिकार से राजनेता बने प्रशांत किशोर स्वयं चुनाव मैदान में हैं। उन्होंने भाजपा के मजबूत गढ़ माने जाने वाले बांकीपुर से चुनाव लड़ने का फैसला करते हुए पहले ही कहा था कि उनका उद्देश्य केवल एक सीट जीतना नहीं, बल्कि बिहार की राजनीति में नई सोच और नई राजनीति का संदेश देना है। उन्होंने सुरक्षित सीट चुनने के बजाय भाजपा के प्रभाव वाले क्षेत्र से चुनाव लड़ने का निर्णय लिया।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि भाजपा उम्मीदवार के अचानक नामांकन वापस लेने से चुनावी माहौल और अधिक रोचक हो गया है। विपक्ष इस मुद्दे को भाजपा की कमजोरी के रूप में पेश करने की कोशिश कर रहा है, जबकि भाजपा इसे सामान्य संगठनात्मक प्रक्रिया बता रही है। ऐसे में आने वाले दिनों में चुनाव प्रचार और आरोप-प्रत्यारोप और तेज होने की संभावना है।
बांकीपुर विधानसभा उपचुनाव को बिहार की राजनीति के लिए प्रतिष्ठा की लड़ाई माना जा रहा है। एक ओर भाजपा अपनी परंपरागत सीट को बचाने की चुनौती का सामना कर रही है, वहीं दूसरी ओर जन सुराज के लिए यह चुनाव अपनी राजनीतिक स्वीकार्यता साबित करने का महत्वपूर्ण अवसर है। राष्ट्रीय जनता दल (राजद) ने भी इस सीट पर अपना उम्मीदवार उतारकर मुकाबले को त्रिकोणीय बना दिया है, जिससे चुनाव और दिलचस्प हो गया है।
राजनीतिक पर्यवेक्षकों का कहना है कि इस उपचुनाव का परिणाम केवल एक विधानसभा सीट तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि आगामी बिहार विधानसभा चुनाव से पहले प्रमुख राजनीतिक दलों की रणनीति और जनाधार का संकेत भी देगा। यही कारण है कि सभी दल इस सीट को प्रतिष्ठा का प्रश्न मानकर पूरी ताकत झोंक रहे हैं।
फिलहाल भाजपा ने नए उम्मीदवार के साथ चुनावी अभियान को गति दे दी है, जबकि प्रशांत किशोर लगातार जनसंपर्क अभियान के जरिए भाजपा और राज्य सरकार पर हमलावर हैं। आने वाले दिनों में बांकीपुर का चुनावी मुकाबला और अधिक दिलचस्प होने की उम्मीद है, जिस पर पूरे देश की राजनीतिक नजरें टिकी हुई हैं।
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