फतेहपुर। किसान-मजदूर मोर्चा के पदाधिकारियों ने किसानों और मजदूरों की विभिन्न समस्याओं को लेकर धरना दिया। इसके बाद 11 सूत्रीय मांग पत्र जिलाधिकारी के माध्यम से प्रधानमंत्री और मुख्यमंत्री को भेजा गया।
प्रधानमंत्री और मुख्यमंत्री को भेजे गए ज्ञापन में किसान आयोग का गठन कर उसे संवैधानिक दर्जा देने की प्रमुख मांग की गई। साथ ही पशुपालन, गाय, भैंस, बकरी और भेड़ पालन को कृषि का दर्जा देने तथा पशुपालन करने वाली महिलाओं को भी किसान सम्मान निधि की तर्ज पर सम्मान निधि देने की मांग उठाई गई।
मोर्चा ने केंद्र सरकार से किसानों की आय दोगुनी करने के वादे को पूरा करने की मांग करते हुए कहा कि किसानों को उनकी उपज का उचित मूल्य मिलना चाहिए। इसके अलावा कीटनाशक दवाओं के दाम आधे करने, खाद की कीमतें घटाने, यूरिया की कीमत 150 रुपये प्रति बोरी, जैविक खाद की कीमत आधी करने तथा डीएपी की कीमत 600 रुपये प्रति बोरी करने की मांग की गई। महंगे कृषि यंत्रों और ट्रैक्टरों को भी आधी कीमत पर उपलब्ध कराने की मांग रखी गई।
ज्ञापन में किसानों और मजदूरों के स्वास्थ्य बीमा की राशि पांच लाख रुपये से बढ़ाकर 10 लाख रुपये करने, गंभीर बीमारी की स्थिति में बेहतर इलाज की सुविधा उपलब्ध कराने तथा किसान-मजदूरों के बच्चों के लिए सरकारी नौकरियों में आरक्षण कोटा निर्धारित करने की मांग की गई।
इसके साथ ही वृद्ध, विधवा और दिव्यांग पेंशन बढ़ाकर पांच हजार रुपये प्रतिमाह करने, ग्रामीण क्षेत्रों में पात्र लोगों को आवास सुविधा उपलब्ध कराने और आवास योजना में उनका कोटा बढ़ाने की मांग की गई।
प्रदेश के थानों में गरीबों की शिकायतों पर बिना पैसे लिए एफआईआर दर्ज करने तथा कथित धन उगाही पर रोक लगाने की मांग भी उठाई गई।
धरना और ज्ञापन के दौरान मुख्य रूप से जिलाध्यक्ष राजू विश्वकर्मा, किसान प्रकोष्ठ के जिलाध्यक्ष सदाशिव विश्वकर्मा, श्रीपाल, डॉ. नंदलाल, रामलाल पासवान, इंद्रपाल, गंगा देवी, हरिलाल, बुद्धसेन, फूलचंद्र, रंजीत, मोतीलाल, बंशीलाल, शांति देवी, विमला और सूरजकली सहित अन्य लोग मौजूद रहे।
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